BREAKING:
August 27 2026 06:50 am

यूपी-बिहार में अगले 72 घंटे बेहद भारी! एक साथ 2-2 वेदर सिस्टम एक्टिव होने से मूसलाधार बारिश और वज्रपात का अलर्ट

Post

उत्तर और पूर्वी भारत में मानसून एक बार फिर पूरी ताकत के साथ सक्रिय हो गया है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने उत्तर प्रदेश और बिहार समेत कई राज्यों के लिए अगले तीन दिनों (72 घंटों) का विशेष अलर्ट जारी किया है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, वातावरण में नमी और मानसूनी हवाओं के तीव्र दबाव के कारण अगले तीन दिनों तक यूपी, बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में झमाझम से लेकर अत्यधिक भारी बारिश (Heavy to Very Heavy Rainfall) होने की प्रबल संभावना है। इस दौरान तेज हवाएं चलने और बादलों की भीषण गड़गड़ाहट के साथ आकाशीय बिजली (वज्रपात) गिरने की भी चेतावनी दी गई है।

मौसम विभाग के अनुसार, पिछले 24 घंटों में झारखंड के पलामू में सर्वाधिक 19 सेंटीमीटर, पूर्वी उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ सदर में 18 सेंटीमीटर, मेघालय में 18 सेंटीमीटर, छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा में 17 सेंटीमीटर और ओडिशा के बडकोट में 16 सेंटीमीटर बारिश दर्ज की गई है। इसके अलावा दिल्ली-एनसीआर के कई इलाकों में भी 10 सेंटीमीटर तक भारी बारिश रिकॉर्ड की गई, जिससे तापमान में भारी गिरावट आई है।

एक साथ 2-2 वेदर सिस्टम एक्टिव: क्या है मूसलाधार बारिश का मुख्य कारण?

मौसम विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया है कि वर्तमान में देश के वायुमंडल में दो शक्तिशाली वेदर सिस्टम एक साथ सक्रिय हैं, जिसकी वजह से मानसून की अक्षीय रेखा (Monsoon Trough) पूरी तरह से पूर्वी और मध्य भारत के ऊपर केंद्रित हो गई है।

पहला सिस्टम (Low-Pressure Area): झारखंड और उससे सटे गंगीय पश्चिम बंगाल व ओडिशा के ऊपर एक मजबूत निम्न दबाव का क्षेत्र (कम दबाव का क्षेत्र) बना हुआ है, जो धीरे-धीरे पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा की ओर बढ़ रहा है।

दूसरा सिस्टम (Cyclonic Circulation): मध्य क्षोभमंडल स्तर पर एक ऊपरी वायु का चक्रवाती परिसंचरण (Cyclonic Circulation) सक्रिय है, जो अरब सागर और बंगाल की खाड़ी दोनों तरफ से प्रचुर मात्रा में नमी खींचकर मैदानी इलाकों में भेज रहा है।

इन दोनों मौसम प्रणालियों के आपस में मिलने के कारण गंगा के मैदानी इलाकों—विशेषकर पूर्वांचल और बिहार में घने काले बादलों का डेरा जम गया है, जिससे लगातार रुक-रुक कर और कई जगहों पर मूसलाधार बारिश का दौर शुरू हो चुका है।

उत्तर प्रदेश में बारिश का तांडव: पूर्वांचल से लेकर पश्चिमी यूपी तक अलर्ट

उत्तर प्रदेश में मौसम विभाग ने अगले 48 से 72 घंटों के लिए व्यापक बारिश का पूर्वानुमान जारी किया है। राज्य के पूर्वी हिस्सों (पूर्वांचल) में स्थिति अधिक संवेदनशील बनी हुई है।

पूर्वी उत्तर प्रदेश: आजमगढ़, मऊ, बलिया, गाजीपुर, जौनपुर, वाराणसी, गोरखपुर, देवरिया, कुशीनगर, बस्ती, संतकबीरनगर, महाराजगंज, सिद्धार्थनगर, गोंडा, बलरामपुर, श्रावस्ती, बहराइच, अयोध्या, सुल्तानपुर, अमेठी और प्रयागराज में कई स्थानों पर भारी से अत्यधिक भारी बारिश और वज्रपात की चेतावनी जारी की गई है।

मध्य और पश्चिमी उत्तर प्रदेश: लखनऊ, कानपुर, उन्नाव, रायबरेली, सीतापुर, हरदोई, लखीमपुर खीरी, बरेली, बदायूं, पीलीभीत, शाहजहांपुर, अलीगढ़, मथुरा, आगरा, मेरठ, गाजियाबाद और नोएडा में मध्यम से भारी बारिश के साथ गरज-चमक का अनुमान है।

मौसम विज्ञान केंद्र लखनऊ के अनुसार, अगले दो दिनों तक राज्य में बादलों की आवाजाही और बारिश का यह तीव्र सिलसिला बना रहेगा, जिसके बाद मानसूनी गतिविधियों में हल्की कमी आने की संभावना है।

बिहार में नदियों का जलस्तर बढ़ने का खतरा: उत्तर और दक्षिण बिहार में वज्रपात का अलर्ट

बिहार में मौसम विभाग (Met Centre Patna) ने राज्य के अधिकांश जिलों के लिए 'येलो' और 'ऑरेंज' अलर्ट जारी किया है। लगातार हो रही बारिश और पड़ोसी देश नेपाल के तराई क्षेत्रों में जलभराव के कारण राज्य की प्रमुख नदियों—गंगा, गंडक, बूढ़ी गंडक, कोसी, बागमती और कमला बलान के जलस्तर में तेजी से वृद्धि देखी जा रही है।

उत्तर बिहार: पश्चिमी चंपारण, पूर्वी चंपारण, सीवान, सारण, गोपालगंज, सीतामढ़ी, मधुबनी, मुजफ्फरपुर, दरभंगा, वैशाली, शिवहर और समस्तीपुर में भारी बारिश और आंधी-तूफान का अंदेशा है।

दक्षिण और पूर्वी बिहार: पटना, गया, नालंदा, शेखपुरा, नवादा, बेगूसराय, लखीसराय, जहानाबाद, भागलपुर, बांका, जमुई, मुंगेर, खगड़िया, सहरसा, मधेपुरा, पूर्णिया, कटिहार, किशनगंज और अररिया में तेज हवाओं के साथ मूसलाधार बारिश और आकाशीय बिजली गिरने की आशंका जताई गई है।

आपदा प्रबंधन विभाग ने विशेष रूप से ग्रामीण इलाकों और किसानों को खुले खेतों में जाने से बचने और पक्के मकानों में शरण लेने की सख्त हिदायत दी है।

झारखंड, मध्य प्रदेश और दिल्ली-NCR में मौसम का मिजाज

उत्तर प्रदेश और बिहार के अलावा अन्य पड़ोसी राज्यों में भी बारिश का व्यापक प्रभाव देखने को मिल रहा है:

झारखंड: पलामू, रांची, जमशेदपुर, धनबाद और बोकारो समेत पूरे राज्य में अगले 4-5 दिनों तक लगातार बारिश की संभावना है। पलामू में रिकॉर्ड 19 सेमी बारिश से कई निचले इलाकों में पानी भर गया है।

मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़: पश्चिमी और पूर्वी मध्य प्रदेश के जिलों तथा छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा, बस्तर, रायपुर और बिलासपुर में 26 से 29 अगस्त तक भारी वर्षा का दौर जारी रहेगा।

दिल्ली-एनसीआर: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली, नोएडा, गुरुग्राम और फरीदाबाद में आसमान में घने बादल छाए रहने और शाम या रात के समय मध्यम बारिश की संभावना है। तापमान 32 से 34 डिग्री सेल्सियस के बीच बना हुआ है, जिससे उमस से राहत मिली है।

पहाड़ी राज्य: उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में 25 से 31 अगस्त के दौरान कई स्थानों पर भूस्खलन (Landslide) और बादल फटने जैसी मौसमी घटनाओं को लेकर येलो अलर्ट जारी किया गया है।

वज्रपात (आकाशीय बिजली) और जलभराव: प्रशासन की महत्वपूर्ण एडवाइजरी

मानसून के इस दौर में सबसे बड़ा खतरा आकाशीय बिजली (Lightning) से होता है। पिछले कुछ वर्षों में बिहार और यूपी में वज्रपात से जानमाल का भारी नुकसान हुआ है। इसे देखते हुए आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने जनता के लिए जरूरी दिशा-निर्देश जारी किए हैं:

पेड़ों और खंभों के नीचे न खड़े हों: बारिश शुरू होने पर कभी भी किसी ऊंचे पेड़, बिजली के खंभे, ट्रांसफॉर्मर या धातु की संरचनाओं के नीचे शरण न लें।

दामिनी ऐप का उपयोग करें: भारत सरकार के 'दामिनी ऐप' (Damini App) को मोबाइल में डाउनलोड करें, जो बिजली गिरने से 20 से 30 मिनट पहले सटीक चेतावनी देता है।

इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बंद रखें: तेज गरज-चमक के दौरान टीवी, फ्रिज, कंप्यूटर और वाई-फाई राउटर के प्लग निकाल दें और लैंडलाइन फोन के इस्तेमाल से बचें।

जलभराव से सावधानी: शहरों और कस्बों में अंडरपास, जलमग्न सड़कों और गहरे गड्ढों से दूर रहें। खुले मेनहोल और बिजली के टूटे तारों से सुरक्षित दूरी बनाए रखें।

किसानों के लिए कृषि वैज्ञानिकों की सलाह

यह बारिश खरीफ फसलों, विशेषकर धान (Paddy Crop) की रोपाई और वृद्धि के लिए वरदान साबित हो रही है। लंबे समय से कम बारिश से जूझ रहे पूर्वांचल और बिहार के किसानों को इस मानसूनी बारिश से बड़ी राहत मिली है।

हालांकि, कृषि वैज्ञानिकों ने सलाह दी है कि जिन खेतों में पानी निकासी (Drainage) की उचित व्यवस्था नहीं है, वहां से अतिरिक्त पानी निकालने का प्रबंध करें ताकि मक्का, दलहन और तिलहन की फसलों को गलने से बचाया जा सके। साथ ही बारिश के तुरंत बाद कीटनाशकों और उर्वरकों के छिड़काव से बचें ताकि दवाएं बह न जाएं।