सीएम योगी के कड़े तेवरों के बाद कानपुर नगर निगम में महा-ऐक्शन; ठेकेदारों के रजिस्ट्रेशन की कमेटी रद्द, 500 करोड़ के भुगतानों पर तत्काल रोक
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कड़े रुख और भ्रष्टाचार पर 'जीरो टॉलरेंस' नीति के तहत कानपुर नगर निगम में सरकारी मशीनरी पर अब तक का सबसे बड़ा हंटर चला है। हाल ही में उच्चस्तरीय वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग समीक्षा बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने कानपुर मंडल के शीर्ष अधिकारियों की क्लास लगाते हुए सीधा सवाल दागा था कि "कानपुर नगर निगम में क्या चल रहा है? किसी के नाम से कैसे अवैध वसूली हो रही है और सरकारी ठेकों में माफियागिरी कैसे फल-फूल रही है?" सीएम योगी की इस सख्त फटकार और सीधी चेतावनी के बाद नगर निगम प्रशासन, पुलिस कमिश्नरेट और खुफिया विभाग हरकत में आ गए। मुख्यमंत्री के आदेश के चंद घंटों के भीतर नगर आयुक्त अर्पित उपाध्याय ने भ्रष्टाचार के गठजोड़ पर कड़ा प्रहार करते हुए ठेकेदारों के रजिस्ट्रेशन के लिए गठित समिति को तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया और नगर निगम से जुड़े सभी ठेकेदारों के करोड़ों रुपये के भुगतानों पर पूर्ण रोक लगा दी है।
ठेकेदार रजिस्ट्रेशन कमेटी रद्द: पार्षदों और इंजीनियरों का सिंडिकेट टूटा
नगर निगम में विकास कार्यों के नाम पर ठेकेदारों के मनमाने पंजीकरण और चहेती फर्मों को उपकृत करने के खेल को खत्म करने के लिए नगर आयुक्त ने रजिस्ट्रेशन की मौजूदा व्यवस्था को पूरी तरह से भंग कर दिया है। अब तक ठेकेदारों के पंजीकरण की मंजूरी देने वाली समिति में एक अधिशासी अभियंता (Executive Engineer) और महापौर प्रमिला पांडेय द्वारा नामित दो पार्षद शामिल होते थे।
जांच में यह बात सामने आई कि इस समिति की आड़ में कई ऐसी अपात्र और फर्जी फर्मों का रजिस्ट्रेशन कर दिया गया, जिनके पास न तो तकनीकी संसाधन थे और न ही सड़क-नाली निर्माण के लिए आवश्यक मशीनरी। नगर आयुक्त ने इस समिति को निरस्त करते हुए स्पष्ट किया है कि अब नए सिरे से एक पारदर्शी और सख्त कमेटी का गठन किया जाएगा, जिसमें पूरी जांच-पड़ताल और भौतिक सत्यापन (Physical Verification) के बाद ही किसी फर्म को नगर निगम में काम करने की पात्रता मिलेगी।
500 करोड़ के विकास कार्यों की फाइलों की जांच, सभी पेमेंट्स फ्रीज
सीएम योगी के निर्देश के बाद नगर आयुक्त ने नगर निगम के तहत 15वें वित्त आयोग (15th Finance Commission) और अवस्थापना मद से स्वीकृत 500 करोड़ रुपये से अधिक के विकास कार्यों की फाइलों की सघन जांच शुरू करा दी है। जब तक हर एक फाइल, टेंडर प्रक्रिया और जमीनी कार्य की गुणवत्ता की तकनीकी रिपोर्ट तैयार नहीं हो जाती, तब तक सभी ठेकेदारों के वर्तमान और पुराने सभी तरह के बिलों के भुगतान (Payments) पर तत्काल रोक लगा दी गई है।
नगर आयुक्त अर्पित उपाध्याय ने दो टूक शब्दों में कहा कि फाइलों की एक-एक एंट्री की सूक्ष्म पड़ताल की जा रही है। इस जांच में निर्माण सामग्री की गुणवत्ता से लेकर टेंडर शर्तों के उल्लंघन तक की विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जाएगी। नगर आयुक्त ने सख्त चेतावनी दी है कि जांच में जो भी अधिकारी, इंजीनियर या ठेकेदार दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ न केवल विभागीय कार्रवाई होगी, बल्कि सरकारी धन के गबन के आरोप में एफआईआर दर्ज कर जेल भेजा जाएगा।
हॉट मिक्स प्लांट के नाम पर बड़ा फर्जीवाड़ा: 7 फर्में ब्लैकलिस्ट, 100 करोड़ के टेंडर रद्द
रविवार को छुट्टी के दिन भी नगर निगम के दफ्तर खोलकर फाइलों की जांच की गई और अपर नगर आयुक्त अनूप कुमार के नेतृत्व में जोनल अभियंताओं की टीमों ने ठेकेदारों के ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की। इस छापे में सबसे बड़ा फर्जीवाड़ा सड़कों के निर्माण में 'हॉट मिक्स प्लांट' (Hot Mix Plant) को लेकर उजागर हुआ। ठेकेदारों ने कागजों में यह दावा करके टेंडर हासिल किए थे कि उनके पास अत्याधुनिक हॉट मिक्स प्लांट और पेवर मशीनें मौजूद हैं, लेकिन मौके पर जांच करने पर ज्यादातर ठेकेदारों के पास प्लांट ही नहीं मिला।
भौंती क्षेत्र में हॉट मिक्स प्लांट एसोसिएशन के एक बड़े पदाधिकारी की फर्म पर जब टीम पहुंची, तो वहां सड़क निर्माण के जरूरी उपकरण नदारद मिले। नगर आयुक्त ने तुरंत कार्रवाई करते हुए फर्जीवाड़ा करने वाली 7 बड़ी ठेकेदार फर्मों को ब्लैकलिस्ट (Blacklist) कर दिया और उन पर भारी जुर्माना लगाने के आदेश दिए हैं। इसके साथ ही संदिग्ध पाए गए करीब 100 करोड़ रुपये के टेंडरों को तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया गया है।
पुलिस का शिकंजा: 6 एफआईआर दर्ज, 2 ठेकेदार गिरफ्तार और सरगना फरार
इस सिंडिकेट के खिलाफ केवल प्रशासनिक ही नहीं, बल्कि पुलिस की कानूनी कार्रवाई भी तेज हो गई है। कानपुर पुलिस कमिश्नरेट ने टेंडर में दबाव बनाने, रंगदारी वसूलने और फर्जी दस्तावेज तैयार करने के मामले में 6 अलग-अलग एफआईआर दर्ज की हैं। इनमें से 5 मुकदमे सीधे नगर निगम प्रशासन की ओर से दर्ज कराए गए हैं, जबकि एक मुकदमा पीड़ित ठेकेदार की शिकायत पर दर्ज हुआ है।
पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 2 आरोपी ठेकेदारों को गिरफ्तार कर लिया है। वहीं इस पूरे वसूली और टेंडर सिंडिकेट का मुख्य सरगना बताया जा रहा गोविंद शर्मा पुलिस की दबिश के बाद से फरार चल रहा है। पुलिस सर्विलांस के मुताबिक उसकी लोकेशन राजस्थान और मध्य प्रदेश में ट्रैक की जा रही है और उसकी गिरफ्तारी के लिए कई टीमें दबिश दे रही हैं। जांच में खुलासा हुआ है कि यह सिंडिकेट लॉटरी सिस्टम और धमकियों के दम पर 85 प्रतिशत तक के ठेके आपस में तय करता था। पुलिस कमिश्नर ने बताया कि ब्लैकलिस्ट की गई फर्मों के बैंक खातों, संपत्तियों और उनसे सांठगांठ रखने वाले निगम अधिकारियों की भूमिका की भी गहन जांच की जा रही है।
ई-टेंडरिंग से होगी नई शुरुआत, भ्रष्टाचारियों पर होगी सख्त कार्रवाई
नगर निगम में फैले इस सफेदपोश टेंडर माफिया राज को पूरी तरह ध्वस्त करने के लिए अब पूरी व्यवस्था का डिजिटलीकरण किया जा रहा है। निरस्त किए गए 100 करोड़ के कार्यों और आने वाले सभी नए टेंडरों को अब पूरी तरह से पारदर्शी ई-टेंडरिंग (E-Tendering) पोर्टल के माध्यम से निकाला जाएगा। इसके लिए नगर आयुक्त ने विशेष तकनीकी टीम का गठन कर दिया है।
सीएम योगी की इस सीधी निगरानी और ताबड़तोड़ कार्रवाई से नगर निगम के भ्रष्ट अधिकारियों और ठेकेदारों में हड़कंप मच गया है। इस बड़ी कार्रवाई ने साफ संदेश दे दिया है कि प्रदेश में जनता के टैक्स के पैसे से होने वाले विकास कार्यों में किसी भी तरह की कमीशनखोरी, माफियागिरी और घटिया निर्माण को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।