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August 26 2026 05:07 am

UP में स्वाइन फ्लू को लेकर स्वास्थ्य विभाग का हाई अलर्ट; कानपुर के उर्सला और हैलट अस्पताल में 20-20 बेड रिजर्व

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मानसून की लगातार बारिश, उमस और तापमान में उतार-चढ़ाव के बीच उत्तर प्रदेश में मौसमी इन्फ्लूएंजा और स्वाइन फ्लू (H1N1 वायरस) का खतरा गहराने लगा है। राज्य में इन्फ्लूएंजा और श्वसन संक्रमण के मामलों में वृद्धि की आशंका को देखते हुए स्वास्थ्य महानिदेशालय और जिला स्वास्थ्य विभाग ने कड़े सुरक्षात्मक कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। औद्योगिक नगरी कानपुर समेत प्रदेश के प्रमुख जनपदों में स्वाइन फ्लू को लेकर विशेष सतर्कता बरती जा रही है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) के निर्देश पर जिले के दो सबसे बड़े सरकारी अस्पतालों—लाला लाजपत राय (हैलट) अस्पताल और उर्सला मेमोरियल अस्पताल (कांशीराम संयुक्त चिकित्सालय) में संदिग्ध और गंभीर मरीजों के तत्काल इलाज के लिए 20-20 विशेष आइसोलेशन बेड आरक्षित (Reserve) कर दिए गए हैं। स्वास्थ्य विभाग ने सभी प्राथमिक व सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को भी अलर्ट मोड पर रहने का निर्देश दिया है।

हैलट और उर्सला अस्पताल में 20-20 बेड का विशेष आइसोलेशन वार्ड तैयार

स्वास्थ्य विभाग की आपात बैठक के बाद दोनों प्रमुख अस्पतालों में संक्रमण रोकथाम की पुख्ता व्यवस्था की गई है। दोनों अस्पतालों में 20-20 बेड के समर्पित आइसोलेशन वार्ड सक्रिय कर दिए गए हैं, ताकि स्वाइन फ्लू के पुष्ट या संदिग्ध मरीजों को सामान्य मरीजों से पूरी तरह अलग रखकर उनका इलाज किया जा सके।

इन आरक्षित वार्डों में सघन चिकित्सा की सभी आधुनिक सुविधाएं जुटाई गई हैं। प्रत्येक वार्ड में 24 घंटे ऑक्सीजन सपोर्ट, पोर्टेबल वेंटिलेटर, मल्टी-पैरा मॉनिटर, नेबुलाइजर और सक्शन मशीनें तैनात की गई हैं। इसके साथ ही क्रिटिकल केयर डॉक्टरों, पल्मोनोलॉजिस्ट्स (श्वसन रोग विशेषज्ञ) और प्रशिक्षित नर्सिंग स्टाफ की 24x7 रोस्टर ड्यूटी तय कर दी गई है। अस्पताल प्रशासन को निर्देश दिया गया है कि स्वाइन फ्लू वार्ड में तैनात स्वास्थ्य कर्मियों को अनिवार्य रूप से एन-95 (N-95) मास्क, पीपीई किट और फेस शील्ड उपलब्ध कराई जाए ताकि संक्रमण का फैलाव मेडिकल स्टाफ में न हो।

ओपीडी में आने वाले ILI और SARI मरीजों की अनिवार्य स्क्रीनिंग

जिला स्वास्थ्य प्रशासन ने सभी सरकारी और निजी अस्पतालों को ओपीडी (बाह्य रोगी विभाग) स्तर पर सख्त ट्राइएज और स्क्रीनिंग व्यवस्था लागू करने का आदेश दिया है। ओपीडी में आने वाले हर उस मरीज का तापमान और ऑक्सीजन सेचुरेशन (SpO2) जांचा जा रहा है, जिसमें तेज बुखार, गले में खराश और खांसी जैसे 'इन्फ्लूएंजा-लाइक इलनेस' (ILI) के लक्षण दिखाई दे रहे हैं।

यदि किसी मरीज में सांस फूलने, सीने में दर्द या ऑक्सीजन का स्तर 94% से नीचे गिरने जैसे 'सीवियर एक्यूट रेस्पिरेटरी इन्फेक्शन' (SARI) के गंभीर लक्षण पाए जाते हैं, तो उसे बिना किसी देरी के तुरंत आइसोलेशन वार्ड में शिफ्ट किया जा रहा है। सीएमओ कार्यालय ने सभी निजी नर्सिंग होम्स और पैथोलॉजी लैब्स को भी निर्देश दिया है कि स्वाइन फ्लू का कोई भी संदिग्ध मामला सामने आने पर उसकी सूचना तत्काल इंटीग्रेटेड डिजीज सर्विलांस प्रोग्राम (IDSP) पोर्टल पर दर्ज कराई जाए।

टेमीफ्लू (Oseltamivir) का पर्याप्त स्टॉक और RT-PCR टेस्टिंग की व्यवस्था

स्वाइन फ्लू के इलाज में जीवन रक्षक मानी जाने वाली प्रमुख एंटीवायरल दवा ओसेल्टामिविर (Tamiflu) की पर्याप्त आपूर्ति जिले के सभी प्रमुख अस्पतालों और ड्रग वेयरहाउस में सुनिश्चित कर दी गई है। स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, वयस्कों और बच्चों के लिए आवश्यक सभी डोज (75mg, 45mg, 30mg कैप्सूल और सिरप) का बफर स्टॉक तैयार रखा गया है।

संक्रमण की सटीक पुष्टि के लिए संदिग्ध मरीजों के नेजोफैरिंजियल और ओरल स्वैब के नमूने लेकर रियल-टाइम आरटी-पीसीआर (RT-PCR) जांच के लिए भेजे जा रहे हैं। नमूनों की जांच किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) लखनऊ और स्थानीय मेडिकल कॉलेज की वायरोलॉजी लैब में प्राथमिकता के आधार पर कराई जा रही है ताकि 24 से 48 घंटे के भीतर रिपोर्ट प्राप्त कर तुरंत लक्षित इलाज शुरू किया जा सके।

स्वाइन फ्लू के मुख्य लक्षण और शुरुआती पहचान कैसे करें?

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, H1N1 इन्फ्लूएंजा-ए वायरस का संक्रमण श्वसन नलियों में तेजी से फैलता है। इसके लक्षण सामान्य मौसमी जुकाम से काफी मिलते-जुलते हैं, लेकिन इसकी तीव्रता कहीं अधिक होती है।

101 डिग्री फारेनहाइट या उससे अधिक का अचानक तेज बुखार और ठंड लगना।

लगातार सूखी या बलगम वाली तेज खांसी और सीने में जकड़न।

गले में तेज दर्द, खराश और खाना-पानी निगलने में तकलीफ।

गंभीर बदन दर्द, जोड़ों में जकड़न, तेज सिरदर्द और अत्यधिक कमजोरी।

लगातार नाक बहना, छींकें आना और आंखों से पानी गिरना।

कुछ मरीजों (विशेषकर बच्चों) में पेट दर्द, उल्टी और दस्त की शिकायत।

हाई-रिस्क ग्रुप्स के लिए दोगुना खतरा: बरतें विशेष सावधानी

मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने स्पष्ट किया है कि स्वाइन फ्लू का वायरस कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों पर सबसे तेजी से और जानलेवा हमला करता है। ऐसे लोगों को भीड़भाड़ वाले स्थानों से पूरी तरह दूर रहने और घर से बाहर निकलते समय मास्क का प्रयोग करने की हिदायत दी गई है।

60 वर्ष से अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिक।

5 वर्ष से कम आयु के छोटे बच्चे और नवजात शिशु।

गर्भवती महिलाएं और हाल ही में मां बनी महिलाएं।

डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, किडनी रोग, लिवर रोग या दिल की बीमारी से पीड़ित मरीज।

अस्थमा, सीओपीडी (COPD) या फेफड़ों के पुराने रोगों से ग्रस्त लोग।

कैंसर का इलाज करा रहे या स्टेरॉयड ले रहे इम्यूनोकॉम्प्रोमाइज्ड व्यक्ति।

स्वास्थ्य विभाग की गाइडलाइन: स्वाइन फ्लू से बचाव के 5 आसान नियम

जिला महामारी नियंत्रण इकाई ने आम जनता से अपील की है कि वे पैनिक न करें बल्कि स्वच्छता और बचाव के बुनियादी नियमों का कड़ाई से पालन करें:

हाथों की स्वच्छता: बाहर से आने के बाद, खाना खाने से पहले और किसी वस्तु को छूने के बाद कम से कम 20 सेकंड तक साबुन-पानी से हाथ धोएं या सैनिटाइजर का उपयोग करें।

चेहरे को बार-बार न छुएं: अपनी गंदी उंगलियों से आंख, नाक और मुंह को छूने से बचें, क्योंकि यह वायरस के शरीर में प्रवेश का सबसे सीधा रास्ता है।

रेस्पिरेटरी हाइजीन: खांसते या छींकते समय हमेशा मुंह और नाक को डिस्पोजेबल टिशू या अपनी कोहनी की मोड़ से ढकें।

सेल्फ-मेडिकेशन से बचें: बुखार या खांसी होने पर खुद से कोई भी एंटीबायोटिक या पेनकिलर न खरीदें। केवल योग्य डॉक्टर की सलाह पर ही दवा लें।

होम आइसोलेशन: यदि किसी व्यक्ति में फ्लू के लक्षण दिखाई दें, तो वह खुद को परिवार के अन्य सदस्यों से अलग कर ले और खूब सारा गुनगुना पानी, ओआरएस व ताजा गर्म सूप पिए।

समय पर सतर्कता और इलाज ही है स्वाइन फ्लू से बचाव का सबसे बड़ा हथियार

उत्तर प्रदेश स्वास्थ्य विभाग का यह अग्रिम कदम यह सुनिश्चित करने के लिए है कि राज्य में स्वाइन फ्लू का कोई भी क्लस्टर या सामुदायिक प्रसार न पनप सके। अस्पतालों में आरक्षित 20-20 बेड, दवाओं की पर्याप्त उपलब्धता और चौबीसों घंटे सक्रिय मेडिकल टीमें किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि यदि किसी भी व्यक्ति को तेज बुखार के साथ सांस लेने में हल्की सी भी परेशानी महसूस हो, तो वह तुरंत नजदीकी सरकारी अस्पताल पहुंचकर अपनी जांच कराए ताकि समय रहते उचित इलाज से फेफड़ों को सुरक्षित रखा जा सके।