टोक्यो में बोले पीयूष गोयल; नफरती नैरेटिव फैलाने वालों को दिया करारा जवाब, जापानी कंपनियों को BIS में छूट और 'सेमिकॉन 2.0' का बड़ा ऐलान
जापान की राजधानी टोक्यो में आयोजित एक उच्चस्तरीय बिजनेस व कम्युनिटी बैठक में भारत के केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वैश्विक नेतृत्व और देश के सामाजिक ताने-बाने पर बड़ा और बेबाक बयान दिया है। पीयूष गोयल ने कहा कि आज देश-विदेश में कुछ ताकतों द्वारा भारतीय लोगों के बीच गलतफहमियां पैदा करने और समाज को बांटने की दुर्भावनापूर्ण कोशिशें की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि अक्सर यह भ्रामक धारणा और नैरेटिव फैलाने का प्रयास किया जाता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समाज के किसी खास वर्ग को नुकसान पहुंचा सकते हैं या किसी समुदाय-विशेष के साथ भेदभाव कर सकते हैं।
इस झूठे नैरेटिव को सिरे से खारिज करते हुए केंद्रीय मंत्री ने अंतरराष्ट्रीय मंच से वैश्विक तथ्यों का हवाला दिया। उन्होंने कहा, "इस सच्चाई और वैश्विक तथ्य पर गौर कीजिए कि दुनिया के 7 से 8 इस्लामिक देशों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपने देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान (Highest Civilian Award) से नवाजा है। यदि आप केवल एक पड़ोसी देश पाकिस्तान को छोड़ दें, तो यह ऐतिहासिक तथ्य पूरी इस्लामिक दुनिया और अरब जगत में प्रधानमंत्री मोदी की अपार लोकप्रियता, सम्मान और उनके प्रति वैश्विक विश्वास को दर्शाता है।"
'बंटा हुआ देश कभी विकसित नहीं बन सकता': विकसित भारत 2047 का विजन
केंद्रीय मंत्री ने टोक्यो में भारतीय प्रवासियों, उद्योगपतियों और राजनयिकों को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय एकता और एकजुटता का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि भारत के राजनयिक दुनिया भर में देश की प्रतिष्ठा और प्रभाव को बढ़ाने के लिए जिस समर्पण और उत्साह के साथ दिन-रात काम कर रहे हैं, उसे सभी को देखना और समझना चाहिए।
गोयल ने जोर देकर कहा कि कोई भी बाहरी या आंतरिक ताकत भारत को बांट नहीं सकती। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, "जब हम वर्ष 2047 तक 'विकसित भारत' (Viksit Bharat 2047) के निर्माण की बात करते हैं, तो हम सभी को यह बुनियादी सत्य समझना होगा कि एक बंटा हुआ देश कभी भी विकसित और महाशक्ति नहीं बन सकता। 140 करोड़ भारतीयों की सामूहिक ऊर्जा, सबका साथ-सबका विकास का विश्वास और राष्ट्रीय अखंडता ही भारत को विश्व की तीसरी सबसे बड़ी आर्थिक ताकत बनाने की असली बुनियाद है।"
जापानी टेक कंपनियों को BIS प्रमाणन से छूट: भारत में निवेश को मिलेगा बूस्ट
टोक्यो दौरे के दौरान पीयूष गोयल ने सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और एडवांस्ड इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र की दिग्गज जापानी कंपनियों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों (CEOs) और प्रतिनिधियों के साथ उच्चस्तरीय गोलमेज बैठकें कीं। इस दौरान जापानी प्रौद्योगिकी कंपनियों ने भारत में अपनी फैक्ट्रियां स्थापित करने के लिए आवश्यक मशीनरी और कलपुर्जों पर भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) के प्रमाणन की अनिवार्यता को लेकर कुछ व्यावहारिक चिंताएं जताई थीं।
केंद्रीय मंत्री ने जापानी निवेशकों को आश्वस्त करते हुए बड़ा नीतिगत ऐलान किया। उन्होंने बताया कि भारत सरकार देश में हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स लगाने वाली कंपनियों की आवश्यकताओं को गंभीरता से समझ रही है। इसके लिए कलपुर्जों के आयात में बीआईएस प्रमाणन से जरूरत के आधार पर विशेष छूट देने की एक सुगम व्यवस्था तैयार की जा रही है। बीआईएस और वाणिज्य मंत्रालय को इस संबंध में तेजी से मानक प्रक्रिया बनाने के निर्देश दिए गए हैं। गोयल ने कहा कि यह छूट किसी विशिष्ट कंपनी, उद्योग, उत्पाद या संपूर्ण परियोजना के आधार पर दी जा सकेगी, जिससे बड़ी टेक कंपनियों के लिए अत्याधुनिक मशीनें और कच्चा माल भारत लाना बेहद तेज और आसान हो जाएगा।
'सेमिकॉन 2.0' और 150 अरब डॉलर का बाजार: 2028 में पहली सेमीकंडक्टर फैब यूनिट
भारत को दुनिया का नया सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण केंद्र बनाने के रोडमैप पर बोलते हुए पीयूष गोयल ने कहा कि भारत का घरेलू इलेक्ट्रॉनिक्स बाजार अभूतपूर्व गति से बढ़ रहा है। एक अनुमान के अनुसार, वर्ष 2032 तक केवल भारत में सेमीकंडक्टर चिप्स की वार्षिक मांग लगभग 150 अरब डॉलर (करीब 12.5 लाख करोड़ रुपये) तक पहुंचने की संभावना है।
इस विशाल मांग को पूरा करने और वैश्विक सप्लाई चेन को सुरक्षित करने के लिए भारत सरकार ने 'सेमिकॉन 2.0' (Semicon 2.0) अभियान को औपचारिक मंजूरी दी है। इस मिशन के लिए केंद्र सरकार ने 1.27 लाख करोड़ रुपये का समर्पित बजटीय प्रावधान रखा है। राज्यों द्वारा दिए जाने वाले अतिरिक्त प्रोत्साहनों को मिलाकर इस क्षेत्र में लगभग 50 अरब डॉलर का कुल निवेश धरातल पर उतरने की उम्मीद है। केंद्रीय मंत्री ने बताया कि यह कार्यक्रम चिप डिजाइन, विनिर्माण उपकरण, सामग्री और सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन (Fab) कारखानों समेत 6 प्रमुख रणनीतिक क्षेत्रों पर केंद्रित है। उन्होंने घोषणा की कि भारत की पहली वाणिज्यिक सेमीकंडक्टर फैब यूनिट वर्ष 2028 तक पूरी तरह चालू होने की उम्मीद है।
इस्लामिक दुनिया में पीएम मोदी का कूटनीतिक प्रभाव: किन देशों ने दिए हैं सर्वोच्च सम्मान?
पीयूष गोयल का यह बयान उस मजबूत कूटनीतिक पृष्ठभूमि पर आधारित है, जहां पिछले एक दशक में भारत ने पश्चिम एशिया और खाड़ी के इस्लामिक देशों के साथ अपने संबंधों को एक ऐतिहासिक ऊंचाई पर पहुंचाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संयुक्त अरब अमीरात (UAE) द्वारा 'ऑर्डर ऑफ जायद', सऊदी अरब द्वारा 'किंग अब्दुलअजीज सैश', बहरीन द्वारा 'किंग हमाद ऑर्डर ऑफ द रेनेसां', फिलिस्तीन द्वारा 'ग्रैंड कॉलर ऑफ द स्टेट ऑफ फिलिस्तीन', अफगानिस्तान द्वारा 'स्टेट ऑर्डर ऑफ गाजी अमीर अमानुल्लाह खान', मिस्र (Egypt) द्वारा 'ऑर्डर ऑफ द नाइल' और कुवैत व ओमान जैसे देशों द्वारा उनके सर्वोच्च राष्ट्रीय सम्मानों से नवाजा जा चुका है।
वैश्विक मंचों पर किसी गैर-मुस्लिम देश के नेता को इतने सारे प्रमुख इस्लामिक मुल्कों द्वारा अपने सर्वोच्च नागरिक पुरस्कारों से सम्मानित किया जाना भारत की निष्पक्ष, संतुलित और मजबूत विदेश नीति की वैश्विक स्वीकार्यता का जीवंत प्रमाण माना जाता है।
भारत-जापान रणनीतिक साझेदारी का नया आर्थिक अध्याय
टोक्यो में पीयूष गोयल के इस संबोधन ने स्पष्ट कर दिया है कि भारत अब केवल एक विशाल उपभोक्ता बाजार नहीं, बल्कि उच्च-तकनीक और विश्वसनीय मैन्युफैक्चरिंग का वैश्विक केंद्र बनने की ओर अग्रसर है। जापानी निवेशकों के लिए बीआईएस नियमों का सरलीकरण, सेमीकंडक्टर क्षेत्र में अरबों डॉलर के प्रोत्साहन और डेटा सेंटर्स के निर्माण में सहयोग भारत-जापान साझेदारी को नई मजबूती देगा। केंद्रीय मंत्री का यह बयान यह भी साबित करता है कि भारत अपने मजबूत आंतरिक सौहार्द और वैश्विक कूटनीति के दम पर 'विकसित भारत 2047' के राष्ट्रीय लक्ष्य की ओर दृढ़ता से कदम बढ़ा रहा है।