'फ्रॉडियों का झुंड है कॉकरोच जनता पार्टी...', बेस्ट CM पर अभिजीत दीपके के बयान पर भड़के पूर्व BJP प्रवक्ता शहजाद पूनावाला; बोले- 'जनता ने जिन्हें नकारा, CJP को वही पसंद

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देश में युवाओं, प्रतियोगी परीक्षाओं और बेरोजगारी के मुद्दों पर Gen Z आंदोलन का नेतृत्व करने वाली 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के पूर्व राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला के बीच तीखा वाकयुद्ध छिड़ गया है। हाल ही में एक राष्ट्रीय समाचार चैनल के कार्यक्रम में सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने जब तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन, केरल के पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को देश के सबसे बेहतरीन मुख्यमंत्रियों की श्रेणी में रखा, तो इस पर पूनावाला ने आगबबूला होते हुए पूरी सीजेपी टीम को 'फ्रॉडियों का झुंड' करार दे दिया। हाल ही में भाजपा के सभी पदों से इस्तीफा देने वाले पूनावाला ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (पूर्व में ट्विटर) पर एक वीडियो संदेश जारी करते हुए सीजेपी की राजनीतिक निष्पक्षता और जमीनी समझ पर कड़े सवाल खड़े किए हैं।

'CJP को वही पसंद जिन्हें जनता ने नकारा': पार्टी से 'जनता' शब्द हटाने की मांग

शहजाद पूनावाला ने अपने वीडियो में सीधा तंज कसते हुए कहा कि कॉकरोच जनता पार्टी को देश के केवल वही नेता और मुख्यमंत्री पसंद आते हैं जिन्हें संबंधित राज्यों की जनता ने चुनाव में बुरी तरह नकार कर सत्ता से बेदखल कर दिया है।

पूनावाला ने वीडियो में कहा, "क्या आपने सीजेपी से बड़ा फ्रॉडियों का झुंड कभी देखा है? इनके हिसाब से केजरीवाल, विजयन और स्टालिन भारत के सबसे अच्छे मुख्यमंत्री थे। अगर ये तीनों इतने ही महान मुख्यमंत्री थे, तो फिर इनके राज्यों की जनता ने इन्हें चुनावों में क्यों हरा दिया? सीजेपी को जनता द्वारा खारिज किए गए नेता ही पसंद हैं। इसलिए इस पार्टी के नाम में 'जनता' शब्द होना ही नहीं चाहिए। इसका नाम बदलकर सिर्फ 'कॉकरोच पार्टी' कर देना चाहिए, क्योंकि असली जनता ने तो इन नेताओं के खिलाफ कुछ और ही फैसला सुनाया था।" पूनावाला ने सीजेपी के अन्य प्रमुख चेहरों पर भी हमला करते हुए कहा कि इनकी टीम का एक सदस्य लातूर में बेनकाब हुआ, दूसरा राजस्थान से भगाया गया और तीसरे के कारनामे पूरी दिल्ली देख चुकी है।

स्टालिन के कर्ज से लेकर विजयन के कोविड मॉडल तक: पूनावाला ने गिनाए आंकड़े

अपनी बात को आंकड़ों के जरिए सही साबित करने के लिए पूनावाला ने तीनों पूर्व मुख्यमंत्रियों के शासनकाल के आर्थिक और प्रशासनिक रिकॉर्ड्स पर विस्तार से प्रहार किया:

एम. के. स्टालिन (तमिलनाडु): पूनावाला ने दावा किया कि स्टालिन के कार्यकाल में तमिलनाडु का सार्वजनिक कर्ज 2021 के 4.86 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 5 वर्षों में 9.52 लाख करोड़ रुपये के खतरनाक स्तर पर पहुंच गया। उन्होंने आरोप लगाया कि स्टालिन ने राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के बजाय केवल अपने परिवार के व्यावसायिक और राजनीतिक हितों को आगे बढ़ाने का काम किया।

पिनाराई विजयन (केरल): केरल के बहुचर्चित हेल्थकेयर मॉडल पर सवाल उठाते हुए पूनावाला ने कोविड-19 महामारी के दौरान हुई मौतों की तुलना उत्तर प्रदेश से की। उन्होंने कहा कि केरल की आबादी बहुत कम होने के बावजूद कोरोना की दूसरी लहर में वहां 71,000 से अधिक मौतें दर्ज हुईं, जबकि यूपी जैसी विशाल आबादी वाले राज्य में यह आंकड़ा करीब 23,700 रहा।

अरविंद केजरीवाल (दिल्ली): दिल्ली के शिक्षा मॉडल पर कटाक्ष करते हुए पूनावाला ने कहा कि आम आदमी पार्टी की सरकार ने 500 नए स्कूल खोलने का वादा किया था, लेकिन हकीकत में 'पाठशाला के बदले 800 नई मधुशालाएं (शराब की दुकानें)' खोल दी गईं। उन्होंने दिल्ली शराब नीति घोटाले और पूर्व मंत्रियों की जेल यात्रा का जिक्र करते हुए इसे सबसे बड़ा प्रशासनिक फर्जीवाड़ा बताया।

आखिर अभिजीत दीपके ने इंटरव्यू में क्या कहा था?

विवाद की जड़ में अभिजीत दीपके का वह बयान है, जिसमें उन्होंने एक टीवी डिबेट के दौरान देश के सर्वश्रेष्ठ मुख्यमंत्रियों के संबंध में अपनी निजी राय जाहिर की थी। जब एंकर ने उनसे पूछा कि भारत का बेस्ट सीएम कौन है, तो दीपके ने कहा था कि किसी एक व्यक्ति को चुनने के बजाय उन सभी नेताओं के काम को देखना चाहिए जिन्होंने धरातल पर कुछ ठोस परिणाम दिए हैं।

दीपके ने कहा था, "एम. के. स्टालिन ने तमिलनाडु की अर्थव्यवस्था और औद्योगिक विकास के लिए बहुत अच्छा काम किया। पिनाराई विजयन ने केरल के प्राथमिक स्वास्थ्य तंत्र को काफी मजबूत बनाया। वहीं अरविंद केजरीवाल जी ने दिल्ली में सरकारी स्कूलों के बुनियादी ढांचे और शिक्षा के स्तर को सुधारने में सराहनीय कार्य किया। जो सरकार अच्छा काम करती है, हमें खुले दिल से उसकी तारीफ करनी चाहिए।" इसके साथ ही दीपके ने जनरेशन-जेड (Gen Z) के सबसे लोकप्रिय नेता के तौर पर अभिनेता से राजनेता बने थलपति विजय (TVK प्रमुख) का नाम लिया था।

तीनों ही राज्यों में बदल चुकी है सत्ता: चुनावी नतीजों का सियासी संदर्भ

पूनावाला के इस कड़े हमले के पीछे हाल ही में संपन्न हुए विधानसभा चुनावों के नतीजे भी एक बड़ा आधार बने हैं, जहां इन तीनों ही राज्यों में विपक्षी सरकारों का तख्तापलट हो चुका है:

तमिलनाडु: तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में एमके स्टालिन की पार्टी डीएमके (DMK) को करारी हार का सामना करना पड़ा था। वहां तमिल सिनेमा के सुपरस्टार सी. जोसेफ विजय की नई पार्टी 'तमिलगा वेट्री कझगम' (TVK) ने सत्ता हासिल की और खुद स्टालिन अपनी पारंपरिक विधानसभा सीट तक नहीं बचा सके थे।

केरल: केरल में पिनाराई विजयन के नेतृत्व वाली एलडीएफ (LDF) सरकार को हराकर कांग्रेस पार्टी 10 वर्षों के अंतराल के बाद सत्ता में लौटी और वी. डी. सतीशन नए मुख्यमंत्री बने।

दिल्ली: दिल्ली विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी को हराकर भारतीय जनता पार्टी ने 27 साल बाद ऐतिहासिक जीत दर्ज की और रेखा गुप्ता दिल्ली की नई मुख्यमंत्री बनीं।

5 सितंबर के महा-मार्च से पहले बढ़ा राजनीतिक तनाव

कॉकरोच जनता पार्टी और अभिजीत दीपके वर्तमान में आगामी 5 सितंबर (शिक्षक दिवस) को दिल्ली में आयोजित होने वाले विशाल शांतिपूर्ण मार्च की तैयारियों में जुटे हुए हैं। सीजेपी ने देश भर के राज्यों के शिक्षा मंत्रियों को पत्र लिखकर सरकारी स्कूलों की बदहाली, शिक्षकों के रिक्त पदों और बुनियादी सुविधाओं पर श्वेत पत्र जारी करने की मांग की है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि छात्र आंदोलन से निकली सीजेपी द्वारा विपक्षी मुख्यमंत्रियों के नीतियों की सराहना करने और दूसरी तरफ भाजपा से अलग हुए शहजाद पूनावाला द्वारा आक्रामक पलटवार करने से यह साफ हो गया है कि युवाओं के बीच उभरते इस नए राजनीतिक विकल्प को लेकर मुख्यधारा के राजनीतिक खेमों में खासी बेचैनी है। पूनावाला का यह हमला सीजेपी की निष्पक्षता पर सवाल उठाने की एक सोची-समझी रणनीति माना जा रहा है, जिसका असर आने वाले दिनों में दोनों पक्षों के बीच और तीखी डिजिटल वॉर के रूप में देखने को मिल सकता है।