क्या पूर्व राज्यपाल और कैबिनेट मंत्री की अवैध संपत्तियों पर भी चलेगा बुलडोजर? सुप्रीम कोर्ट की सख्त हिदायत...
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में नियमों की अनदेखी कर बनाए गए अवैध निर्माणों और आवासीय परिसरों में धड़ल्ले से चल रही व्यावसायिक गतिविधियों को लेकर देश की शीर्ष अदालत (Supreme Court) का चाबुक चला है। लखनऊ के अलीगंज में हुए भीषण अग्निकांड को अत्यंत गंभीरता से लेते हुए सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस आर. महादेवन की पीठ ने अवैध इमारतों के खिलाफ 'युद्ध स्तर' पर कार्रवाई करने के सख्त निर्देश दिए हैं।
अदालत की इस तल्ख टिप्पणी और कड़े रुख के बाद लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) में हड़कंप मच गया है। एलडीए ने आनन-फानन में शहर के ऐसे 51 प्रमुख अवैध भवनों की सूची तैयार कर ली है, जिन पर सीलिंग या ध्वस्तीकरण (बुलडोजर कार्रवाई) की गाज गिर सकती है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस सूची में आम नागरिकों की संपत्तियों के साथ-साथ कई हाई-प्रोफाइल और वीवीआईपी (VVIP) लोगों से जुड़े भवन भी शामिल हैं।
वीवीआईपी संपत्तियां जांच के घेरे में: पूर्व राज्यपाल से लेकर राज्य मंत्री के भवन शामिल
लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) द्वारा तैयार की गई 51 अवैध संपत्तियों की विस्तृत सूची से राजधानी के राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में खलबली मच गई है। सूत्रों के मुताबिक, जांच और कार्रवाई के दायरे में आईं इन संपत्तियों में:
पूर्व राज्यपाल: एक पूर्व राज्यपाल से जुड़े 3 भवन अवैध निर्माण की श्रेणी में चिह्नित किए गए हैं।
पूर्व कैबिनेट मंत्री: राज्य के एक पूर्व कैबिनेट मंत्री से संबंधित 3 भवनों पर भी नियमों के उल्लंघन का आरोप है।
वर्तमान राज्य मंत्री व विधायक: उत्तर प्रदेश सरकार के एक वर्तमान राज्य मंत्री और विधायक से जुड़ी संपत्तियां भी इस सूची में शामिल हैं।
कारोबारी व अधिवक्ता: शहर के कई बड़े उद्योगपतियों, व्यवसायियों और वरिष्ठ अधिवक्ताओं के व्यावसायिक व आवासीय भवन भी रडार पर हैं।
एलडीए ने प्रत्येक भवन की मंजिलों की संख्या, निर्माण का समय, उस दौरान तैनात रहे संबंधित अधिकारियों का ब्योरा, पूर्व में की गई कार्रवाई और कार्रवाई न होने के पीछे के कारणों का पूरा रिकॉर्ड तैयार कर लिया है ताकि सुप्रीम कोर्ट के समक्ष हर तथ्य पेश किया जा सके।
अगस्त में ही लखनऊ पहुंचेंगे न्याय मित्र, सितंबर मध्य में होगी अगली सुनवाई
मामले की गंभीरता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त 'न्याय मित्र' (Amicus Curiae) इसी महीने (अगस्त 2026) लखनऊ का दौरा करेंगे। वे एलडीए द्वारा चिह्नित सभी 51 अवैध और खतरनाक इमारतों का मौके पर जाकर स्थलीय निरीक्षण करेंगे और अपनी एक स्वतंत्र रिपोर्ट तैयार कर सीधे शीर्ष अदालत को सौंपेंगे।
इसके साथ ही, सुप्रीम कोर्ट ने अलीगंज अग्निकांड की जांच कर रही विशेष जांच दल (SIT) की रिपोर्ट भी तलब की है। एसआईटी अपनी रिपोर्ट में उन लापरवाह अधिकारियों और इंजीनियरों के नाम भी शामिल करेगी, जिनकी मिलीभगत या लापरवाही से ये अवैध निर्माण वर्षों तक बिना किसी रुकावट के फलते-फूलते रहे। मामले की अगली सुनवाई सितंबर 2026 के मध्य में प्रस्तावित है, जिससे ठीक पहले न्याय मित्र और एसआईटी दोनों की रिपोर्ट अदालत के पटल पर रखी जाएगी।
एलडीए उपाध्यक्ष का हलफनामा: दिल्ली की तर्ज पर शुरू हुआ सर्वे
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान एलडीए के उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने पीठ को आश्वस्त किया कि चिह्नित 51 संपत्तियों के खिलाफ विधिक कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है और इसे बिना किसी देरी के तार्किक परिणति तक पहुंचाया जाएगा। एलडीए ने अदालत में हलफनामा दाखिल कर बताया है कि पूरे विकास प्राधिकरण क्षेत्र में फॉलोअप और सर्वे का काम तीन सप्ताह के भीतर युद्धस्तर पर पूरा कर लिया जाएगा।
अदालत ने दिल्ली और पटना में हुए अवैध निर्माणों के सर्वे का उदाहरण देते हुए एलडीए को भी पूरे लखनऊ शहर में रिहायशी इलाकों में अवैध रूप से चल रहे कोचिंग सेंटर, हॉस्टल, अस्पताल और व्यावसायिक कॉम्प्लेक्सों का व्यापक सर्वे कराने का निर्देश दिया है।