BREAKING:
August 13 2026 07:59 pm

खतरे में जेलेंस्की का शक्ति-संतुलन? रूस के सबसे बड़े मददगार सर्बिया पहुंचे यूक्रेनी राष्ट्रपति

Post

रूस के साथ जारी चार साल से भी लंबे खूनी संघर्ष और पश्चिमी सहयोगियों से मिलती सैन्य मदद में आ रही सुस्ती के बीच यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की एक अभूतपूर्व कूटनीतिक संकट में घिरे नजर आ रहे हैं। एक तरफ जहां राजधानी कीव पर रूसी बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोनों की भीषण बारिश हो रही है, वहीं दूसरी तरफ यूक्रेन के पास तोपों के गोलों और पैट्रियट एयर डिफेंस मिसाइलों का भंडार खतरनाक स्तर तक खाली हो रहा है। ऐसे मुश्किल हालात में अपनी सत्ता और देश की संप्रभुता को बचाने के लिए जेलेंस्की ने एक ऐसा दांव खेला है जिसने पूरी दुनिया के कूटनीतिक गलियारों को चौंका दिया है। जेलेंस्की हाल ही में अचानक सर्बिया की राजधानी बेलग्रेड पहुंचे। यह वही सर्बिया है जिसके राष्ट्रपति अलेक्जेंडर वुसिक (Aleksandar Vučić) को रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का यूरोप में सबसे भरोसेमंद और करीबी दोस्त माना जाता है। आठ सालों में किसी यूक्रेनी राष्ट्रपति का यह पहला सर्बिया दौरा था, जिसने पश्चिमी देशों और नाटो सहयोगियों के बीच नए सवालों को जन्म दे दिया है।

सर्बिया की इस यात्रा के पीछे केवल कूटनीतिक शिष्टाचार नहीं था, बल्कि इसके पीछे यूक्रेन की सबसे बड़ी सैन्य मजबूरी छिपी हुई थी। अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स और थिंक टैंकों के अनुसार, यूक्रेनी सेना इस समय मोर्चे पर सबसे ज्यादा सोवियत-मानक (Soviet-standard) के तोपखानों और गोला-बारूद की कमी से जूझ रही है। पश्चिमी देश और अमेरिका अब यूक्रेन को वह सोवियत कालीन बारूद मुहैया कराने में असमर्थ हैं जिसकी जरूरत उनके भारी हथियारों को चलाने के लिए होती है। वहीं दूसरी ओर, यूरोप में सर्बिया ही एकमात्र ऐसा देश है जहाँ सोवियत शैली के तोप के गोलों और भारी गोला-बारूद का विशाल निर्माण ढांचा मौजूद है। यही कारण है कि जेलेंस्की को मॉस्को के पारंपरिक मित्र देश बेलग्रेड के दरवाजे पर दस्तक देने के लिए मजबूर होना पड़ा, ताकि वे अप्रत्यक्ष रूप से यूरोपीय मध्यस्थों के जरिए सर्बियाई बारूद की आपूर्ति को निर्बाध रूप से जारी रख सकें।

कोसोवो पर बयान से मचा भारी बवाल: बारूद की खातिर जेलेंस्की ने लिया ऐतिहासिक यू-टर्न

बेलग्रेड में सर्बियाई राष्ट्रपति अलेक्जेंडर वुसिक के साथ संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में जब पत्रकारों ने जेलेंस्की से संवेदनशील मुद्दों पर सवाल पूछे, तो जेलेंस्की ने सर्बिया को खुश करने के लिए एक बड़ा राजनीतिक दांव चल दिया। जेलेंस्की ने सार्वजनिक रूप से स्पष्ट किया कि यूक्रेन, कोसोवो की एकतरफा स्वतंत्रता को मान्यता नहीं देता है और वह सर्बिया की क्षेत्रीय अखंडता का पूरी तरह से सम्मान करता है। जेलेंस्की के इस रुख के बाद बाल्कन प्रायद्वीप में नया भूराजनीतिक बवाल मच गया। जेलेंस्की के इस बयान के तुरंत बाद कोसोवो की राजधानी प्रिस्टिना में सरकारी इमारत पर लगा यूक्रेन का विशाल झंडा विरोध स्वरूप उतार दिया गया। जानकारों का कहना है कि जेलेंस्की को अच्छी तरह मालूम था कि कोसोवो पर सर्बिया का समर्थन करने से पश्चिमी मानवाधिकार समूह और यूरोपीय सहयोगी असहज होंगे, लेकिन मोर्चे पर अपने सैनिकों के लिए सर्बियाई तोप के गोले हासिल करने के लिए जेलेंस्की के पास इस अप्रिय समझौते के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं बचा था।

दूसरी तरफ, सर्बिया के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर वुसिक ने भी इस स्थिति का पूरा राजनीतिक फायदा उठाया। एक तरफ जहां वुसिक ने रूस पर यूरोपीय संघ द्वारा लगाए गए कड़े आर्थिक प्रतिबंधों में शामिल होने से साफ इनकार कर दिया और रूसी गैस पर अपनी निर्भरता बनाए रखी, वहीं दूसरी तरफ यूक्रेन को 'मित्र राष्ट्र' बताकर पश्चिमी देशों को यह संदेश भी दिया कि सर्बिया पूरी तरह से रूस के पाले में नहीं है। फाइनेन्शियल टाइम्स और अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, युद्ध शुरू होने के बाद से सर्बियाई रक्षा कंपनियों से लगभग 800 मिलियन यूरो से अधिक का गोला-बारूद अन्य यूरोपीय देशों के रास्ते यूक्रेन के मोर्चे तक पहुँचा है। हालांकि सर्बिया आधिकारिक तौर पर किसी भी सैन्य सहायता से इनकार करता है, लेकिन जेलेंस्की के साथ बेलग्रेड में हुई इस गुप्त और महत्वपूर्ण मुलाकात ने यह साबित कर दिया है कि बंद कमरों के भीतर बारूद और सुरक्षा सौदों का नया खेल खेला जा रहा है।

अपनी यात्रा के दौरान जेलेंस्की ने यह भी दर्द बयां किया कि अमेरिका द्वारा यूक्रेन के भीतर पैट्रियट मिसाइल इंटरसेप्टर बनाने के लाइसेंस को मंजूरी तो मिल गई है, लेकिन वाशिंगटन की लालफीताशाही और कागजी कार्रवाई के कारण इसमें भारी देरी हो रही है। इस देरी की वजह से कीव का हवाई सुरक्षा तंत्र चरमरा रहा है और रूसी मिसाइलें आसानी से यूक्रेनी ठिकानों को तबाह कर रही हैं। सर्बिया जैसे 'तटस्थ लेकिन पुतिन-समर्थक' देश के साथ जेलेंस्की की यह नजदीकी इस बात का स्पष्ट संकेत है कि पश्चिमी देशों के बदलते रुख और अमेरिका के अनिश्चित समर्थन के कारण यूक्रेनी राष्ट्रपति के सामने अपने अस्तित्व को बचाए रखने का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। अब देखना यह होगा कि रूस के सबसे करीबी सहयोगी के साथ जेलेंस्की का यह नया कूटनीतिक गठजोड़ युद्ध के मैदान में पासा पलट पाता है या नहीं।