Meta Deletes 7.56 Lakh Accounts: फेसबुक और इंस्टाग्राम पर मेटा का सबसे बड़ा चाबुक! एक झटके में बंद कर दिए 7.56 लाख अकाउंट्स
दुनिया के सबसे बड़े सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स फेसबुक (Facebook) और इंस्टाग्राम (Instagram) की पैरेंट कंपनी मेटा (Meta) ने एक ऐसा प्रशासनिक व तकनीकी ऐक्शन लिया है जिसने दुनिया भर के सोशल मीडिया यूजर्स और टेक जगत को चौंका दिया है। मेटा ने आधिकारिक रूप से पुष्टि की है कि उसने एक बड़े सफाई अभियान के तहत फेसबुक और इंस्टाग्राम से 7,56,000 (साढ़े सात लाख से अधिक) अकाउंट्स को डीएक्टिवेट और पूरी तरह से हटा (Delete) दिया है। इस बड़ी कार्रवाई में इंस्टाग्राम के 4,62,000 संदिग्ध अकाउंट्स और फेसबुक के 2,94,000 अकाउंट्स शामिल हैं। अचानक चलाए गए इस चाबुक के बाद यह सवाल हर तरफ गूंज रहा है कि आखिर बिना किसी पूर्व चेतावनी के इतने बड़े पैमाने पर यूजर्स के अकाउंट्स क्यों बंद किए गए?
इस ताबड़तोड़ कार्रवाई के पीछे मुख्य वजह ऑस्ट्रेलिया सरकार द्वारा बच्चों और किशोरों की सुरक्षा को लेकर लागू किया गया दुनिया का सबसे सख्त कानून है। ऑस्ट्रेलिया ने दिसंबर 2025 में 16 साल से कम उम्र के बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर पूरी तरह से कानूनी प्रतिबंध लगा दिया था। इस ऐतिहासिक कानून के तहत सोशल मीडिया कंपनियों को सख्त हिदायत दी गई थी कि वे अपने प्लेटफॉर्म्स से 16 साल से कम उम्र के ऑस्ट्रेलियाई बच्चों के प्रोफाइल हटाएं। ऑस्ट्रेलिया के इंटरनेट सुरक्षा नियामक (eSafety Commissioner) द्वारा जांच और भारी जुर्माने की चेतावनी दिए जाने के बाद मेटा ने यह बड़े पैमाने पर कार्रवाई की है, ताकि कानून के अनुपालन में कोई कमी न रहे।
AI तकनीक से खोजकर बंद किए जा रहे अंडर-16 अकाउंट्स: जानिए कैसे काम कर रहा है सिस्टम
बच्चों की सुरक्षा को लेकर बनी वैश्विक चिंताओं के बीच मेटा ने स्पष्ट किया है कि इतने बड़े पैमाने पर फर्जी या कम उम्र के बच्चों के खातों की पहचान करना केवल मानवीय समीक्षा से संभव नहीं था। इसके लिए मेटा ने एडवांस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मशीन लर्निंग टूल्स का सहारा लिया है। कंपनी का एआई सिस्टम यूजर्स द्वारा प्रोफ़ाइल में दर्ज की गई फर्जी जन्मतिथि पर निर्भर रहने के बजाय उनके ऑनलाइन व्यवहार और कंटेंट का विश्लेषण करता है।
मेटा का एआई एल्गोरिदम यूजर की बायो, पोस्ट्स, कैप्शन्स, कमेंट्स और प्रोफाइल पर मिलने वाले बधाई संदेशों (जैसे जन्मदिन की शुभकामनाएं या स्कूल ग्रेड से जुड़ी बातें) से 'कॉन्टेक्स्टुअल क्लू' (संकेत) जुटाता है। यदि एआई को लगता है कि अकाउंट चलाने वाला व्यक्ति 16 साल से कम उम्र का ऑस्ट्रेलियाई निवासी है, तो उस अकाउंट को तुरंत सस्पेंड कर दिया जाता है। इसके अलावा, मेटा ने माता-पिता और कम्युनिटी मेंबर्स के लिए संदिग्ध अंडर-एज अकाउंट्स की रिपोर्ट करना काफी आसान बना दिया है। एक बार जब कोई अकाउंट सस्पेंड या डिलीट हो जाता है, तो एआई यह भी सुनिश्चित करता है कि वह यूजर उसी डिवाइस या डिटेल से दोबारा नया अकाउंट न बना सके।
ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने इस कानून का उल्लंघन करने वाली टेक कंपनियों पर 99 मिलियन ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (लगभग 70 मिलियन अमेरिकी डॉलर) तक का भारी-भरकम जुर्माना लगाने का प्रावधान रखा है। इसी नियामक दबाव के चलते मेटा, टिकटोकर, स्नैपचैट और गूगल (यूट्यूब) जैसी कंपनियों को अपने प्लेटफॉर्म्स पर उम्र सत्यापन (Age Verification) के नए तरीके लागू करने पड़े हैं।
हालांकि, सरकारी अध्ययनों और स्वतंत्र रिपोर्टों से यह भी पता चला है कि बैन लागू होने के शुरुआती महीनों में कई किशोरों ने फर्जी उम्र दर्ज करके या वीपीएन (VPN) के जरिए पाबंदियों को बायपास करने की कोशिश की है। इसी को देखते हुए मेटा ने चेतावनी दी है कि उसका यह ऐक्शन अभी खत्म नहीं हुआ है और आने वाले दिनों में डिलीट किए जाने वाले अकाउंट्स की यह संख्या और तेजी से बढ़ेगी।
ऑस्ट्रेलिया की इस पहल को अब दुनिया के कई अन्य देश भी एक मॉडल के रूप में देख रहे हैं। ब्रिटेन, यूरोप के कई राष्ट्र और अमेरिकी राज्य भी बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य (Mental Health) पर सोशल मीडिया के पड़ रहे दुष्प्रभावों को देखते हुए ऐसे ही कड़े उम्र-प्रतिबंध कानून लागू करने पर विचार कर रहे हैं। मेटा के इस कदम से स्पष्ट संदेश गया है कि आने वाले समय में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर फर्जी उम्र बताकर आईडी बनाना और उसे चलाना लगभग नामुमकिन होने वाला है।