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August 13 2026 05:52 pm

उत्तर प्रदेश में प्राइवेट डेवलपर्स को 45 साल की लीज पर मिलेगी जमीन, बिजनेस पार्क बनाने के लिए योगी सरकार देगी 100% स्टांप ड्यूटी छूट और सिंगल विंडो क्लीयरेंस

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उत्तर प्रदेश को 1 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के संकल्प को पूरा करने की दिशा में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली राज्य सरकार ने एक बड़ा और नीतिगत फैसला लिया है। प्रदेश में औद्योगिक विकास को गति देने, निजी निवेश को आकर्षित करने और वैश्विक कॉर्पोरेट कंपनियों को उत्तर प्रदेश में आमंत्रित करने के लिए राज्य सरकार ने 'बिजनेस पार्क नीति' जारी की है। इस नई नीति के तहत निजी डेवलपर्स को उत्तर प्रदेश में आधुनिक बिजनेस पार्क स्थापित करने के लिए राज्य सरकार 45 साल के लंबे पट्टे (लीज) पर जमीन उपलब्ध कराएगी।

निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाने के उद्देश्य से बनाई गई इस योजना में लीज की अवधि खत्म होने के बाद इसे अतिरिक्त 45 वर्षों के लिए बढ़ाने का भी स्पष्ट प्रावधान किया गया है, यानी कुल मिलाकर निवेशक 90 वर्षों तक निश्चिंत होकर अपना काम कर सकेंगे। देश के अन्य प्रमुख औद्योगिक राज्यों जैसे महाराष्ट्र, तमिलनाडु, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में आमतौर पर लीज की अवधि 30 से 35 वर्ष ही होती है। ऐसे में उत्तर प्रदेश द्वारा दी जा रही 45 साल की दीर्घकालिक लीज व्यवस्था राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के लिए एक बड़ा आकर्षण साबित होने जा रही है।

कौन विकसित कर सकेगा बिजनेस पार्क? जानें पात्रता और वित्तीय मानक

योगी सरकार की इस नई नीति के तहत हर कोई डेवलपर आवेदन नहीं कर पाएगा। राज्य में अंतरराष्ट्रीय स्तर के इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने डेवलपर्स के चयन हेतु बेहद कड़े और पारदर्शी मानक तय किए हैं।

बिजनेस पार्क नीति के मुख्य पात्रता मानदंड इस प्रकार हैं:

योग्य संस्थाएं: इस योजना के तहत बिजनेस कंसोर्टियम (औद्योगिक समूह), रियल एस्टेट निवेश ट्रस्ट (REITs) और शेयर बाजार में सूचीबद्ध (Listed) कंपनियां ही बिजनेस पार्क विकसित करने के लिए पात्र होंगी।

वित्तीय क्षमता: आवेदन करने वाली कंपनी या कंसोर्टियम की न्यूनतम नेटवर्थ 1,000 करोड़ रुपये होना अनिवार्य है। इसके अलावा, पिछले तीन वित्तीय वर्षों में कंपनी का औसतन वार्षिक टर्नओवर कम से कम 500 करोड़ रुपये होना आवश्यक है।

व्यावसायिक अनुभव: डेवलपर्स के पास रियल एस्टेट विकास, कमर्शियल इंफ्रास्ट्रक्चर या औद्योगिक पार्क निर्माण के क्षेत्र में कम से कम 7 वर्षों का सफल अनुभव होना चाहिए।

सरकार का मानना है कि इन सख्त वित्तीय और अनुभव संबंधी शर्तों से केवल वही कंपनियां मैदान में आएंगी जिनके पास बड़े प्रोजेक्ट्स को समय पर पूरा करने का ट्रैक रिकॉर्ड और पर्याप्त संसाधन उपलब्ध हैं।

10 एकड़ से 30 एकड़ तक का क्षेत्रफल: जमीन के इस्तेमाल के तय हुए कड़े नियम

बिजनेस पार्क नीति के अंतर्गत डेवलपर्स को कम से कम 10 एकड़ भूमि के भूखंड पर पार्क विकसित करना होगा। आवश्यकता और निवेश के आधार पर इस क्षेत्रफल को 20 एकड़ से 30 एकड़ तक विस्तारित किया जा सकेगा। 10 एकड़ के मानक बिजनेस पार्क को मंजूरी मिलने के 3 वर्षों के भीतर बनाकर तैयार करना अनिवार्य होगा।

बिजनेस पार्क के भीतर जमीन के उपयोग को लेकर भी सरकार ने स्पष्ट विभाजन किया है ताकि इसका मुख्य उद्देश्य भटके नहीं:

आईटी और नॉलेज सेक्टर (न्यूनतम 50% हिस्सा): पार्क के कुल क्षेत्रफल का कम से कम 50 प्रतिशत हिस्सा केवल सूचना प्रौद्योगिकी (IT), आईटीईएस (ITeS), ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC) और ज्ञान-आधारित सेवा (Knowledge Based Services) इकाइयों के लिए आरक्षित रखना होगा।

सुविधा क्षेत्र (अधिकतम 10% हिस्सा): कर्मचारियों, आगंतुकों और अधिकारियों की सुविधाओं के लिए अधिकतम 10 प्रतिशत हिस्से में फूड कोर्ट, रिटेल आउटलेट, रेस्टोरेंट और जरूरी सेवाएं विकसित की जा सकेंगी।

कौशल विकास व प्रशिक्षण केंद्र: पार्क के शेष हिस्से में केवल दफ्तर ही नहीं बनेंगे, बल्कि वहां आधुनिक ट्रेनिंग सेंटर और स्किल डेवलपमेंट सेंटर स्थापित किए जाएंगे। इससे कंपनियों की आवश्यकता के अनुरूप स्थानीय युवाओं को प्रशिक्षित कर सीधे रोजगार से जोड़ा जा सकेगा।

100% स्टांप ड्यूटी छूट और सिंगल विंडो क्लीयरेंस

राज्य सरकार निजी डेवलपर्स को बिजनेस पार्क स्थापित करने के लिए केवल जमीन ही नहीं देगी, बल्कि वित्तीय प्रोत्साहन और प्रशासनिक सहूलियतें भी प्रदान करेगी।

प्रदेश के औद्योगिक विकास प्राधिकरणों (जैसे नोएडा, ग्रेटर नोएडा, यीडा, गीडा, बीडा आदि) के पास मौजूद फ्रीहोल्ड जमीनों में से उपयुक्त भूखंडों का चयन किया जाएगा और नीलामी (Auction) प्रक्रिया के पारदर्शी माध्यम से निजी डेवलपर्स को जमीन आवंटित की जाएगी।

प्रोजेक्ट को तेज गति से धरातल पर उतारने के लिए दी जाने वाली मुख्य सहूलियतें:

100% स्टांप ड्यूटी छूट: बिजनेस पार्क विकसित करने वाली डेवलपर कंपनी को भूमि के पंजीकरण (रजिस्ट्रेशन) पर देय स्टांप शुल्क में 100 प्रतिशत की पूर्ण छूट प्रदान की जाएगी।

सिंगल विंडो सिस्टम: निवेशकों को अलग-अलग सरकारी दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़ें, इसके लिए 'सिंगल क्लीयरेंस विंडो' के जरिए ही भवन उपविधि (Building By-laws) के अनुसार लेआउट, डिजाइन, पर्यावरण क्लीयरेंस, अग्निशमन और अन्य सभी जरूरी एनओसी (NOC) व परमिट एक ही जगह से जारी किए जाएंगे।

राजस्व मॉडल: नीति के तहत न्यूनतम अग्रिम भूमि प्रीमियम 5 प्रतिशत और राजस्व हिस्सेदारी 7 प्रतिशत तय की गई है।

युवाओं के लिए खुलेंगे रोजगार के नए द्वार: उत्तर प्रदेश का बदलेगा औद्योगिक परिदृश्य

अब तक दक्षिण और पश्चिम भारत के राज्यों (जैसे बेंगलुरु, हैदराबाद, चेन्नई और मुंबई) को ही बड़े आईटी और बिजनेस पार्कों का केंद्र माना जाता था। लेकिन योगी सरकार की इस दूरदर्शी 'बिजनेस पार्क नीति' से उत्तर प्रदेश के लखनऊ, नोएडा, ग्रेटर नोएडा, वाराणसी, प्रयागराज और गोरखपुर जैसे प्रमुख शहरों में वैश्विक स्तर के बिजनेस हब तैयार होंगे।

इन बिजनेस पार्कों के बनने से न केवल देश-विदेश की दिग्गज मल्टीनेशनल कंपनियां (MNCs) उत्तर प्रदेश का रुख करेंगी, बल्कि स्थानीय स्तर पर लाखों कुशल और अकुशल युवाओं को उनके ही राज्य में उच्च वेतन वाली नौकरियां प्राप्त होंगी। आईटी, एआई, डेटा एनालिटिक्स और मैनेजमेंट के क्षेत्र में पढ़ाई करने वाले युवाओं को अब दूसरे राज्यों में पलायन नहीं करना पड़ेगा। सरकार का यह कदम उत्तर प्रदेश को भारत का अगला बड़ा कॉर्पोरेट और आईटी हब बनाने में मील का पत्थर साबित होने जा रहा है।