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August 20 2026 09:53 pm

UP Floods: प्रयागराज में बेलन, टोंस और गंगा के उफान से बिगड़े हालात; 60 गांवों का टूटा संपर्क, 80 हजार की आबादी प्रभावित, NDRF तैनात

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उत्तर प्रदेश में मानसूनी बारिश के विकराल रूप धारण करने के साथ ही संगम नगरी प्रयागराज में बाढ़ का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। जिले के यमुनापार इलाके में बेलन और टोंस (तमसा) नदी के जलस्तर में अप्रत्याशित वृद्धि होने से स्थिति तेजी से बिगड़ गई है। बेलन नदी के रौद्र रूप ने टोंस की प्राकृतिक जलधारा को रोक दिया है, जिसके परिणामस्वरूप जलजमाव और बैकफ्लो की एक जटिल जलप्रलय जैसी स्थिति उत्पन्न हो गई है। इस प्राकृतिक आपदा के चलते कोरांव तहसील के लगभग 60 गांवों का संपर्क मुख्य जिला मुख्यालय और आसपास के कस्बों से पूरी तरह टूट चुका है। करीब 80 हजार की आबादी सीधे तौर पर इस बाढ़ और जलभराव से प्रभावित हुई है। खतरे की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन ने तत्काल प्रभाव से राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) और राज्य आपदा मोचन बल (SDRF) की टीमों को राहत सामग्री के साथ ग्राउंड जीरो पर उतार दिया है।

संगम नगरी में नदियों का चक्रव्यूह: बेलन के दबाव से टोंस और गंगा में बैकफ्लो का खतरा

सिंचाई विभाग और केंद्रीय जल आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, जलग्रहण क्षेत्रों और पड़ोसी पहाड़ी व मैदानी इलाकों में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश का पानी बेलन नदी में तेजी से समा रहा है। जलस्तर में अचानक हुई कई मीटर की बढ़ोतरी के कारण बेलन नदी ने टोंस नदी के मुहाने पर भारी दबाव बना दिया है।

प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, टोंस नदी के जलस्तर में लगभग 2 मीटर की जबर्दस्त बढ़ोतरी दर्ज की गई है। बेलन के बैकप्रेशर के कारण टोंस का पानी आगे की ओर गंगा में नहीं मिल पा रहा है, जिसके चलते टोंस का जल भी पीछे लौटने लगा है। इस दोहरी रुकावट का सीधा असर अब पतित पावनी गंगा नदी के बहाव पर भी पड़ने लगा है और गंगा में भी बैकफ्लो की स्थिति पैदा होने लगी है। अधिकारियों का अनुमान है कि गंगा का जलस्तर 83 से 84 मीटर तक पहुंच सकता है, जिससे संगम तटीय और निचले मैदानी इलाकों में बाढ़ का पानी फैलने की प्रबल आशंका पैदा हो गई है।

कोरांव तहसील में सबसे ज्यादा तबाही: रपटों और पुलियों पर 5 फीट तक बह रहा पानी

बाढ़ का सबसे घातक प्रभाव यमुनापार क्षेत्र की कोरांव तहसील में देखने को मिल रहा है। बेलन नदी के उफान पर आने से ग्रामीण अंचलों को जोड़ने वाले सभी प्रमुख संपर्क मार्गों, रपटों और छोटी पुलियों के ऊपर से चार से पांच फीट तक तेज धार वाला पानी बह रहा है। सड़कों के जलमग्न होने से गांवों में आवागमन पूरी तरह ठप हो गया है।

अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) विनीता सिंह ने जमीनी स्थिति का जायजा लेते हुए बताया कि कोरांव में एक बहुत बड़ा जनसमूह इस प्राकृतिक आपदा की चपेट में आया है। कई गांवों में पानी रिहायशी बस्तियों और खेतों में घुस चुका है, जिससे हजारों एकड़ में लगी खरीफ की फसलें जलमग्न हो गई हैं। कई जगह पशुओं के चारे और पेयजल की किल्लत उत्पन्न हो गई है, जिसके समाधान के लिए राजस्व और स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त टीमें गांव-गांव नावों के जरिए पहुंच रही हैं।

80 हजार ग्रामीण संकट में: एनडीआरएफ ने संभाला मोर्चा, राहत शिविरों में ठहराए गए लोग

कोरांव और आसपास के क्षेत्रों में 80 हजार से अधिक ग्रामीणों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एनडीआरएफ की मोटरबोट्स और रेस्क्यू टीमों को तैनात कर दिया गया है। अब तक गंभीर रूप से घिरे 485 से अधिक लोगों को सुरक्षित निकालकर स्थानीय पंचायत भवनों और प्राथमिक विद्यालयों में बनाए गए अस्थाई राहत शिविरों में स्थानांतरित कर दिया गया है।

इन राहत शिविरों में प्रशासन द्वारा भोजन के पैकेट, शुद्ध पेयजल, तिरपाल, ओआरएस के पैकेट और आवश्यक दवाओं का वितरण किया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में संक्रामक रोगों और जलजनित बीमारियों से बचाव के लिए मेडिकल कैंप सक्रिय कर दिए हैं। क्लोरीन की गोलियां और सर्पदंश के इंजेक्शन भी पर्याप्त मात्रा में सीएचसी और पीएचसी स्तर पर उपलब्ध करा दिए गए हैं।

शहरी इलाकों में भी अलर्ट: बघाड़ा और सलोरी के निचले कछारी हिस्सों में गंगा का खतरा

बाढ़ का असर सिर्फ ग्रामीण इलाकों तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रयागराज शहर के कछारी इलाकों पर भी इसका भारी संकट मंडरा रहा है। गंगा और यमुना दोनों ही नदियों का जलस्तर संगम, दारागंज, फाफामऊ और छतनाग घाटों पर प्रति घंटे बढ़ रहा है। दोपहर बाद गंगा का रुख छोटा बघाड़ा, बड़ा बघाड़ा, सलोरी, राजापुर और नेवादा जैसे निचले रिहायशी इलाकों की तरफ होने की पूरी संभावना है।

बाढ़ के खतरे को देखते हुए प्रशासन ने शहरवासियों के लिए शरणार्थी शिविरों की व्यवस्था में अहम बदलाव किए हैं। एडीएम विनीता सिंह ने स्पष्ट किया कि हर साल छोटा बघाड़ा के नागरिकों के लिए एनी बेसेंट स्कूल में राहत शिविर बनता था, लेकिन इस बार वहां की भौगोलिक स्थिति और सुरक्षा मानकों को देखते हुए 'होली ट्रिनिटी स्कूल' को मुख्य राहत शिविर बनाया गया है। कछारी बस्तियों में रहने वाले छात्रों और किरायेदारों से अपील की गई है कि पानी बढ़ते ही वे तत्काल सुरक्षित स्थानों या बनाए गए शेल्टर होम में शिफ्ट हो जाएं।

शहर में मूसलाधार बारिश से दोहरी मार: रेलवे ट्रैक डूबे, सभी स्कूलों में घोषित हुआ अवकाश

नदियों के उफान के साथ-साथ शहर में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने नगर निगम की जल निकासी व्यवस्था की पोल खोल दी है। प्रयागराज रामबाग रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म और रेलवे ट्रैक पर पानी भर जाने से ट्रेनों का परिचालन प्रभावित हुआ और कई मेमू व पैसेंजर ट्रेनों को झूंसी स्टेशन से संचालित करना पड़ा। सीएमपी चौराहा, बाई का बाग, बंगाली टोला, सीवाई चिंतामणि रोड और दारागंज रिवर फ्रंट की सड़कें तालाब में तब्दील हो गईं।

जलभराव और छात्रों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) ने आदेश जारी कर जिले के सभी परिषदीय, माध्यमिक, सीबीएसई और आईसीएसई बोर्ड से संबद्ध प्री-प्राइमरी से लेकर कक्षा 12वीं तक के सभी स्कूलों में 'रेनी-डे' अवकाश घोषित कर दिया है।

प्रशासन की 24x7 निगरानी: डीएम मनीष कुमार वर्मा ने दिए कड़े निर्देश

जिले में बाढ़ की विकट होती परिस्थिति पर नजर रखने के लिए जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा ने कलेक्ट्रेट सभागार में सभी संबंधित विभागों के उच्चाधिकारियों के साथ आपात बैठक की। डीएम ने कहा कि भारी वर्षा के कारण बाढ़ की स्थिति से इनकार नहीं किया जा सकता, लेकिन प्रशासन की तैयारियां चाक-चौबंद हैं।

जिलाधिकारी ने स्पष्ट निर्देश दिए कि जिले के सभी 100 से अधिक चिन्हित बाढ़ राहत शिविरों को 24 घंटे एक्टिव मोड पर रखा जाए। कंट्रोल रूम में तैनात कर्मचारी 24 घंटे जलस्तर की रीडिंग दर्ज करें। साथ ही, गोताखोरों, नावों और राहत सामग्री की आपूर्ति में किसी भी प्रकार की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के लिए अलग-अलग नोडल अधिकारी नियुक्त किए गए हैं जो सीधे जनता से समन्वय बनाकर राहत पहुंचा रहे हैं।

अगले 48 घंटे प्रयागराज के लिए बेहद संवेदनशील

मौसम विभाग (IMD) ने प्रयागराज और आसपास के 10 से अधिक जिलों में अगले 48 घंटों के लिए भारी से बहुत भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। पहाड़ी राज्यों और मध्य प्रदेश के जलग्रहण क्षेत्रों से पानी छोड़े जाने के कारण बेलन, टोंस, गंगा और यमुना का दबाव अगले दो दिनों तक चरम पर रह सकता है। प्रशासन ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे नदियों के कछारी किनारों और उफनते नालों के पास जाने से बचें, किसी भी आपात स्थिति में जिला आपदा प्रबंधन कंट्रोल रूम के टोल-फ्री नंबरों पर संपर्क करें और अफवाहों पर ध्यान न देकर केवल आधिकारिक दिशा-निर्देशों का पालन करें।