'बिल्कुल गलत बात है, ऐसे टीम नहीं बनती', रवींद्र जडेजा और मानव सुथार की तुलना पर भड़के पूर्व क्रिकेटर, लगाई फटकार
भारतीय घरेलू क्रिकेट और 'इंडिया ए' स्तर पर बाएं हाथ के युवा स्पिन ऑलराउंडर मानव सुथार के हालिया शानदार प्रदर्शन के बाद क्रिकेट जगत में उन्हें रवींद्र जडेजा का स्वाभाविक उत्तराधिकारी मानकर तुलनाएं शुरू हो गई हैं। हालांकि, इस तरह की शुरुआती तुलना और मीडिया में चल रही चर्चाओं पर एक पूर्व भारतीय क्रिकेटर ने सख्त आपत्ति जताते हुए इसे पूरी तरह अनुचित करार दिया है।
पूर्व दिग्गज का मानना है कि किसी युवा खिलाड़ी के कुछ अच्छे मैचों के आधार पर उसे सीधे जडेजा जैसे दिग्गज ऑलराउंडर के विकल्प के रूप में पेश करना न केवल टीम के माहौल को नुकसान पहुंचाता है, बल्कि युवा खिलाड़ी के करियर पर भी गैरजरूरी दबाव बनाता है।
'ऐसे टीम नहीं बनती': जल्दबाजी में उत्तराधिकारी खोजने की सोच पर उठाए सवाल
पूर्व क्रिकेटर ने अपनी बेबाक राय रखते हुए कहा कि एक या दो घरेलू सत्रों या 'इंडिया ए' के मुकाबलों में अच्छा करने का मतलब यह कतई नहीं है कि आप सीधे एक स्थापित अंतरराष्ट्रीय मैच विनर की जगह ले सकते हैं। उन्होंने नाराजगी जताते हुए स्पष्ट कहा, "यह बिल्कुल गलत बात है, इस तरह जल्दबाजी में नाम उछालने से कभी कोई मजबूत टीम नहीं बनती।"
उनके अनुसार, रवींद्र जडेजा ने पिछले एक दशक से अधिक समय में दुनिया भर की हर तरह की पिचों पर गेंद, बल्ले और शानदार फील्डिंग से खुद को साबित किया है। उनके पास 300 से अधिक टेस्ट विकेट, हजारों रन और दबाव के पलों में मैच जिताने का लंबा अनुभव है। ऐसे में किसी 21-22 साल के युवा खिलाड़ी को सीधे उस पायदान पर बैठाना क्रिकेट की बुनियादी समझ के खिलाफ है।
मानव सुथार की प्रतिभा बेमिसाल, लेकिन विकास के लिए चाहिए पर्याप्त समय
पूर्व क्रिकेटर ने यह भी साफ किया कि उनका मकसद मानव सुथार की काबिलियत पर सवाल उठाना नहीं है। राजस्थान के इस युवा स्पिनर ने दलीप ट्रॉफी और घरेलू टूर्नामेंट्स में बेहतरीन गेंदबाजी कर अपनी छाप छोड़ी है। उनके पास गेंद को घुमाने, सटीक लाइन-लेंथ पकड़ने और निचले क्रम में उपयोगी रन बनाने का हुनर है।
लेकिन विशेषज्ञ का तर्क है कि सुथार को पहले रणजी ट्रॉफी, भारत ए के दौरों और कठिन परिस्थितियों में लगातार 2-3 साल तक खेलने देना चाहिए। जब तक कोई गेंदबाज विभिन्न पिचों और दबाव भरी परिस्थितियों में सैकड़ों ओवर फेंककर खुद को तराशता नहीं है, तब तक उसे जडेजा जैसे दिग्गज के बराबर खड़ा करना उसके खेल को फायदे की जगह नुकसान अधिक पहुंचा सकता है।
अतीत के उदाहरणों से सबक लेने की दी सलाह
क्रिकेट इतिहास का हवाला देते हुए उन्होंने याद दिलाया कि भारतीय क्रिकेट में अक्सर नए खिलाड़ियों को बहुत जल्दी 'अगला कपिल देव' या 'अगला जहीर खान' घोषित कर दिया जाता रहा है। इस भारी उम्मीद के बोझ तले कई होनहार खिलाड़ियों का स्वाभाविक खेल बिगड़ गया और वे वक्त से पहले ही अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य से ओझल हो गए।
टीम मैनेजमेंट और चयनकर्ताओं को चाहिए कि वे बैकअप विकल्प जरूर तैयार रखें, लेकिन सार्वजनिक मंचों पर इस तरह की सीधी तुलनाओं से परहेज करें। खिलाड़ियों को उनके अपने नाम और अपनी शैली के साथ विकसित होने की आजादी मिलनी चाहिए, न कि किसी सीनियर खिलाड़ी की कार्बन कॉपी बनने का दबाव उन पर थोपा जाए।
भारतीय टेस्ट टीम में ऑलराउंडर स्लॉट का भविष्य
भारतीय टेस्ट टीम में रवींद्र जडेजा और अक्षर पटेल जैसे अनुभवी ऑलराउंडर्स का दबदबा अब भी बरकरार है। स्पिन गेंदबाजी ऑलराउंडर का रोल टीम के संतुलन के लिए रीढ़ की हड्डी माना जाता है।
सुथार जैसे उभरते सितारों को एक मजबूत पाइपलाइन का हिस्सा बनाकर धीरे-धीरे तैयार किया जाना चाहिए। पूर्व दिग्गज का यह कड़ा रुख भारतीय क्रिकेट के चयन तंत्र और मीडिया के लिए एक चेतावनी है कि वे युवा प्रतिभाओं को समय दें और रातों-रात सुपरस्टार बनाने के बजाय उनके निरंतर विकास पर ध्यान केंद्रित करें।