ईरान-अमेरिका डील की फिर जगी उम्मीद! ईरानी विदेश मंत्री की पोस्ट शेयर कर डोनाल्ड ट्रंप ने दिया बड़ा संकेत
वॉशिंगटन/तेहरान: पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में जारी भारी सैन्य तनाव और कूटनीतिक गतिरोध के बीच एक बड़ी और सकारात्मक खबर सामने आ रही है। अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध की स्थिति को समाप्त करने के लिए चल रही शांति वार्ता अब अपने अंतिम चरण में पहुंचती दिखाई दे रही है। इस बात को बल तब मिला जब ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची के एक सोशल मीडिया पोस्ट के स्क्रीनशॉट को खुद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर शेयर कर दिया। ट्रंप का यह कदम इस बात का सीधा संकेत माना जा रहा है कि दोनों देशों के बीच पर्दे के पीछे चल रही बातचीत अब सही दिशा में आगे बढ़ रही है।
इस्लामाबाद में तैयार हो रहा शांति का ब्लूप्रिंट, अफवाहों से बचने की सलाह
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने सोशल मीडिया पर इस बात का खुलासा किया कि दोनों महाशक्तियों के बीच शुरुआती युद्ध विराम समझौता, जिसे 'इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन' नाम दिया गया है, वह अब तक के सबसे करीब यानी फाइनल स्टेज में पहुंच रहा है। दरअसल, दोनों देशों के बीच यह बेहद गोपनीय बातचीत पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में मध्यस्थों के जरिए आयोजित की जा रही है।
ईरानी विदेश मंत्री ने अपने आधिकारिक बयान में कहा:
"इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन अब अंतिम रूप लेने के बेहद करीब है। इस नाजुक मोड़ पर अंतरराष्ट्रीय मीडिया और राजनीतिक विश्लेषकों को इसके संभावित मसौदे (ड्राफ्ट) पर किसी भी तरह की मनगढ़ंत अटकलें लगाने से बचना चाहिए। जैसे ही यह कूटनीतिक प्रक्रिया पूरी होगी, ईरान सरकार पूरी पारदर्शिता और जिम्मेदारी के साथ समझौते की एक-एक शर्त को जनता और दुनिया के सामने सार्वजनिक करेगी।"
पहले 14 सूत्रीय मसौदे पर भड़के थे ट्रंप, फिर बदला रुख
ईरानी विदेश मंत्री का यह सकारात्मक बयान उस समय आया, जब महज कुछ ही घंटों पहले दोनों देशों के बीच भारी जुबानी जंग देखने को मिली थी। दरअसल, ईरानी मीडिया ने एक कथित 14 सूत्रीय ड्राफ्ट प्रकाशित कर दिया था, जिसमें दावा किया गया था कि ईरान किसी भी कीमत पर यूरेनियम संवर्धन (Uranium Enrichment) का अपना अधिकार नहीं छोड़ेगा और सामरिक रूप से बेहद अहम 'स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज' पर उसका नियंत्रण बरकरार रहेगा।
इस रिपोर्ट के सामने आते ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भड़क गए थे। उन्होंने ईरानी मीडिया के दावों को पूरी तरह खारिज करते हुए उन्हें 'बेईमान' और 'झूठा' करार दिया था। ट्रंप ने साफ कहा था कि जो बातें मीडिया में लीक की जा रही हैं, उनका वास्तविक लिखित शर्तों से कोई वास्ता नहीं है। लेकिन, इस तीखी प्रतिक्रिया के तुरंत बाद ईरानी विदेश मंत्री द्वारा मीडिया को संयम बरतने की सलाह देने वाली पोस्ट को ट्रंप द्वारा खुद शेयर करना यह दिखाता है कि दोनों नेता इस डील को जिंदा रखना चाहते हैं।
ग्लोबल इकोनॉमी और मिडिल ईस्ट की स्थिरता के लिए क्यों जरूरी है यह डील?
अंतरराष्ट्रीय मामलों के विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच होने वाला यह संभावित शांति समझौता पूरी दुनिया के लिए गेमचेंजर साबित हो सकता है। साल 2026 के फरवरी महीने में शुरू हुए इस सैन्य टकराव ने वैश्विक ऊर्जा बाजारों (क्रूड ऑयल), अंतरराष्ट्रीय शेयर बाजारों और समुद्री व्यापार मार्गों को अरबों डॉलर का नुकसान पहुंचाया है।
अगर यह इस्लामाबाद समझौता पूरी तरह लागू हो जाता है, तो इसके दूरगामी परिणाम होंगे:
ईरान पर लगे कड़े वैश्विक तेल प्रतिबंधों में बड़ी ढील मिल सकती है।
विभिन्न देशों के बैंकों में फ्रीज (जमी हुई) ईरान की अरबों डॉलर की संपत्ति वापस तेहरान को मिल सकेगी।
लाल सागर और होर्मुज स्ट्रेट जैसे व्यापारिक समुद्री रास्तों पर कमर्शियल जहाजों पर होने वाले हमले रुकेंगे।
फिलहाल दोनों देशों की कोर डिप्लोमैटिक टीमें अंतिम दस्तावेजों पर कानूनी मोहर लगाने में जुटी हैं और पूरी दुनिया की सांसें इस ऐतिहासिक शांति समझौते पर टिकी हुई हैं।