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August 14 2026 01:01 pm

'परिवार उजड़ गए, अपनों को खो दिया...': विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर पीएम मोदी ने शेयर किया इमोशनल पोस्ट

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प्रत्येक वर्ष 14 अगस्त का दिन देश के इतिहास में एक काले और दर्दनाक अध्याय के रूप में दर्ज है। इस दिन को भारत सरकार द्वारा 'विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस' के रूप में मनाया जाता है। साल 1947 में भारत और पाकिस्तान के बीच हुए बंटवारे के उस दर्द, विस्थापन और अपनों को खोने के गम को आज पूरा देश याद कर रहा है। इस अवसर पर देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया के माध्यम से एक बेहद भावुक संदेश साझा करते हुए उन सभी लोगों और परिवारों को नमन किया है, जिन्होंने इस वीभत्स दौर का सामना किया था।

इतिहास का वह दौर जिसने जिंदगियां तहस-नहस कर दीं

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर अपने आधिकारिक अकाउंट से साझा किए गए संदेश में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लिखा कि आज हम 'विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस' मना रहे हैं। उन्होंने उन सभी लोगों के अदम्य साहस को याद किया जो उस भीषण विभाजन से सीधे तौर पर प्रभावित हुए थे। पीएम मोदी ने कहा कि वह इतिहास का एक ऐसा दौर था जिसने अनगिनत जिंदगियों को तहस-नहस कर दिया, हंसते-खेलते परिवार पूरी तरह उजड़ गए, लोगों ने अपने प्रियजनों को खो दिया और अकल्पनीय शारीरिक व मानसिक पीड़ा सही।

शून्य से जिंदगी शुरू करने वाले नागरिकों के संघर्ष को किया सलाम

कठिन परिस्थितियों का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने देशवासियों के संघर्ष और जज्बे की सराहना की। उन्होंने कहा कि उस ऐतिहासिक त्रासदी की तमाम मुश्किलों से उबरते हुए देश के नागरिकों ने शून्य से अपनी जिंदगी की दोबारा शुरुआत की। लोगों ने अपनी हर चुनौती को कामयाबी में बदला और स्वतंत्र भारत की प्रगति में अपना अभूतपूर्व योगदान दिया। पीएम मोदी के अनुसार, इन सभी प्रभावित लोगों की जीवन-यात्राएं हमें इंसानी जब्जे और दृढ़ संकल्प की असली ताकत की याद दिलाती हैं।

आपसी सद्भाव और 'विकसित भारत' के संकल्प पर जोर

अपने संदेश के अंत में प्रधानमंत्री ने देश में शांति, भाईचारे और एकता को बनाए रखने की पुरजोर अपील की। उन्होंने प्रार्थना की कि यह दिन हम सभी के दिलों में आपसी सद्भाव और भाईचारे के संकल्प को और अधिक मजबूत करे। साथ ही, उन्होंने देशवासियों से एकजुट होकर वर्ष 2047 तक 'विकसित भारत' के निर्माण की दिशा में मिलकर आगे बढ़ने का आह्वान किया।

संस्कृत सुभाषितम् के जरिए कर्मठता का दिया संदेश

एक अन्य सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से पीएम मोदी ने देशवासियों को पुरुषार्थ और परिश्रम का महत्व समझाया। उन्होंने इस अवसर पर एक 'संस्कृत सुभाषितम्' साझा किया, जिसके जरिए उन्होंने बताया कि परिश्रम, उद्यम और पुरुषार्थ से ही विभिन्न कलाएं, विज्ञान, तकनीकी कौशल और नवाचार विकसित होते हैं। पीएम मोदी ने संदेश दिया कि मनुष्य को कभी भी सिर्फ भाग्य के भरोसे नहीं बैठना चाहिए, बल्कि साहस, कर्मठता और निरंतर प्रयासों के बल पर अपने लक्ष्यों को प्राप्त करना चाहिए क्योंकि सच्चा पुरुषार्थ ही मनुष्य के भाग्य का असली निर्माता होता है।