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August 19 2026 07:56 pm

जौहर यूनिवर्सिटी और आजम खां के 10 ठिकानों पर ED की बड़ी स्ट्राइक: रामपुर से दिल्ली तक ताबड़तोड़ छापेमारी

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उत्तर प्रदेश की सियासत में एक बार फिर उस समय भारी भूचाल आ गया, जब प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कई टीमों ने जेल में बंद समाजवादी पार्टी के कद्दावर नेता व पूर्व कैबिनेट मंत्री आजम खां के करीबियों और उनसे जुड़े संस्थानों पर एक साथ धावा बोल दिया। केंद्रीय जांच एजेंसी की लखनऊ जोनल टीम ने रामपुर, सहारनपुर और देश की राजधानी दिल्ली में स्थित करीब 10 प्रमुख परिसरों में मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (PMLA), 2002 की धारा 17 के तहत सघन तलाशी अभियान शुरू किया। इस व्यापक कार्रवाई का मुख्य केंद्र आजम खां का ड्रीम प्रोजेक्ट मानी जाने वाली 'मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी' और 'मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट' से जुड़े वित्तीय लेन-देन हैं। सुबह-सवेरे अर्धसैनिक बलों की कड़ी सुरक्षा के बीच शुरू हुई इस छापेमारी से रामपुर से लेकर लखनऊ और दिल्ली तक के सियासी गलियारों में जबर्दस्त खलबली मच गई है।

रामपुर से दिल्ली और सहारनपुर तक 10 ठिकानों पर एक साथ छापा

प्रवर्तन निदेशालय की टीमों ने पूरी योजना के तहत एक ही समय पर सभी चिन्हित ठिकानों पर दस्तक दी, ताकि किसी भी प्रकार के साक्ष्य नष्ट न किए जा सकें। रामपुर में मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट और विश्वविद्यालय परिसर के प्रशासनिक भवनों में अधिकारियों ने सघन पड़ताल की। इसके साथ ही रामपुर के सिविल लाइंस स्थित मैसर्स ए एंड एस इंटरप्राइजेज, सीके एसोसिएट्स प्राइवेट लिमिटेड, उसके निदेशक पवन कुमार जैन के आवास और सहयोगी शाहीन खान के ठिकानों पर भी टीमें पहुंचीं।

कार्रवाई का दायरा केवल रामपुर तक ही सीमित नहीं रहा। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले में चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) दीपक गुप्ता के अंबाला रोड स्थित सिल्वा मार्केट कार्यालय और दिल्ली रोड स्थित ग्रीन पार्क कॉलोनी आवास पर भी ईडी की टीमों ने डेरा डाला। उधर, राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के जसोला, जामिया नगर स्थित जौहर एसोसिएट्स के पार्टनर सैयद खालिक (खालिद) के आवास पर भी अधिकारियों ने छापेमारी की। हर ठिकाने पर स्थानीय पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बलों को तैनात कर बाहरी लोगों की आवाजाही पूरी तरह रोक दी गई।

सरकारी फंड के डायवर्जन और भारी डोनेशन का खेल: क्या है पूरा मामला?

ईडी की इस ताजा कार्रवाई की जड़ में सरकारी ठेकों और वित्तीय अनुदानों के बड़े पैमाने पर हुए कथित दुरुपयोग की जांच है। जांच एजेंसी के आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, शुरुआती जांच में कुछ निजी ठेकेदारों और जौहर ट्रस्ट के बीच सीधे संदिग्ध वित्तीय लेन-देन का पता चला है।

आरोप है कि पूर्ववर्ती सपा शासनकाल के दौरान जिन निजी ठेकेदारों को बड़े-बड़े सरकारी निर्माण और विकास कार्यों के कॉन्ट्रैक्ट दिए गए थे, उन्होंने उस सरकारी धनराशि का एक बड़ा हिस्सा भारी डोनेशन (दान) और निर्माण भुगतान के बहाने मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट और यूनिवर्सिटी की संपत्तियों के निर्माण में डाइवर्ट कर दिया। जांच एजेंसी यह खंगाल रही है कि क्या सरकारी परियोजनाओं का पैसा ठेकेदारों के जरिए घुमाकर निजी ट्रस्ट के विस्तार में झोंका गया और इसके पीछे कौन-सा वित्तीय सिंडिकेट सक्रिय था।

2019 से दर्ज 26 एफआईआर और जमीन कब्जे के पुराने आरोप

जौहर ट्रस्ट और विश्वविद्यालय से जुड़े विवादों का इतिहास काफी पुराना है। साल 2019 में उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा दर्ज की गई कम से कम 26 एफआईआर का संज्ञान लेते हुए ईडी ने आजम खां के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज किया था। उन प्राथमिकियों में किसानों और स्थानीय निवासियों ने आरोप लगाया था कि विश्वविद्यालय की स्थापना और विस्तार के लिए उनकी जमीनों पर जबरन कब्जा किया गया था या अनुचित दबाव बनाकर जमीनों की रजिस्ट्री कराई गई थी।

इसके बाद जांच का दायरा ट्रस्ट को मिलने वाले विदेशी चंदे, कॉरपोरेट फंडिंग और निर्माण व्यय तक बढ़ गया। साल 2020 और 2021 में कई दानदाताओं और ट्रस्टियों से पूछताछ की गई थी। बाद में 2023 में आयकर विभाग ने भी कर चोरी के आरोपों में आजम खां के 30 से ज्यादा ठिकानों पर तीन दिनों तक लंबी तलाशी ली थी। जुलाई 2026 में रामपुर विकास प्राधिकरण (RDA) द्वारा यूनिवर्सिटी की कई अनधिकृत इमारतों को नोटिस दिए जाने के बाद से यह परिसर लगातार प्रशासनिक और कानूनी रडार पर बना हुआ है।

अलमारियां खंगालीं, हार्ड डिस्क और बही-खाते जब्त: कई दस्तावेज कब्जे में

छापेमारी के दौरान ईडी के अधिकारियों ने ट्रस्ट के कार्यालयों, सीए के दफ्तर और कंपनियों के परिसरों से वित्तीय बही-खाते, बैंक स्टेटमेंट, ऑडिट रिपोर्ट, जमीनों के दस्तावेज और दानदाताओं की सूचियों को बारीकी से परखा। सूत्रों के अनुसार, कई कंप्यूटरों की हार्ड डिस्क, लैपटॉप, मोबाइल फोन और डिजिटल बैकअप का क्लोन बनाकर जांच के लिए जब्त किया गया है।

सहारनपुर में सीए दीपक गुप्ता के ठिकानों से जौहर ट्रस्ट की बैलेंस शीट और ऑडिट से जुड़े अहम कागजात मिले हैं। इसके साथ ही निर्माण कार्यों से जुड़ी कंपनियों के बैंक खातों और कैश फ्लो की डीटेल निकाली जा रही है ताकि यह साबित किया जा सके कि सरकारी खजाने से निकला पैसा किस-किस रास्ते से होते हुए विश्वविद्यालय के खातों तक पहुंचा।

छापेमारी पर गरमाई यूपी की राजनीति: अखिलेश यादव ने बोला तीखा हमला

इस व्यापक छापेमारी के बाद उत्तर प्रदेश का सियासी तापमान अचानक चढ़ गया है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भाजपा सरकार पर केंद्रीय एजेंसियों के दुरुपयोग का खुला आरोप लगाते हुए सोशल मीडिया पर एक लंबी पोस्ट साझा की। अखिलेश यादव ने कहा कि जो लोग शिक्षा, शिक्षक और शिक्षार्थियों के विरोधी हैं और स्कूल बंद करवाते हैं, वे यूनिवर्सिटी बनाने वालों के खिलाफ बदले की भावना से ईडी की छापेमारी करवा रहे हैं।

सपा प्रमुख ने सरकार को घेरते हुए कई ढांचागत परियोजनाओं और घोटालों की सूची जारी की और सवाल उठाया कि असली भ्रष्टाचारियों पर कार्रवाई क्यों नहीं होती। वहीं कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने भी इस कार्रवाई की आलोचना करते हुए कहा कि जेल में बंद बीमार नेता को लगातार प्रताड़ित करने का काम किया जा रहा है।

जेल में बंद आजम खां की कानूनी मुश्किलें और आगे की राह

वर्तमान में आजम खां विभिन्न आपराधिक और फर्जी प्रमाण पत्र मामलों में सजायाफ्ता होकर जेल में बंद हैं। पूर्व में उनकी पत्नी तजीन फातिमा और बेटे अब्दुल्ला आजम भी कानूनी प्रक्रियाओं का सामना कर चुके हैं। अब केंद्रीय जांच एजेंसी ईडी द्वारा मनी लॉन्ड्रिंग के इस गंभीर मामले में सीधे तौर पर मनी ट्रेल (पैसों के आने-जाने का रास्ता) स्थापित करने की कोशिश आजम परिवार की कानूनी मुश्किलों को और गहरा कर सकती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि जब्त किए गए दस्तावेजों और डिजिटल साक्ष्यों के फॉरेंसिक विश्लेषण के बाद ईडी जल्द ही ट्रस्ट के अन्य पदाधिकारियों, संबंधित ठेकेदारों और सीए को लखनऊ स्थित जोनल कार्यालय में समन भेजकर आमने-सामने पूछताछ के लिए तलब कर सकती है। आने वाले दिनों में इस जांच के नतीजे उत्तर प्रदेश की राजनीति और जौहर यूनिवर्सिटी के भविष्य पर गहरा असर डालने वाले साबित होंगे।