यूजीसी की सख्ती के बीच गोरखपुर विश्वविद्यालय की परीक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल, नौ दिन की देरी ने बढ़ाई चिंता
India News Live,Digital Desk : यूजीसी द्वारा समय पर परीक्षा कराने और सत्र को नियमित रखने के कड़े निर्देशों के बाद अब दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय की परीक्षा व्यवस्था भी सवालों के घेरे में आ गई है। दैनिक जागरण की पड़ताल में यह पाया गया कि पिछले वर्षों की तुलना में परीक्षा व्यवस्था में सुधार तो हुआ है, लेकिन देरी की समस्या अब भी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है।
शैक्षणिक कैलेंडर के अनुसार विषम सेमेस्टर की परीक्षाएं 11 नवंबर से शुरू होनी थीं, लेकिन विश्वविद्यालय प्रशासन इन्हें 20 नवंबर से ही शुरू करा सका। यानी परीक्षा की शुरुआत नौ दिनों की देरी से हुई। इसी तरह इंटरनल मार्क्स अपलोड करने की प्रक्रिया भी अभी पूरी नहीं हो सकी है।
सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक यह भी है कि प्रथम सेमेस्टर के परीक्षा फॉर्म अभी तक पूरी तरह भरे ही नहीं जा सके हैं। ऐसे में यह प्रश्न उठना स्वाभाविक है कि जब फॉर्म ही पूर्ण नहीं हुए, तो निर्धारित तिथि से पहले परीक्षा आयोजित कैसे हो पाएगी?
विश्वविद्यालय प्रशासन इस देरी का कारण संबद्ध कॉलेजों में लंबी चली प्रवेश प्रक्रिया और समर्थ पोर्टल पर अनिवार्य पंजीकरण को बता रहा है। हालांकि प्रशासन इसे "मामूली देरी" कहकर दावा कर रहा है कि परीक्षाएं 10 दिसंबर तक पूरी कर ली जाएंगी और समय पर परिणाम भी घोषित होंगे।
यूजीसी की हालिया चेतावनी के बाद यह मामला और भी गंभीर हो गया है। आयोग ने देशभर के उच्च शिक्षण संस्थानों को चेतावनी देते हुए कहा कि समय पर परीक्षा और परिणाम न होने से विद्यार्थियों के भविष्य पर सीधा असर पड़ता है।
यूजीसी ने बताया कि देश के 1100 से अधिक विश्वविद्यालय समय पर परीक्षा नहीं करा पा रहे हैं, जिनमें 30 केंद्रीय विश्वविद्यालय भी शामिल हैं।
आने वाले दो सप्ताह अब यह तय करेंगे कि विश्वविद्यालय प्रशासन अपने दावों पर कितना खरा उतरता है और परीक्षा व्यवस्था वास्तव में कितनी व्यवस्थित है।
इस बीच कुलपति प्रो. पूनम टंडन का कहना है कि परीक्षा व्यवस्था पटरी पर लौट चुकी है और तय समय पर परीक्षाएं कराई जाएंगी। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों का हित सर्वोपरि है और इसी को ध्यान में रखते हुए पूरी सतर्कता बरती जा रही है।