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August 05 2026 06:17 pm

विधानसभा सत्र को हंगामे की भेंट चढ़ाना जनता से धोखा: सीएम योगी का सपा पर तीखा हमला, कहा- किसान, युवा और महिलाओं के अधिकारों पर डाका डाल रहा विपक्ष

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उत्तर प्रदेश की राजनीति में विधान भवन के भीतर का माहौल इन दिनों अपने चरम तापमान पर है। हाल ही में संपन्न हुआ उत्तर प्रदेश विधानसभा का मानसून सत्र अपने निर्धारित समय से एक दिन पहले ही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया। सदन के भीतर लगातार देखने को मिले भारी हंगामे, नारेबाजी और गतिरोध के बाद यह कदम उठाना पड़ा। सत्र के इस प्रकार अचानक समय से पहले समापन पर राज्य की सियासत में भूचाल आ गया है। इस पूरे घटनाक्रम के बाद उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विपक्षी दल समाजवादी पार्टी (सपा) पर अब तक का सबसे तीखा और आक्रामक हमला बोला है। सीएम योगी ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि सदन जैसी पवित्र विधायी संस्था को सुनियोजित तरीके से हंगामे के हवाले करना प्रदेश के किसानों, युवाओं और महिलाओं के साथ सीधा-सीधा अन्याय है।

सदन में हंगामे पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का कड़ा रुख

सत्र के समापन के बाद मीडिया और सदन के माध्यम से अपनी बात रखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समाजवादी पार्टी के आचरण को बेहद गैर-जिम्मेदाराना और लोकतंत्र विरोधी करार दिया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सदन चर्चा, संवाद और जनता की समस्याओं के समाधान का सबसे बड़ा मंच होता है, लेकिन विपक्ष ने इस गरिमामयी मंच को केवल अपनी राजनीतिक रोटियां सेकने और व्यवधान पैदा करने का अखाड़ा बना दिया। सीएम योगी ने कहा कि जनता ने जनप्रतिनिधियों को सदन में इसलिए चुनकर भेजा है ताकि वे अपने क्षेत्र की जनता के विकास, बुनियादी सुविधाओं और कल्याणकारी योजनाओं पर सार्थक बहस कर सकें, लेकिन इसके विपरीत समाजवादी पार्टी के विधायकों ने हर बार की तरह इस बार भी सदन की कार्यवाही को ठप करने का नापाक प्रयास किया।

किसान, युवा और महिलाओं के विकास पर सीधा आघात

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में इस बात पर विशेष जोर दिया कि जब सदन में प्रदेश के अन्नदाता किसानों, ऊर्जावान युवाओं और मातृशक्ति (महिलाओं) के उत्थान से जुड़े अत्यंत महत्वपूर्ण विधेयकों और योजनाओं पर चर्चा होनी थी, तब विपक्ष ने जानबूझकर बाधाएं उत्पन्न कीं। सरकार इस सत्र के दौरान प्रदेश के विकास को नई रफ्तार देने, गरीबों के कल्याण के लिए अत्याधुनिक योजनाएं शुरू करने और विभिन्न पेंशन योजनाओं तथा युवाओं के रोजगार व कौशल विकास के लिए 59,000 करोड़ रुपये से अधिक का भारी-भरकम अनुपूरक बजट लेकर आई थी। मुख्यमंत्री ने कड़े शब्दों में सवाल उठाया कि जब इन योजनाओं से सीधे तौर पर गरीबों, किसानों, युवाओं और महिलाओं को आर्थिक संबल मिलना था, तो आखिर सपा को इससे क्या आपत्ति थी? उन्होंने कहा कि सत्र को हंगामे की भेंट चढ़ाना असल में इन तीनों वर्गों के अधिकारों पर सीधा डाका डालने के समान है।

विपक्ष की 'व्यवधानवादी राजनीति' और नकारात्मक चेहरा

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समाजवादी पार्टी पर कटाक्ष करते हुए कहा कि आज विपक्ष के पास राज्य के विकास के मुद्दों पर बात करने के लिए कोई ठोस तर्क नहीं बचा है, इसलिए वे केवल नकारात्मक राजनीति का सहारा ले रहे हैं। उन्होंने कहा कि सदन की कार्यवाही को बाधित करना और तख्तियां लेकर वेल में हंगामा करना अब विपक्ष की आदत बन चुकी है। यह ‘व्यवधानवादी राजनीति’ न केवल सदन की गरिमा को ठेस पहुंचाती है, बल्कि उन करोड़ों मतदाताओं का भी अपमान करती है जिन्होंने बड़ी उम्मीदों के साथ अपने प्रतिनिधियों को विधानसभा में भेजा था। सीएम ने कहा कि जनता सब देख रही है और वह जानती है कि कौन दल प्रदेश को विकास की ऊंचाइयों पर ले जाना चाहता है और कौन दल केवल अराजकता फैलाकर अपनी राजनीतिक जमीन बचाने की जुगत में लगा है।

हंगामे के बावजूद पारित हुआ 59 हजार करोड़ का अनुपूरक बजट

विपक्षी दलों के लाख विरोध, हंगामे और अड़ंगों के बावजूद योगी सरकार ने अपनी प्रशासनिक दृढ़ता और सदन में स्पष्ट बहुमत का परिचय देते हुए सभी महत्वपूर्ण विधायी कार्यों को सफलतापूर्वक पूरा किया। सरकार ने यह सुनिश्चित किया कि किसी भी परिस्थिति में जनता के विकास का रथ न रुके। सत्र के दौरान 59,000 करोड़ रुपये से अधिक का अनुपूरक बजट पूरी संवैधानिक और विधायी प्रक्रिया का पालन करते हुए पारित करा लिया गया। इस बजट के माध्यम से राज्य के बुनियादी ढांचे, एक्सप्रेसवे निर्माण, ग्रामीण सड़कों, स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा तथा महिलाओं और बुजुर्गों की पेंशन के लिए भारी मात्रा में धन आवंटित किया गया है। सरकार का यह स्पष्ट संदेश है कि विपक्ष के अवरोधों के बावजूद प्रदेश के विकास और जनहित के कार्य पूरी गति से जारी रहेंगे।

संसदीय परंपराओं का हनन और भविष्य के राजनीतिक संकेत

इस पूरे घटनाक्रम ने उत्तर प्रदेश की राजनीतिक दिशा और विधायी संस्कृति पर एक गंभीर बहस छेड़ दी है। विधानसभा अध्यक्ष के भावुक होने और सत्र के अचानक समाप्त होने की घटना ने यह साबित कर दिया है कि सदन के अंदर संवाद का स्तर लगातार गिर रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले समय में यह मुद्दा जनता के बीच और अधिक जोर पकड़ेगा। सत्ता पक्ष जहां इसे विकास कार्यों में रोड़ा अटकाने वाले विपक्ष की पोल खोलने के रूप में जनता के सामने रखेगा, वहीं विपक्ष इसे सरकार के तानाशाही रवैये से जोड़कर देखेगा। बहरहाल, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के इस आक्रामक रुख ने यह साफ कर दिया है कि सरकार जनता के हितों से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार के राजनीतिक दबाव या व्यवधान के आगे झुकने वाली नहीं है, और विकास की यह रफ्तार अनवरत जारी रहेगी।