BREAKING:
August 07 2026 04:43 am

आखिर कैसे हुई ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान की सुप्रीम लीडर मुज्तबा खामेनेई से बेहद खौफनाक और रहस्यमयी सीक्रेट मीटिंग?

Post

मध्य एशिया और खाड़ी देशों की राजनीति इस समय एक ऐसे सनसनीखेज और रहस्यमयी मोड़ पर पहुंच चुकी है, जिसने दुनिया भर की खुफिया एजेंसियों के कान खड़े कर दिए हैं। ईरान के सर्वोच्च राजनीतिक गलियारों से एक ऐसी खबर बाहर आई है जिसने सबको चौंका दिया है। देश के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान और ईरान के नए सुप्रीम लीडर मुज्तबा खामेनेई के बीच हुई एक गुप्त मुलाकात के विवरण ने हर किसी को हैरान कर दिया है। यह मीटिंग किसी आलीशान दफ्तर या आधिकारिक आवास में नहीं, बल्कि एक अंधेरी कार की पिछली सीट पर बेहद कड़ी सुरक्षा के बीच संपन्न हुई। इस पूरी घटना ने इस बात पर फिर से मुहर लगा दी है कि ईरान के भीतर सत्ता के शीर्ष पर किस तरह का अविश्वास, खौफ और आंतरिक तनाव चल रहा है।

इस्तीफे की धमकी के बाद तय हुई थी यह अजीबोगरीब मुलाकात

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान और सुप्रीम लीडर मुज्तबा खामेनेई के बीच यह गुप्त बैठक बहुत आसानी से तय नहीं हुई थी। ईरान के राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि पेजेशकियान पिछले काफी समय से देश की सर्वोच्च सत्ता से सीधे संवाद स्थापित करने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन उन्हें लगातार नजरअंदाज किया जा रहा था। स्थिति तब हद से आगे बढ़ गई जब राष्ट्रपति ने अपनी अनदेखी से तंग आकर अपने पद से इस्तीफा देने की गंभीर धमकी दे डाली। इस अल्टीमेटम के बाद ही सुप्रीम लीडर के कार्यालय ने आखिरकार पेजेशकियान की जिद के आगे झुकते हुए एक सीक्रेट मीटिंग की रूपरेखा तैयार की, लेकिन इसके नियम और शर्तें पूरी तरह से असामान्य और सुरक्षा के लिहाज से बेहद सख्त रखी गईं।

तेहरान का अज्ञात ठिकाना और काले शीशे वाली कमर्शियल गाड़ी

तयशुदा योजना के तहत, राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान के निजी सुरक्षा काफिले को तेहरान शहर के भीतर एक गुप्त और अनजान ठिकाने पर ले जाया गया। उस गोपनीय स्थान पर पहुंचते ही राष्ट्रपति को उनकी अपनी आधिकारिक गाड़ी से उतारकर एक दूसरी कमर्शियल गाड़ी की पिछली सीट पर बैठने का निर्देश दिया गया। इस वाहन की खासियत यह थी कि इसकी खिड़कियों पर बहुत गहरे और काले रंग के शीशे (Tinted Windows) लगे हुए थे ताकि बाहर से भीतर का कुछ भी दिखाई न दे सके। रिपोर्ट्स के अनुसार, जब पेजेशकियान उस कार के अंदर दाखिल हुए, तो ईरान के नए सुप्रीम लीडर मुज्तबा खामेनेई पहले से ही पिछली सीट के दूसरे कोने पर मौजूद थे। इस पूरी प्रक्रिया ने किसी जासूसी थ्रिलर फिल्म के दृश्य को जमीन पर उतार दिया था।

न चेहरा दिखा, न हाथ मिलाने की इजाजत और कुल चंद मिनटों की बातचीत

कार के अंदर का मंजर सामान्य मुलाकातों से कोसों दूर था। सुरक्षा पाबंदियों का आलम यह था कि वाहन के भीतर रोशनी न के बराबर यानी पूरी तरह से अंधेरा रखा गया था, जिसकी वजह से दोनों नेता आमने-सामने होने के बावजूद एक-दूसरे का चेहरा स्पष्ट रूप से देख नहीं पा रहे थे। इतना ही नहीं, सुप्रीम लीडर के साथ तैनात कड़े पहरे वाले गार्ड्स ने दोनों के बीच किसी भी तरह के शारीरिक संपर्क या शिष्टाचार की इजाजत देने से साफ इनकार कर दिया, जिसके चलते राष्ट्रपति और सुप्रीम लीडर आपस में हाथ तक नहीं मिला सके। यह पूरी उच्च-स्तरीय और संवेदनशील बातचीत केवल कुछ ही मिनटों तक चल पाई, जिसमें बिना किसी औपचारिक गर्मजोशी के सिर्फ दबी हुई आवाजों में जरूरी बातें हुईं और तुरंत बाद राष्ट्रपति को वहां से जाने का आदेश दे दिया गया।

राष्ट्रपति पेजेशकियान की नाराजगी और हैरान करने वाला सवाल

इस बेहद अपमानजनक और अजीबोगरीब तरीके से कराई गई मुलाकात के बाद जब राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान अपने दफ्तर लौटे, तो उनका गुस्सा साफ झलक रहा था। राष्ट्रपति कार्यालय के करीबी सूत्रों का कहना है कि पेजेशकियान इस बर्ताव से अंदर तक आहत और नाराज थे, क्योंकि देश के चुने हुए राष्ट्रपति होने के बावजूद उनके साथ ऐसा सलूक किया गया था जो किसी आम संदिग्ध कैदी से भी बदतर था। हैरानी की बात तो यह है कि राष्ट्रपति ने अपने सहयोगियों के बीच बातचीत में यह तक कह दिया कि क्या अंधेरे में सुनाई देने वाली वह आवाज वास्तव में मुज्तबा खामेनेई की ही थी या फिर उनसे मिलने वाला शख्स कोई और था। हालांकि यह स्पष्ट नहीं हो पाया कि उनका यह बयान अत्यधिक गुस्से की वजह से निकला व्यंग्य था या उन्हें वाकई इस बात का संदेह था कि उन्होंने जिस व्यक्ति से बात की, वह असली सुप्रीम लीडर थे भी या नहीं।

पांच महीनों से सार्वजनिक रूप से गायब हैं मुज्तबा खामेनेई

इस पूरी घटना के केंद्र में ईरान के मौजूदा हालात और मुज्तबा खामेनेई की रहस्यमयी गुमशुदगी जुड़ी हुई है। जानकारों के मुताबिक, जब से अयातुल्लाह अली खामेनेई के निधन के बाद उनके बेटे मुज्तबा खामेनेई को देश का नया सुप्रीम लीडर चुना गया है, तब से लेकर पिछले लगभग पांच महीनों में उन्हें एक बार भी सार्वजनिक रूप से कैमरे के सामने नहीं देखा गया है। न तो उनका कोई नया वीडियो सामने आया है और न ही कोई स्पष्ट ऑडियो संदेश जारी किया गया है। अंतरराष्ट्रीय मीडिया और खुफिया रिपोर्ट्स में यह दावा किया जाता रहा है कि मुज्तबा खामेनेई इजराइल और अमेरिका के संभावित हमलों के डर से पूरी तरह अंडरग्राउंड जीवन बिता रहे हैं। उनकी इस लंबी गैर-मौजूदगी के कारण ही ईरानी शासन के भीतर ही अफवाहों और अटकलों का बाजार गर्म है।

मोसाद-सीआईए की नजर और तकनीकी सर्विलांस का खौफ

ईरानी नेतृत्व द्वारा इस तरह की अत्यधिक गोपनीयता बरतने के पीछे सबसे बड़ा कारण विदेशी खुफिया एजेंसियों का भारी तकनीकी खौफ है। हाल ही में आई मीडिया रिपोर्ट्स और तेहरान के अखबारों में छपे लेखों के अनुसार, अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए और इजराइल की कुख्यात एजेंसी मोसाद अत्याधुनिक डिजिटल सर्विलांस और ऑडियो सिग्नेचर एनालिसिस का उपयोग कर रही हैं। माना जाता है कि यदि सुप्रीम लीडर किसी भी डिजिटल उपकरण, फोन, लैपटॉप या सामान्य रेडियो फ्रिक्वेंसी का इस्तेमाल करते हैं, तो दुश्मन देश उनकी सटीक लोकेशन का पता लगा सकते हैं। यही वजह है कि मुज्तबा खामेनेई किसी भी तरह के इलेक्ट्रॉनिक सिग्नल या खुले संपर्क से बचते नजर आ रहे हैं, ताकि उनके ठिकाने का सुराग दुनिया की किसी भी खुफिया एजेंसी के हाथ न लग सके।

ईरान की आंतरिक राजनीति और अमेरिका-परमाणु नीति पर बढ़ता दबाव

इस नाटकीय सीक्रेट मीटिंग और लेटर बम जैसी वारदातों से यह साफ हो जाता है कि ईरान का सत्ता-प्रतिष्ठान अंदर से बुरी तरह बंटा हुआ है। एक तरफ देश की गंभीर आर्थिक बदहाली और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के कारण जनता में भारी आक्रोश है, तो दूसरी तरफ अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सख्त तेवरों ने तेहरान की नींद उड़ा रखी है। राष्ट्रपति पेजेशकियान और संसद के कई वरिष्ठ नेता यह मानते हैं कि यदि देश को बचाना है तो अमेरिका के साथ परमाणु समझौते और कूटनीतिक बातचीत के रास्ते पर लौटना ही होगा। वहीं दूसरी ओर, कट्टरपंथी धड़ा और सैन्य विंग किसी भी प्रकार के समझौते के खिलाफ कड़ा रुख अपनाए हुए है।