सुबह उठते ही घर से तुरंत निकाल फेंकें ये 6 अशुभ चीजें, दूर होगी कंगाली और तिजोरी में कभी नहीं होगी पैसों की किल्लत
वास्तु शास्त्र में घर की ऊर्जा और वहां रहने वाले लोगों के भाग्य के बीच गहरा संबंध माना गया है। कई बार दिन-रात कड़ी मेहनत करने के बावजूद व्यक्ति को आर्थिक तंगी, कर्ज और पारिवारिक कलह का सामना करना पड़ता है। अक्सर हम इन परेशानियों का कारण बाहरी परिस्थितियों में तलाशते हैं, जबकि असली वजह हमारे अपने घर के भीतर मौजूद वास्तु दोष हो सकते हैं। घर में रखी प्रत्येक सजीव और निर्जीव वस्तु अपने आसपास एक खास ऊर्जा क्षेत्र (Energy Field) का निर्माण करती है। जब घर में नकारात्मक ऊर्जा फैलाने वाली अनुपयोगी या टूटी-फूटी चीजें जमा होने लगती हैं, तो सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह अवरुद्ध हो जाता है, जिसका सीधा असर परिवार के सदस्यों की सेहत और आर्थिक स्थिति पर पड़ता है।
वास्तु विशेषज्ञों और ज्योतिष आचार्यों के अनुसार, सुबह का समय घर में नवऊर्जा और मां लक्ष्मी के प्रवेश का समय होता है। यदि इस पावन वेला में घर के भीतर दरिद्रता को आकर्षित करने वाली वस्तुएं मौजूद रहें, तो आर्थिक उन्नति के सारे मार्ग बंद हो जाते हैं। यदि आप चाहते हैं कि आपके घर में सुख-समृद्धि का वास हो और धन की तिजोरी कभी खाली न रहे, तो सुबह की शुरुआत में ही इन 6 अशुभ चीजों को अपने घर से हमेशा के लिए बाहर कर देना चाहिए।
1. खराब, जंग लगे और बिना चाबी के पुराने ताले
वास्तु और ज्योतिष शास्त्र में ताले को व्यक्ति के भाग्य और अवसरों से जोड़कर देखा जाता है। घर के किसी कोने, दराज या स्टोर रूम में पड़े ऐसे ताले जो खराब हो चुके हैं, जिन पर जंग लग चुका है या जिनकी चाबियां खो चुकी हैं, वे जीवन में प्रगति की रुकावट का सबसे बड़ा कारण बनते हैं।
बंद और बेकार पड़े ताले सीधे तौर पर राहु और शनि के अशुभ प्रभाव को बढ़ाते हैं। यह परिवार के मुखिया की निर्णय क्षमता को प्रभावित करते हैं और करियर या व्यवसाय में बने-बनाए काम को अंतिम समय पर बिगाड़ देते हैं। ऐसे अनुपयोगी तालों को तुरंत घर से बाहर कर देना चाहिए। जो ताले चालू हालत में हों, उन पर तेल लगाकर सही जगह व्यवस्थित रखें।
2. सूखे, कांटेदार और मुरझाए हुए पौधे
पेड़-पौधे घर में प्राणवायु और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं, लेकिन यदि पौधे सूख जाएं, मुरझा जाएं या वे कांटेदार प्रजाति के हों, तो वे तुरंत घर के वातावरण को विषाक्त बना देते हैं।
वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर की बालकनी, मुख्य द्वार या छत पर रखे कैक्टस या अन्य कांटेदार पौधे रिश्तों में कड़वाहट और तनाव पैदा करते हैं। इसी प्रकार, सूखा या मुरझाया हुआ तुलसी का पौधा अथवा अन्य गमले दरिद्रता को आमंत्रित करते हैं। सुबह के समय बागवानी करते समय यह सुनिश्चित करें कि पौधों से सूखे पत्ते और टहनियां छांटकर फेंक दी जाएं। यदि कोई पौधा पूरी तरह सूख चुका है, तो उसे आदरपूर्वक मिट्टी में दबा दें या किसी बहते जल में विसर्जित कर वहां नया हरा-भरा पौधा लगाएं।
3. मंदिर में रखी खंडित मूर्तियां और फटी तस्वीरें
घर का पूजा स्थल सकारात्मक ऊर्जा का मुख्य केंद्र होता है। वास्तु शास्त्र के अनुसार, पूजा घर में किसी भी देवी-देवता की थोड़ी सी भी खंडित, चटक चुकी मूर्ति अथवा जीर्ण-शीर्ण और फटी हुई तस्वीर रखना घोर वास्तु दोष उत्पन्न करता है।
ऐसी प्रतिमाओं की पूजा करने से देव दोष लगता है और पूजा का कोई शुभ फल प्राप्त नहीं होता, बल्कि घर में अशांति और धन का अनावश्यक अपव्यय बढ़ने लगता है। यदि आपके मंदिर में ऐसी कोई मूर्ति या तस्वीर है, तो सुबह स्नान के बाद उसे आदरपूर्वक एक लाल कपड़े में लपेटकर किसी पवित्र नदी में प्रवाहित कर दें अथवा पीपल के पेड़ की जड़ के पास रख आएं। मंदिर में केवल स्पष्ट और अक्षत प्रतिमाओं की ही स्थापना करें।
4. मुख्य द्वार और कोनों में पड़े फटे-पुराने जूते-चप्पल
घर का मुख्य प्रवेश द्वार वह स्थान है जहां से सौभाग्य और मां लक्ष्मी का आगमन होता है। अक्सर लोग घर के मुख्य द्वार पर या सीढ़ियों के नीचे पुराने, फटे और घिसे हुए जूते-चप्पलों का ढेर लगा देते हैं।
ज्योतिष शास्त्र में जूते-चप्पल का संबंध शनि और राहु से माना गया है। प्रवेश द्वार पर बिखरे या फटे हुए जूते-चप्पल घर में नकारात्मकता लाते हैं और परिवार के सदस्यों के स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाते हैं। सुबह के समय घर की साफ-सफाई करते हुए अनुपयोगी जूते-चप्पलों को तुरंत कूड़ेदान में डाल दें। उपयोगी जूतों को हमेशा पश्चिम या दक्षिण दिशा में बने बंद शू-रैक में करीने से रखें।
5. दीवारों और छतों पर लगे मकड़ी के जाले
घरों के कोनों, पंखों, अलमारियों के पीछे या छत पर लगे मकड़ी के जाले वास्तु शास्त्र में सबसे बड़ा नकारात्मक संकेत माने जाते हैं। जाले राहु ग्रह के दुष्प्रभाव को दर्शाते हैं और यह इस बात का संकेत देते हैं कि घर में आलस्य, भ्रम और आर्थिक ठहराव बढ़ रहा है।
मकड़ी के जालों की संरचना ऐसी होती है जो नकारात्मक ऊर्जा को बांधकर रखती है, जिससे घर के लोगों की सोच में संकीर्णता और काम में रुकावटें आने लगती हैं। सुबह उठकर झाड़ू-पोछा करते समय घर के हर कोने, रोशनदान और मंदिर के आसपास के जालों को पूरी तरह साफ करें। जिस घर में नियमित स्वच्छता रहती है, वहां सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह निर्बाध रूप से होता है।
6. चटका हुआ शीशा, टूटा कांच और दरार वाले बर्तन
वास्तु शास्त्र में दर्पण (कांच) को ऊर्जा का परावर्तक माना गया है। घर में लगा टूटा हुआ आईना, चटका हुआ खिड़की का कांच या दरार पड़े हुए कांच के बर्तन तुरंत नकारात्मक ऊर्जा का केंद्र बन जाते हैं।
टूटे हुए शीशे में अपना चेहरा देखना दुर्भाग्य को न्योता देना माना जाता है। इससे मानसिक तनाव, स्वास्थ्य में गिरावट और परिवार में आकस्मिक धन हानि के योग बनते हैं। यदि घर में किसी भी आईने, फोटो फ्रेम या बर्तन में जरा सी भी दरार आ जाए, तो उसे तुरंत घर से बाहर कर दें। नया शीशा लगाते समय ध्यान रखें कि वह उत्तर या पूर्व दिशा की दीवार पर ही लगा हो।
तिजोरी और धन स्थान को समृद्ध बनाने के अचूक वास्तु नियम
घर से नकारात्मक वस्तुओं को हटाने के साथ-साथ धन के स्थान यानी तिजोरी या कैश लॉकर की ऊर्जा को संतुलित रखना भी अत्यंत आवश्यक है:
दिशा का चयन: धन रखने की अलमारी या तिजोरी को घर के दक्षिण-पश्चिम (नैऋत्य कोण) हिस्से में इस प्रकार रखें कि उसका दरवाजा खोलते समय उत्तर दिशा (कुबेर की दिशा) की ओर खुले।
लाल या पीला कपड़ा: तिजोरी के अंदर की सतह पर लाल या पीले रंग का रेशमी वस्त्र बिछाएं।
शुभ प्रतीक: तिजोरी में एक सुपारी, चांदी का सिक्का और गोमती चक्र स्थापित करने से अनावश्यक खर्चों पर रोक लगती है।
प्रातः काल का नियम: सुबह स्नान के बाद तांबे के लोटे में जल, थोड़ा कच्चा दूध और हल्दी मिलाकर घर के मुख्य द्वार पर छिड़कने से नकारात्मक शक्तियां समाप्त होती हैं और स्थायी धन लाभ होता है।
घर को स्वच्छ, व्यवस्थित और वास्तु सम्मत बनाकर रखने से जीवन में आने वाली अड़चनें दूर होती हैं, कार्यक्षेत्र में सफलता मिलती है और परिवार में सुख, शांति तथा समृद्धि का स्थायी वास होता है।