इस यूनिवर्सिटी के टीचरों के कोचिंग और प्राइवेट ट्यूशन पढ़ाने पर बैन, देना होगा शपथपत्र
उच्च शिक्षा की गुणवत्ता को सुधारने और शिक्षण संस्थानों में पारदर्शिता लाने के लिए प्रशासन ने एक बेहद कड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाया है। इसके तहत यूनिवर्सिटी के शिक्षकों के कोचिंग सेंटर चलाने और प्राइवेट ट्यूशन पढ़ाने पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया है। इतना ही नहीं, इस नियम का सख्ती से पालन कराने के लिए अब सभी प्रोफेसरों और शिक्षकों को प्रशासन के समक्ष एक औपचारिक शपथपत्र (Affidavit) भी जमा करना होगा। इस नए आदेश के बाद से शैक्षणिक गलियारों में हड़कंप मच गया है, क्योंकि अब शिक्षक अपने शिक्षण कार्य के अलावा व्यावसायिक रूप से निजी कोचिंग या ट्यूशन नहीं दे सकेंगे।
क्यों उठाया गया यह कड़ा कदम?
अक्सर यह शिकायतें मिल रही थीं कि यूनिवर्सिटी के कई नियमित शिक्षक कॉलेज समय के बाद या उससे इतर निजी कोचिंग संस्थानों में पढ़ाते हैं या घर पर बैचेज चलाते हैं, जिससे उनका पूरा ध्यान मुख्य विश्वविद्यालय की कक्षाओं और शोध कार्यों से भटक जाता है। विद्यार्थियों की रेगुलर क्लास प्रभावित होने और शिक्षा के व्यावसायीकरण को रोकने के लिए यूनिवर्सिटी प्रशासन ने यह फैसला लिया है। प्रशासन का मानना है कि शिक्षक अपनी पूरी ऊर्जा और समय केवल यूनिवर्सिटी के छात्रों के शैक्षणिक विकास और रिसर्च में लगाएं, इसी उद्देश्य से यह रोक लगाई गई है।
अब देना होगा अनिवार्य शपथपत्र
नए नियमों के दायरे में आने वाले सभी शिक्षकों को अब लिखित रूप में यह शपथपत्र देना होगा कि वे किसी भी प्रकार की प्राइवेट कोचिंग, कमर्शियल ट्यूशन या कोचिंग संस्थानों से नहीं जुड़े हुए हैं। यदि कोई शिक्षक इस नियम का उल्लंघन करते हुए पाया जाता है, तो उसके खिलाफ यूनिवर्सिटी के सेवा नियमों के तहत अनुशासनात्मक और कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन द्वारा उठाए गए इस कदम की छात्र संगठनों और शिक्षाविदों द्वारा काफी सराहना की जा रही है, क्योंकि इससे अकादमिक माहौल में सुधार होने की उम्मीद है।
उच्च शिक्षा पर पड़ेगा सकारात्मक असर
विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रतिबंध के लागू होने से यूनिवर्सिटी का शैक्षिक स्तर सुधरेगा और शिक्षक पूरी ईमानदारी से अपने कर्तव्यों का निर्वहन करेंगे। छात्रों को अब अपनी कक्षाओं में ही बेहतर मार्गदर्शन मिल सकेगा और उन्हें बाहर महंगे कोचिंग संस्थानों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि आदेश का उल्लंघन करने वालों पर किसी भी तरह की ढिलाई नहीं बरती जाएगी।