5 Trillion Dollar Economy: क्या सच में 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बन पाएगा भारत? IMF ने की यह बड़ी भविष्यवाणी
दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शुमार भारत के लिए 5 ट्रिलियन डॉलर (5 Trillion Dollar Economy) की अर्थव्यवस्था बनने का सपना तेजी से आगे बढ़ रहा है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के ताजा आंकड़ों और वैश्विक आर्थिक दृष्टिकोण (World Economic Outlook) के मुताबिक, भारत इस ऐतिहासिक मील के पत्थर को हासिल करने की दिशा में लगातार मजबूत कदम बढ़ा रहा है।
हाल ही में संसद में दिए गए एक आधिकारिक बयान में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने स्पष्ट किया है कि आईएमएफ के अनुमानों के अनुसार, चालू कीमतों (Current Prices) पर भारत की जीडीपी वित्त वर्ष 2028-29 (FY29) तक लगभग 5.1 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच जाएगी।
कब तक हासिल होगा यह मुकाम?
वैश्विक उथल-पुथल, ट्रेड टेंशन और विभिन्न आर्थिक कारकों को ध्यान में रखते हुए आईएमएफ ने अपने संशोधित अनुमानों में वित्तीय वर्ष 2028-29 तक भारत के इस मुकाम पर पूरी तरह पहुंचने की बात कही है। हालांकि कुछ वैश्विक अनिश्चितताओं के कारण टाइमलाइन में हल्का बदलाव जरूर आया है, लेकिन सरकार की व्यापक विकास रणनीतियों और मजबूत घरेलू बुनियादी ढांचे के दम पर भारत दुनिया में सबसे तेजी से आगे बढ़ने वाली महाशक्ति बना हुआ है।
भारतीय अर्थव्यवस्था को गति देने वाले मुख्य कारक:
मजबूत घरेलू खपत: भारत की जीडीपी का एक बड़ा हिस्सा (लगभग 70%) घरेलू खपत पर आधारित है, जो इसे वैश्विक मंदी के दौर में भी सुरक्षा कवच प्रदान करता है।
विनिर्माण और मेक इन इंडिया: 'प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव' (PLI) स्कीम, नेशनल लॉजिस्टिक्स पॉलिसी और मेक इन इंडिया जैसे अभियानों से देश के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को नई ऊर्जा मिल रही है।
डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI): तकनीक, फिनटेक और डिजिटल अर्थव्यवस्था का तेजी से विस्तार देश के सर्विस सेक्टर को नई ऊंचाइयां दे रहा है।
पब्लिक कैपिटल एक्सपेंडीचर: सरकार द्वारा लगातार बुनियादी ढांचे (Infrastructure) पर खर्च बढ़ाने से लॉजिस्टिक्स और व्यापार सुगमता (Ease of Doing Business) में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।
वैश्विक मोर्चे पर भारत की स्थिति
भले ही वैश्विक अर्थव्यवस्था सुस्त रफ्तार से आगे बढ़ रही हो और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई चुनौतियां मौजूद हों, लेकिन भारत अपनी मजबूत वृहद आर्थिक बुनियादी (Macroeconomic Fundamentals) और रणनीतिक सुधारों के बल पर निरंतर आगे बढ़ रहा है। कृषि उत्पादकता बढ़ाने, एमएसएमई (MSME) सेक्टर को वित्तीय समर्थन देने और सेमीकंडक्टर व क्लीन एनर्जी जैसे फ्यूचरिस्टिक क्षेत्रों पर फोकस करने से भारत के 5 ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी के लक्ष्य को ठोस आधार मिल रहा है।