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August 22 2026 03:43 am

'पाकिस्तान नहीं चीन हमारी सबसे बड़ी चुनौती, सेना को रहना होगा तैयार': पूर्व सेना प्रमुख जनरल नरवणे की चेतावनी

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भारत के पूर्व थलसेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे ने देश की राष्ट्रीय सुरक्षा और भू-राजनीतिक चुनौतियों को लेकर एक बेहद दूरदर्शी और अहम बयान दिया है। अपनी नई पुस्तक के विमोचन के अवसर पर उन्होंने स्पष्ट किया कि हालांकि मौजूदा समय में पाकिस्तान की ओर से मिलने वाली आतंकवाद की चुनौती के कारण हमारा ध्यान उस पर अधिक केंद्रित रहता है, लेकिन लंबी अवधि में चीन ही भारत का मुख्य रणनीतिक प्रतिद्वंद्वी होगा।

चीन और पाकिस्तान की चुनौतियों में अंतर

सुरक्षाीय समीकरणों पर चर्चा करते हुए पूर्व सेना प्रमुख ने कहा कि पाकिस्तान और चीन दोनों के साथ भारत के अनसुलझे सीमा विवाद और युद्ध का इतिहास रहा है, लेकिन दोनों देश पूरी तरह से अलग श्रेणियों में आते हैं। पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद के कारण भारत का तात्कालिक ध्यान अपनी पश्चिमी सीमा पर बना रहता है।

इसके विपरीत, चीन राजनीतिक, आर्थिक, कूटनीतिक और सैन्य मोर्चों पर लंबी अवधि में भारत का प्रमुख प्रतिद्वंद्वी बनकर उभर रहा है। हालांकि, कूटनीतिक परिपक्वता दिखाते हुए जनरल नरवणे ने चीन के लिए 'दुश्मन' शब्द का प्रयोग करने से परहेज किया और कहा कि जहां स्वस्थ प्रतिस्पर्धा होती है, वहां रणनीतिक संघर्ष की गुंजाइश भी हमेशा बनी रहती है।

'वार्ता पहली प्राथमिकता, लेकिन सैन्य तैयारी अनिवार्य'

जनरल नरवणे ने जोर देकर कहा कि भारत को हमेशा बल प्रयोग के बजाय कूटनीतिक तंत्र और द्विपक्षीय बातचीत के माध्यम से अपने मतभेदों को सुलझाने का प्रयास करना चाहिए। शक्ति का उपयोग हमेशा अंतिम विकल्प होना चाहिए।

इसके साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी संभावित बाहरी दुस्साहस को रोकने के लिए भारतीय सशस्त्र बलों का हर समय पूरी तरह तैयार रहना अनिवार्य है। उनका मानना है कि यदि कोई देश स्थायी शांति चाहता है, तो उसे युद्ध के लिए भी तैयार रहना होगा, ताकि एक मजबूत सैन्य प्रतिरोधक क्षमता (Military Deterrence) स्थापित की जा सके।

भारत के लिए स्थिर पड़ोस का होना बेहद जरूरी

क्षेत्रीय स्थिरता पर बात करते हुए पूर्व सेना प्रमुख ने नेपाल, भूटान, बांग्लादेश और म्यांमार जैसे पड़ोसी देशों के साथ शांति और सौहार्दपूर्ण संबंध बनाए रखने की वकालत की। उन्होंने कहा कि भू-राजनीति में कोई भी देश अपने पड़ोसी नहीं चुन सकता, इसलिए उपलब्ध परिस्थितियों में ही सर्वश्रेष्ठ कूटनीतिक प्रयास करने होते हैं।

यदि किसी पड़ोसी देश में अस्थिरता, हिंसा या शरणार्थी संकट जैसी स्थिति पैदा होती है, तो उसका सीधा असर भारत की आंतरिक सुरक्षा, सीमावर्ती व्यापार और अवैध गतिविधियों पर पड़ता है। इसलिए, एक स्थिर और शांत पड़ोस भारत के अपने दीर्घकालिक विकास और शांति के हितों में सर्वोपरि है।