शेयर बाजार की सुस्त चाल: सीमित दायरे में कारोबार के बाद फ्लैट बंद हुए सेंसेक्स और निफ्टी, 77,540 के स्तर पर ठहरा बाजार, जानिए टॉप गेनर्स और लूजर्स का हाल
सप्ताह के अंतिम कारोबारी दिन घरेलू शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव और सुस्ती का माहौल बना रहा। दोनों प्रमुख बेंचमार्क सूचकांक—बीएसई सेंसेक्स (BSE Sensex) और एनएसई निफ्टी (NSE Nifty)—दिनभर एक सीमित दायरे में कारोबार करने के बाद लगभग फ्लैट स्तर पर बंद हुए। वैश्विक बाजारों से मिले-जुले संकेतों, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की सतर्कता के बीच घरेलू निवेशकों ने आक्रामक खरीदारी से परहेज किया। कारोबार के अंत में 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स मामूली फेरबदल के साथ 77,540 अंक के स्तर पर ठहरा, जबकि 50 शेयरों वाला एनएसई निफ्टी भी बिना किसी बड़े बदलाव के सपाट बंद हुआ।
दिनभर सीमित दायरे में झूलता रहा बाजार
शुक्रवार सुबह बाजार की शुरुआत हल्की बढ़त के साथ हुई थी, लेकिन ऊपरी स्तरों पर मुनाफावसूली का दबाव देखने को मिला। दिन के अधिकांश हिस्से में बाजार में कोई स्पष्ट दिशा नजर नहीं आई और सूचकांक संकीर्ण दायरे (Narrow Range) में ही घूमते रहे। रियल्टी, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और चुनिंदा पीएसयू शेयरों में खरीदारी का समर्थन मिला, जबकि दिग्गज आईटी और निजी बैंकिंग स्टॉक्स में बिकवाली ने सूचकांकों की तेजी पर ब्रेक लगा दिया।
सेक्टोरल इंडेक्स और प्रमुख शेयरों का प्रदर्शन
सेक्टर के आधार पर देखें तो बाजार में मिला-जुला रुझान देखने को मिला:
मजबूती दिखाने वाले सेक्टर्स: निफ्टी रियल्टी, ऑटो और मेटल इंडेक्स में आधा से एक प्रतिशत तक की बढ़त दर्ज की गई, जिससे बाजार को निचले स्तरों पर सहारा मिला।
दबाव वाले सेक्टर्स: निफ्टी आईटी और प्राइवेट बैंक इंडेक्स में मामूली कमजोरी दर्ज हुई, जिसने बाजार के मूड को सुस्त बनाए रखा।
टॉप गेनर्स (Top Gainers): ऑटोमोबाइल, चुनिंदा मेटल और फार्मा कंपनियों के शेयरों में खरीदारी देखने को मिली, जिससे वे हरे निशान में बंद हुए।
टॉप लूजर्स (Top Losers): आईटी सेवा क्षेत्र की बड़ी कंपनियों, चुनिंदा निजी बैंकों और ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के शेयरों में हल्की बिकवाली का दबाव देखा गया।
मिडकॅप और स्मॉलकॅप शेयरों में दिखी बेहतर हलचल
मुख्य सूचकांकों के सपाट रहने के बावजूद ब्रॉडर मार्केट (Broader Market) में निवेशकों की दिलचस्पी बनी रही। बीएसई मिडकैप (Midcap) और स्मॉलकैप (Smallcap) इंडेक्स ने बेंचमार्क इंडेक्स की तुलना में बेहतर प्रदर्शन किया और मामूली बढ़त के साथ बंद हुए। इससे बाजार का ओवरऑल मार्केट ब्रेड्थ (Advance-Decline Ratio) सकारात्मक बना रहा, जहां गिरने वाले शेयरों के मुकाबले बढ़ने वाले शेयरों की संख्या थोड़ी अधिक रही।
वैश्विक संकेत और घरेलू कारकों का बाजार पर असर
मार्केट एक्सपर्ट्स के मुताबिक, बाजार के फ्लैट क्लोजिंग के पीछे कई घरेलू और अंतरराष्ट्रीय कारण रहे:
वैश्विक कच्चे तेल की कीमतें: अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतों में उछाल ने निवेशकों को सतर्क किया, क्योंकि कच्चा तेल महंगा होने से आयात लागत और मुद्रास्फीति पर असर पड़ता है।
विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) का रुख: विदेशी निवेशकों की ओर से आक्रामक खरीदारी की कमी और चुनिंदा सेक्टर्स में बिकवाली ने बाजार को एक दायरे में बांधे रखा।
आरबीआई और फेडरल रिजर्व की नीतियों पर नजर: केंद्रीय बैंकों की आगामी ब्याज दर नीतियों और मुद्रास्फीति के आंकड़ों को लेकर निवेशक कोई बड़ा दांव लगाने से पहले स्पष्ट संकेतों का इंतजार कर रहे हैं।
बाजार के लिए आगामी सप्ताह का आउटलुक
विश्लेषकों का मानना है कि सेंसेक्स का 77,500 का स्तर एक महत्वपूर्ण सपोर्ट और कंसोलिडेशन जोन बना हुआ है। जब तक सूचकांक किसी एक दिशा में निर्णायक ब्रेकआउट नहीं देता, तब तक बाजार में इसी तरह का रेंज-बाउंड (सीमित दायरा) मूवमेंट देखने को मिल सकता है। आने वाले सप्ताह में निवेशकों की नजर वैश्विक भू-राजनीतिक घटनाक्रमों, घरेलू मैक्रोइकॉनॉमिक डेटा और विदेशी फंड फ्लो पर टिकी रहेगी।