महाराष्ट्र में मराठी भाषा अनिवार्य: डेढ़ लाख ड्राइवरों ने सीखी भाषा, परीक्षा में फेल होने वाले 7,750 ड्राइवरों को फिर देना होगा एग्जाम
महाराष्ट्र सरकार द्वारा कमर्शियल पैसेंजर गाड़ियों के चालकों के लिए स्थानीय भाषा यानी मराठी की जानकारी अनिवार्य किए जाने के बाद से राज्य में सख्ती तेज हो गई है। परिवहन मंत्री प्रताप सरनाइक ने हाल ही में आंकड़े साझा करते हुए बताया कि राज्यभर में चलाए जा रहे चेकिंग अभियान के दौरान मराठी की पर्याप्त जानकारी न होने पर पहले ही दिन 1,268 ऑटो-रिक्शा और टैक्सी चालकों को आधिकारिक नोटिस जारी किए गए हैं।
आरटीओ के जरिए हो रही है सख्त चेकिंग
राज्यभर के क्षेत्रीय परिवहन कार्यालयों (RTO) द्वारा यह अभियान व्यापक स्तर पर चलाया जा रहा है। परिवहन विभाग के अनुसार, अब तक राज्य में कुल 8,217 ड्राइवरों की जांच की जा चुकी है, जिसमें अकेले मुंबई महानगर क्षेत्र (MMR) के 3,995 ड्राइवर शामिल हैं।
जांच के दौरान जिन चालकों को मराठी की बुनियादी जानकारी नहीं थी, उन्हें नियमों का पालन करने के लिए एक महीने का अतिरिक्त समय दिया गया है। सरकार का कड़ा निर्देश है कि यदि इस तय समय सीमा के भीतर चालकों ने भाषा से जुड़े नियमों का पालन नहीं किया, तो उनके ड्राइविंग बैज तीन महीने के लिए निलंबित (सस्पेंड) कर दिए जाएंगे।
क्यों उठाया गया यह कदम?
राज्य सरकार का मानना है कि कमर्शियल वाहनों के चालकों द्वारा मराठी की जानकारी होना केवल प्रशासनिक नियमों का हिस्सा नहीं है, बल्कि यह आम यात्रियों की सुविधा, स्थानीय संवाद और उनकी सुरक्षा से भी सीधे तौर पर जुड़ा हुआ है।
इसी उद्देश्य के तहत पिछले दिनों सरकार ने उन ड्राइवरों के लिए एक विशेष मराठी भाषा सीखने का कोर्स शुरू किया था, जो पहले से मराठी नहीं बोल पाते थे। इसके लिए 15 अगस्त तक की समय-सीमा तय की गई थी। हालिया चेकिंग ड्राइव के दौरान ड्राइवरों की दक्षता परखने के लिए 16 सवालों का एक छोटा टेस्ट भी लिया गया, जिसमें नियमों का कड़ाई से पालन कराया जा रहा है। यह पूरा विशेष जांच अभियान आगामी 30 सितंबर तक लगातार जारी रहेगा।