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August 21 2026 08:04 pm

चीनी की कीमतों में रिकॉर्ड तेजी के बावजूद 6% तक लुढ़के शुगर स्टॉक्स: केंद्र सरकार के ड्यूटी-फ्री आयात और सख्त स्टॉक लिमिट से क्यों कांपे चीनी शेयर?

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घरेलू खुदरा बाजार में चीनी की कीमतें ₹69 से ₹70 प्रति किलोग्राम के रिकॉर्ड उच्च स्तर पर पहुंच चुकी हैं, लेकिन इसके ठीक उलट शुक्रवार के कारोबारी सत्र में शेयर बाजार में लिस्टेड दिग्गज चीनी कंपनियों के शेयरों में जोरदार बिकवाली देखने को मिली। हाल के हफ्तों में 52-वीक हाई बनाने वाले प्रमुख शुगर स्टॉक्स—बलरामपुर चीनी मिल्स, धामपुर शुगर, उत्तम शुगर मिल्स, बजाज हिंदुस्तान और डालमिया भारत शुगर—के शेयर 3 से 6 प्रतिशत से अधिक तक लुढ़क गए। सामान्य बाजार धारणा के अनुसार जब किसी कमोडिटी की कीमतें बढ़ती हैं तो उससे जुड़ी कंपनियों के मार्जिन और शेयर भाव में तेजी आती है, लेकिन इस बार उल्टी गंगा बहती नजर आई। बाजार विश्लेषकों के अनुसार, इस अचानक आई गिरावट की असली वजह चीनी की मांग नहीं, बल्कि कीमतों पर लगाम कसने के लिए केंद्र सरकार द्वारा उठाए गए कड़े नीतिगत कदम हैं।

10 लाख टन शुल्क मुक्त (ड्यूटी-फ्री) कच्ची चीनी के आयात का असर

शेयर बाजार में चीनी कंपनियों के शेयरों में आई अचानक गिरावट का सबसे प्रमुख और तात्कालिक ट्रिगर सरकार का वह फैसला है, जिसके तहत 31 अक्टूबर तक 10 लाख मीट्रिक टन कच्ची चीनी (Raw Sugar) के शुल्क मुक्त आयात की अनुमति दी गई है। भारत आमतौर पर घरेलू किसानों और स्थानीय चीनी मिलों के हितों की रक्षा के लिए विदेशी चीनी पर 100 प्रतिशत तक का भारी आयात शुल्क लगाता है। लगभग एक दशक बाद भारत ने घरेलू स्तर पर आपूर्ति बढ़ाने और आगामी त्योहारी सीजन (गणेश चतुर्थी, दशहरा और दिवाली) के दौरान खुदरा महंगाई को नियंत्रित करने के लिए शून्य आयात शुल्क पर चीनी मंगाने का रास्ता खोला है। बाजार को यह डर सता रहा है कि 10 लाख टन अतिरिक्त चीनी की आपूर्ति से खुले बाजार में कीमतें तेजी से नीचे आएंगी, जिसका सीधा असर मिलों की कमाई पर पड़ेगा।

स्टॉक होल्डिंग लिमिट घटकर 15 दिन हुई, थोक लिवाली पर लगा ब्रेक

सरकार ने आयात के साथ-साथ जमाखोरी और सट्टेबाजी को रोकने के लिए डीलरों और थोक उपभोक्ताओं पर स्टॉक सीमा को भी सख्त कर दिया है। नए नियमों के तहत जो भी व्यापारी या बल्क कंज्यूमर्स हर महीने 10 टन से अधिक चीनी का इस्तेमाल करते हैं, वे अब 15 दिनों से ज्यादा का स्टॉक जमा करके नहीं रख सकेंगे। पहले यह सीमा 30 दिनों की थी। इस प्रतिबंध के कारण थोक खरीदारों और मिठाई व एफएमसीजी कंपनियों ने चीनी मिलों से बड़े पैमाने पर अग्रिम खरीदारी बंद कर दी है। थोक मंडियों में लिवाली अचानक थम जाने से चीनी मिलों के तात्कालिक ऑर्डर प्रभावित हुए हैं।

एक्स-मिल कीमतों और प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव का डर

शेयर बाजार में हाल के महीनों में शुगर शेयरों में आई भारी तेजी इस उम्मीद पर टिकी थी कि घरेलू स्तर पर गन्ने की सीमित उपलब्धता और टाइट सप्लाई के कारण मिलों को ऊंचे एक्स-मिल (Ex-mill) रेट मिलेंगे। लेकिन सरकार के सप्लाई बढ़ाने के दोहरे एक्शन के बाद एक्स-मिल रियलाइजेशन में गिरावट आने का अनुमान है। जब मिलों को फैक्ट्री गेट पर चीनी के भाव कम मिलेंगे, तो आने वाली तिमाहियों में कंपनियों के ऑपरेटिंग मार्जिन (EBITDA Margin) और कुल मुनाफे पर सीधा नकारात्मक असर पड़ेगा। निवेशक इस मार्जिन संकुचन की आशंका को पहले ही भांपते हुए मुनाफावसूली करने लगे।

प्रमुख शुगर शेयरों में दर्ज की गई गिरावट का हाल

सरकारी घोषणा और पॉलिसी बदलाव के बाद शुक्रवार को चीनी सेक्टर के प्रमुख शेयरों में बिकवाली का दबाव साफ देखा गया:

धामपुर शुगर मिल्स (Dhampur Sugar Mills): शेयरों में 5% से 6% तक की भारी गिरावट दर्ज की गई।

बलरामपुर चीनी मिल्स (Balrampur Chini Mills): इंट्रा-डे में शेयर 5% से अधिक फिसलकर लाल निशान में आ गए।

उत्तम शुगर मिल्स व द्वारिकेश शुगर: दोनों स्टॉक्स में 3% से 5% के बीच तेज मुनाफावसूली देखी गई।

डालमिया भारत शुगर और ईआईडी पैरी: इन प्रमुख कंपनियों के शेयरों में भी 2% से 3.5% की कमजोरी दर्ज हुई।

एथेनॉल डायवर्जन और आगामी पेराई सीजन पर नजरें

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि चीनी शेयरों में यह गिरावट अल्पकालिक नीतिगत झटके का परिणाम है। सरकार की प्राथमिकता त्योहारी सीजन में आम जनता को ₹70 की महंगी चीनी से राहत दिलाना है। हालांकि, मध्यम से लंबी अवधि में एथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम (EBP) का विस्तार और अगले पेराई सत्र में गन्ने की पैदावार के अंतिम आंकड़े इन कंपनियों के वित्तीय स्वास्थ्य को तय करेंगे। जानकारों की सलाह है कि जब तक घरेलू स्पॉट मार्केट और एक्स-मिल कीमतों में स्थिरता नहीं आती, तब तक निवेशकों को शुगर शेयरों में आक्रामक नई खरीदारी से बचकर सतर्क रुख अपनाना चाहिए।