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August 24 2026 04:33 pm

त्योहारों से पहले महंगाई का डबल अटैक: ₹25 वाला प्याज पहुंचा ₹65 और ₹44 की चीनी ₹71 के पार, रसोई के बजट पर चली कैंची

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आगामी त्योहारी सीजन की आहट के साथ ही देश भर के खुदरा बाजारों में आम आदमी की रसोई के दो सबसे बुनियादी और अनिवार्य स्तंभों—प्याज और चीनी—ने मध्यमवर्गीय व निम्न आय परिवारों के घरेलू बजट को पूरी तरह हिला कर रख दिया है। कुछ महीने पहले तक 25 से 30 रुपये प्रति किलो बिकने वाला प्याज खुदरा मंडियों में उछलकर 60 से 65 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर पहुंच गया है। वहीं दूसरी ओर, 42 से 44 रुपये प्रति किलो के दायरे में रहने वाली चीनी के दाम बढ़कर 65 से 71 रुपये प्रति किलो के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुके हैं। रक्षाबंधन, जन्माष्टमी, गणेश चतुर्थी, दुर्गा पूजा और दीपावली जैसे प्रमुख भारतीय त्योहारों के ठीक मुहाने पर जब घरों में मिठाइयों, पकवानों और दैनिक उपभोग की मांग अपने चरम पर होती है, ऐसे समय में प्याज और चीनी के बीच मची यह मूल्य वृद्धि की होड़ सीधे तौर पर आम नागरिक की कमर तोड़ रही है। बाजार की इस बेकाबू महंगाई ने न केवल गृहिणियों के मासिक बजट का गणित बिगाड़ दिया है, बल्कि केंद्र और राज्य सरकारों के नीतिगत तंत्र में भी हलचल तेज कर दी है।

थोक से खुदरा तक लगी आग: ₹25 वाला प्याज ₹65 और ₹44 वाली चीनी ₹71 के पार

उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग के आधिकारिक मूल्य निगरानी आंकड़ों और प्रमुख महानगरों की स्थानीय मंडियों के सर्वेक्षण से साफ होता है कि यह मूल्य वृद्धि किसी एक शहर तक सीमित नहीं है, बल्कि इसने पूरे देश को अपनी चपेट में ले लिया है। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली-एनसीआर में उत्तम गुणवत्ता का प्याज 60 से 65 रुपये प्रति किलो बिक रहा है, जो पिछले महीने के मुकाबले 40 से 50 प्रतिशत तक की सीधी बढ़ोतरी दर्शाता है। दक्षिण भारत के महानगर चेन्नई और कोच्चि में प्याज के खुदरा भाव 58 से 62 रुपये प्रति किलो तक दर्ज किए गए हैं। उत्तर प्रदेश के लखनऊ, कानपुर, गोरखपुर, वाराणसी और प्रयागराज जैसे प्रमुख शहरों में प्याज 50 से 55 रुपये और कई मोहल्लों की खुदरा दुकानों में 60 रुपये किलो के भाव पर बिक रहा है।

वहीं मिठास के मोर्चे पर स्थिति और भी अधिक गंभीर नजर आ रही है। थोक मंडियों में चीनी की कीमतें बढ़ने का सीधा असर खुदरा किराना दुकानों पर पड़ा है, जहां पैकेज्ड और खुली चीनी 65 से 71 रुपये प्रति किलो की दर से बेची जा रही है। बिहार, असम और पूर्वोत्तर के कई सुदूर राज्यों में स्थानीय परिवहन और लॉजिस्टिक्स खर्च जुड़ने के बाद यह भाव 72 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है। पिछले एक दशक में चीनी और प्याज का एक साथ इस तेजी से महंगा होना पहली बार देखा जा रहा है।

रसोई का बजट हुआ बेपटरी: त्योहारों से पहले आम आदमी की थाली पर डबल अटैक

भारतीय खान-पान की संस्कृति में प्याज किसी भी सब्जी की ग्रेवी का अनिवार्य आधार है, जबकि चीनी सुबह की चाय से लेकर त्योहारों की हर मिठाई का मुख्य तत्व है। एक औसत मध्यमवर्गीय परिवार में हर महीने 8 से 10 किलो प्याज और 3 से 5 किलो चीनी की नियमित खपत होती है। महज दो महीनों के भीतर इन दोनों वस्तुओं की कीमतों में आए इस भारी उछाल के कारण हर परिवार के मासिक किचन बजट में 600 से 1,000 रुपये का अतिरिक्त और अनचाहा बोझ जुड़ गया है।

इस महंगाई की दोहरी मार केवल घरों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा नकारात्मक प्रभाव छोटे हलवाइयों, चाय की दुकानों, ढाबों, स्ट्रीट फूड वेंडर्स और रेस्टोरेंट्स पर भी पड़ा है। हलवाई संघों का कहना है कि चीनी महंगी होने से त्योहारों पर बनने वाले पेड़े, बर्फी, गुलाब जामुन और जलेबी की निर्माण लागत में 15 से 20 फीसदी की बढ़ोतरी हो गई है, जिससे उन्हें मिठाइयों के दाम बढ़ाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। दूसरी ओर, रेहड़ी-पटरी पर चाट, छोले-भटूरे और समोसे बेचने वाले दुकानदार प्याज की महंगाई के चलते सलाद की मात्रा घटा रहे हैं या पत्तागोभी का सहारा लेने लगे हैं।

मौसम की मार या सट्टेबाजी का खेल? जानिए क्यों अचानक उछले प्याज और चीनी के दाम

कृषि और कमोडिटी विशेषज्ञों के अनुसार, प्याज और चीनी दोनों की कीमतों में आई इस अप्रत्याशित तेजी के पीछे प्राकृतिक और मानव-निर्मित दोनों प्रकार के कारण जिम्मेदार हैं:

प्याज में खरीफ फसल का नुकसान: देश के कुल प्याज उत्पादन में लगभग 40 फीसदी की हिस्सेदारी रखने वाले महाराष्ट्र (नासिक, लासलगांव, अहमदनगर) और कर्नाटक के प्रमुख बेल्ट में मानसून की अनियमित बारिश और जलभराव के चलते खरीफ प्याज की शुरुआती रोपाई को नुकसान पहुंचा। इससे बाजार में यह धारणा बन गई कि आगामी महीनों में आवक कमजोर रह सकती है।

गन्ने में रेड रॉट रोग और उत्पादन गिरावट: उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और कर्नाटक के गन्ना उत्पादक क्षेत्रों में प्रतिकूल मौसम और 'रेड रॉट' व 'टॉप बोरर' फंगल बीमारियों के कारण गन्ने की फसल प्रभावित हुई। इसके चलते चालू पेराई सत्र में कुल चीनी उत्पादन गिरकर लगभग 280 लाख टन के निचले स्तर पर सिमटने का अनुमान लगाया गया।

इथेनॉल ब्लेंडिंग का दबाव: सरकार द्वारा पेट्रोल में इथेनॉल मिश्रण के लक्ष्य को पूरा करने के लिए लगभग 30 लाख टन से अधिक चीनी को फ्यूल इथेनॉल निर्माण की ओर डायवर्ट कर दिया गया, जिससे घरेलू बाजार में खाने योग्य चीनी का बफर स्टॉक पिछले साल के 50 लाख टन से घटकर 35 लाख टन के आसपास रह गया।

सटोरियों और बिचौलियों की जमाखोरी: त्योहारी सीजन में मांग बढ़ने की संभावना को भांपते हुए थोक व्यापारियों और सटोरियों ने कृत्रिम किल्लत पैदा करने के लिए माल को दबाना शुरू कर दिया, जिससे खुदरा बाजार में कीमतों में अचानक आग लग गई।

एक्शन मोड में केंद्र सरकार: 'कांदा एक्सप्रेस' और 10 लाख टन चीनी आयात से राहत की तैयारी

महंगाई के इस विस्फोटक रूप को देखते हुए केंद्र सरकार ने दोनों मोर्चों पर त्वरित और आक्रामक विनियामक हस्तक्षेप शुरू कर दिया है। प्याज की बढ़ती कीमतों पर काबू पाने के लिए सरकार ने सोमवार से महाराष्ट्र के नासिक से विशेष मालगाड़ियों यानी ‘कांदा एक्सप्रेस’ (Kanda Express) का परिचालन शुरू कर दिया है। नैफेड (NAFED) और एनसीसीएफ (NCCF) के 1.2 लाख टन के बफर स्टॉक से प्याज को सीधे दिल्ली-एनसीआर, चेन्नई, कोच्चि और गुवाहाटी जैसे उच्च खपत वाले क्षेत्रों में रेल मार्ग से भेजा जा रहा है ताकि लॉजिस्टिक्स लागत घटाकर मंडियों में 25 से 35 रुपये प्रति किलो की रियायती दर पर प्याज उपलब्ध कराया जा सके।

चीनी के मोर्चे पर सरकार ने करीब एक दशक बाद ऐतिहासिक कदम उठाते हुए 31 अक्टूबर तक शून्य आयात शुल्क (Zero Duty) पर 10 लाख मीट्रिक टन (1 मिलियन टन) कच्ची चीनी के आयात की औपचारिक अनुमति दे दी है। दुनिया के सबसे बड़े चीनी उत्पादक देश ब्राजील से यह खेप भारतीय रिफाइनरियों में पहुंचेगी। इसके अतिरिक्त, सरकार ने 10 मीट्रिक टन से अधिक चीनी का उपयोग करने वाले बड़े खरीदारों (कोल्ड ड्रिंक कंपनियां, बिस्कुट निर्माता और बड़े हलवाई) पर केवल 15 दिन के अग्रिम स्टॉक की सख्त सीमा (Stock Limit) लागू कर दी है और चीनी मिलों को अक्टूबर के पहले पखवाड़े से ही पेराई सत्र जल्दी शुरू करने के सख्त निर्देश दिए हैं।

कब तक मिलेगी राहत? आने वाले 10 से 15 दिनों में कीमतों में नरमी की उम्मीद

उपभोक्ता मामले मंत्रालय और ट्रेड विश्लेषकों का मानना है कि सरकार द्वारा उठाए गए इन बहुआयामी कदमों का असर अगले 7 से 12 दिनों के भीतर खुदरा बाजारों में दिखाई देने लगेगा। 'कांदा एक्सप्रेस' ट्रेनों के जरिए नासिक से प्याज के रैक प्रमुख उत्तर और दक्षिण भारतीय टर्मिनलों पर उतरते ही थोक मंडियों में सप्लाई बढ़ जाएगी, जिससे खुदरा में प्याज के दाम 15 से 20 रुपये गिरकर 35 से 40 रुपये प्रति किलो के सामान्य स्तर पर लौटने की उम्मीद है।

वहीं ब्राजील से आयातित कच्ची चीनी के भारतीय बंदरगाहों पर पहुंचने और मिलों की स्टॉक सीमा की कड़ाई से निगरानी होने के बाद सटोरियों का दबाव टूटेगा। इससे त्योहारी सीजन के पीक (सितंबर-अक्टूबर) में चीनी के दाम भी 71 रुपये के उच्च स्तर से घटकर 45 से 48 रुपये प्रति किलो के दायरे में वापस आने की पूरी संभावना है। सरकार के इन संयुक्त कदमों से त्योहारी मिठास के फीके पड़ने का डर दूर होने और आम जनता को महंगाई के इस दोहरे वार से बड़ी राहत मिलने की उम्मीद जगी है।