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August 24 2026 05:18 pm

अमेरिकी डी-डे प्लान से भड़का ईरान: फारस की खाड़ी से एक बूंद तेल भी बाहर नहीं जाने देंगे

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अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट द्वारा ईरान के खिलाफ अब तक के सबसे बड़े आर्थिक प्रतिबंधों और 'इकोनॉमिक डी-डे' की घोषणा किए जाने के बाद तेहरान ने बेहद कड़ा रुख अपनाया है। ईरान ने चेतावनी दी है कि यदि यह आर्थिक युद्ध जारी रहा, तो फारस की खाड़ी से कच्चे तेल का निर्यात पूरी तरह ठप कर दिया जाएगा।

ईरान की कड़ी चेतावनी: एक बूंद तेल भी नहीं निकलेगा बाहर

ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव मोहसिन रजाई ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अमेरिका के इस कदम का मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया, "अगर यह आर्थिक युद्ध जारी रहा, तो ना सिर्फ स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz), बल्कि फारस की खाड़ी में कहीं से भी एक बूंद तेल का निर्यात नहीं होने दिया जाएगा।" रजाई ने यह भी चेतावनी दी कि जो भी देश ईरानी जनता के खिलाफ अमेरिका के इस आर्थिक प्रतिबंध अभियान में हिस्सा लेगा या उसका समर्थन करेगा, उसे ईरान के खिलाफ 'युद्ध की कार्रवाई' माना जाएगा।

क्या है अमेरिका का 'इकोनॉमिक डी-डे'?

इससे पहले अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने घोषणा की थी कि अमेरिका ईरान पर अब तक का सबसे बड़ा वित्तीय और आर्थिक हमला शुरू करने जा रहा है। बेसेंट ने बयान जारी कर कहा कि यह संघर्ष अब अपने निर्णायक दौर में पहुंच गया है और 'इकोनॉमिक डी-डे' की शुरुआत होने वाली है। अमेरिका का मुख्य उद्देश्य ईरानी शासन को वित्तीय रूप से अलग-थलग करना और उनकी हर उस आर्थिक जीवनरेखा को काटना है जो उन्हें समर्थन दे रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी ट्रुथ सोशल पर चेतावनी दी थी कि ईरान के साथ व्यापार करने वाले और उसकी मदद करने वाले सभी देशों को गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर गहराया संकट

गौरतलब है कि दोनों देशों के बीच टकराव के चलते दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जहाजों की आवाजाही पहले से ही प्रभावित और ठप पड़ी है। ईरान का कहना है कि जब तक अमेरिका अपनी नाकाबंदी नहीं हटाता, जब्त ईरानी संपत्तियों को आजाद नहीं करता और प्रतिबंधों में ढील नहीं देता, तब तक इस जलमार्ग को सामान्य रूप से संचालित नहीं होने दिया जाएगा। इस बीच, खाड़ी क्षेत्र में कूटनीतिक और सैन्य हलचल काफी तेज हो गई है।