ईरान को हराना हुआ नामुमकिन? अमेरिका से जारी महायुद्ध के बीच हाथ लगा अरबों का खजाना, एनर्जी सेक्टर को मिली ऐतिहासिक मजबूती
अंतरराष्ट्रीय भू-राजनीतिक पटल पर अमेरिका और इजरायल के साथ चल रहे कड़े संघर्ष और आर्थिक प्रतिबंधों के बीच ईरान ने ऊर्जा क्षेत्र में एक बहुत बड़ी कामयाबी हासिल की है। पश्चिमी देशों के दबाव और सैन्य हमलों से जूझ रहे तेहरान के हाथ एक ऐसा खजाना लगा है, जो भविष्य के समीकरण पूरी तरह बदल सकता है। इस नई ऊर्जा खोज ने वैश्विक बाजार में एक बार फिर हलचल तेज कर दी है।
दक्षिणी फारस प्रांत में मिला विशाल प्राकृतिक गैस भंडार
ईरान के दक्षिणी फारस (Fars) प्रांत में 212 अरब घन मीटर यानी 7.5 ट्रिलियन क्यूबिक फीट से अधिक के प्राकृतिक गैस भंडार की खोज हुई है। देश के तेल मंत्री मोहसेन पाकनेजाद ने राष्ट्रीय टेलीविजन पर इसकी आधिकारिक जानकारी दी है। इस खोजे गए कुल भंडार में से लगभग 160 अरब घन मीटर यानी 5.7 ट्रिलियन क्यूबिक फीट गैस की आसानी से रिकवरी की जा सकती है। यह नया भंडार ईरान की भावी ऊर्जा सुरक्षा के लिए बेहद अहम माना जा रहा है। अधिकारियों के मुताबिक, यह "स्वीट" प्राकृतिक गैस है, जिसमें हाइड्रोजन सल्फाइड की मात्रा न के बराबर है, जिससे इसकी रिफाइनिंग और रिकवरी की लागत काफी कम आएगी। क्षमता के मामले में यह खोज प्रसिद्ध साउथ पार्स गैस क्षेत्र के एक पूरे ब्लॉक के बराबर है, जो लगभग 15 वर्षों तक लगातार गैस की सप्लाई कर सकता है।
अमेरिका के साथ संघर्ष और आर्थिक मोर्चे पर बढ़ती टेंशन
भले ही ईरान दुनिया के सबसे बड़े ऊर्जा भंडारों वाले देशों में शुमार है, लेकिन इस नई खोज मात्र से अमेरिका के साथ जारी तनाव रातों-रात खत्म होना आसान नहीं है। अमेरिकी पाबंदियों और वित्तीय रुकावटों के कारण इस गैस को व्यावसायिक रूप से निकालकर रिफाइनरियों तक पहुंचाने के लिए भारी भरकम विदेशी निवेश और आधुनिक तकनीक की सख्त जरूरत होगी। इसके अलावा, पिछले कुछ समय में हुए सैन्य हमलों की वजह से देश के एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर को भारी नुकसान भी पहुंचा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान की मदद करने वाले देशों के खिलाफ अब तक के सबसे बड़े आर्थिक अभियान यानी "ECONOMIC D-DAY" के ऐलान के बाद दोनों देशों के बीच जुबानी जंग अपने चरम पर पहुंच गई है।