चंद्र ग्रहण के बाद घर की सफाई क्यों मानी जाती है जरूरी? जानिए इसके पीछे का धार्मिक और वैज्ञानिक रहस्य
वैदिक पंचांग के अनुसार, इस साल सावन पूर्णिमा यानी रक्षाबंधन के पावन पर्व पर चंद्र ग्रहण (Lunar Eclipse 2026) का साया रहेगा। हालांकि, यह ग्रहण भारत में अदृश्य रहेगा, जिसके कारण इसका सूतक काल मान्य नहीं होगा। इसके बावजूद सनातन धर्म में ग्रहण काल और उसके समापन को लेकर कई नियम बताए गए हैं। इनमें ग्रहण के तुरंत बाद घर और मंदिर की विशेष साफ-सफाई करना बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। आइए जानते हैं कि ग्रहण समाप्त होने के बाद घर की शुद्धि क्यों जरूरी है।
नकारात्मक ऊर्जा को दूर करना
धार्मिक मान्यताओं और ज्योतिषीय दृष्टिकोण के अनुसार, चंद्र ग्रहण के दौरान वातावरण में नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव काफी बढ़ जाता है। इसी नकारात्मकता के प्रभाव को समाप्त करने के लिए ग्रहण के बाद स्नान करने की परंपरा है। ऐसा माना जाता है कि स्नान के जल में गंगाजल मिलाकर नहाने से ग्रहण का नकारात्मक असर खत्म हो जाता है। इसके साथ ही पूरे घर और पूजा स्थल की विशेष सफाई कर वहां गंगाजल का छिड़काव किया जाता है, जिससे घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। शुद्धि के बाद ही देवी-देवताओं की पूजा-अर्चना और दान-पुण्य किया जाता है।
मंदिर के कपाट खोलना और मूर्तियों का अभिषेक
सूतक काल और ग्रहण के दौरान भोजन पकाने, खाने तथा भगवान की पूजा-पाठ करने की सख्त मनाही होती है। यही वजह है कि ग्रहण शुरू होने से पहले मंदिरों के कपाट बंद कर दिए जाते हैं, ताकि नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव मूर्तियों पर न पड़े। ग्रहण समाप्त होने और घर की साफ-सफाई पूरी होने के बाद मंदिर के कपाट दोबारा खोले जाते हैं। इसके बाद देवी-देवताओं की मूर्तियों का पवित्र जल व गंगाजल से अभिषेक किया जाता है और उनका विधि-विधान से पूजन किया जाता है।