रक्षाबंधन के दिन पीरियड्स आने पर क्या करें? जानिए राखी बांधने से जुड़े नियम और धार्मिक मान्यताएं
भाई-बहन के अटूट प्रेम, विश्वास और रक्षा के संकल्प का प्रतीक पर्व रक्षाबंधन हर साल उत्साह के साथ मनाया जाता है। महिलाएं और बहनें इस खास दिन का महीनों इंतजार करती हैं। हालांकि, कई बार ऐसा भी होता है कि त्योहार के दिन ही महिलाओं को पीरियड्स (मासिक धर्म) शुरू हो जाते हैं। ऐसे में अक्सर बहनों के मन में यह उलझन रहती है कि क्या वे इस अवस्था में अपने भाई को राखी बांध सकती हैं या नहीं? आइए जानते हैं इससे जुड़े धार्मिक नियमों और सही तरीकों के बारे में।
धार्मिक मान्यता और पूजा-पाठ से जुड़े नियम
सनातन परंपरा और शास्त्रों में मासिक धर्म को एक सामान्य और प्राकृतिक शारीरिक प्रक्रिया माना गया है। हालांकि, इस दौरान शरीर को आवश्यक विश्राम देने और ऊर्जा के संतुलन के लिए पूजा-पाठ, मंदिर जाने तथा मुख्य धार्मिक कर्मकांडों से दूरी बनाए रखने की सलाह दी जाती है।
रक्षाबंधन के दिन आमतौर पर सबसे पहले भगवान गणेश, लड्डू गोपाल या कुलदेवता को पहली राखी अर्पित की जाती है। पीरियड्स के दौरान महिलाओं को सीधे भगवान की मूर्ति को स्पर्श करने या पूजा की थाली तैयार करने से परहेज करने को कहा जाता है, क्योंकि रक्षाबंधन का मूल भाव केवल बाहरी कर्मकांड न होकर भाई-बहन के बीच का पवित्र स्नेह और सुरक्षा का संकल्प है।
पीरियड्स के दौरान राखी बांधने का आसान तरीका
यदि रक्षाबंधन के दिन आपको पीरियड्स हैं, तो आपको निराश होने या मायूस होने की बिल्कुल आवश्यकता नहीं है। आप कुछ आसान और व्यावहारिक तरीकों को अपनाकर अपने भाई की कलाई पर सूत या रेशम का धागा बांध सकती हैं:
पूजा की थाली किसी और से तैयार करवाएं: पूजा की थाली सजाने, दीपक प्रज्वलित करने और भगवान को पहली राखी अर्पित करने का कार्य घर की किसी अन्य महिला सदस्य (जैसे मां, भाभी या बहन) से करवा लें।
स्वच्छता का रखें विशेष ध्यान: स्नान करके साफ-सुथरे वस्त्र धारण करें और अपने मन में सकारात्मक तथा प्रसन्न भाव रखें।
सीधे भाई को बांधें राखी: आप स्वयं अपने हाथों से भाई के माथे पर रोली और चावल का टीका लगा सकती हैं और उसकी कलाई पर प्यार से राखी बांध सकती हैं।
मिठाई खिलाकर दें आशीर्वाद: आप अपने हाथों से भाई को मिठाई खिला सकती हैं और उससे रक्षा का वचन व आशीर्वाद प्राप्त कर सकती हैं।
बदलती सोच और विद्वानों की राय
आज के समय में अधिकांश समाजशास्त्रियों और विद्वानों का यह मानना है कि मासिक धर्म पूरी तरह से एक प्राकृतिक शारीरिक प्रक्रिया है, न कि कोई अशुद्धता। प्राचीन काल में महिलाओं को इस दौरान होने वाले शारीरिक दर्द, कमजोरी और थकान से राहत देने के लिए भारी कामकाज और धार्मिक आयोजनों से अलग रखा जाता था।
रक्षाबंधन का त्योहार पूरी तरह से भाई के प्रति बहन के मंगल भाव और उसकी दीर्घायु की कामना पर आधारित है। यदि आपके मन में भाई के लिए शुद्ध प्रेम और शुभकामनाएं हैं, तो राखी बांधने में कोई बाधा नहीं आती। आप मुख्य देव-पूजा से थोड़ा परहेज करते हुए बाकी सभी पारिवारिक रस्में और उल्लास पूरी खुशी के साथ निभा सकती हैं।