'38 बार कर चुके डील डन का दावा, पर नतीजा शून्य' ट्रंप के 'शांति समझौते' वाले बयानों के पीछे छिपी है बड़ी अंतरराष्ट्रीय चाल
वॉशिंगटन/तेहरान: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पिछले तीन महीनों से लगातार दुनिया को यह भरोसा दिला रहे हैं कि अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध समाप्त करने वाली 'ऐतिहासिक कूटनीतिक डील' बस होने ही वाली है। लेकिन जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल उलट है। एक चौंकाने वाली रिपोर्ट के मुताबिक, मार्च 2026 से लेकर अब तक राष्ट्रपति ट्रंप अलग-अलग मंचों से कम से कम 38 बार 'डील डन' (समझौता पक्का) होने का दावा कर चुके हैं, मगर आज तक कोई भी अंतिम समझौता कागजों पर नहीं उतर सका है। अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकारों का मानना है कि ट्रंप के इन बार-बार बदलने वाले बयानों और असफल भविष्यवाणियों के पीछे एक बहुत सोची-समझी रणनीतिक चाल और आर्थिक खेल छिपा हुआ है।
एयरफोर्स वन से शुरू हुआ दावों का सिलसिला, 38 बार टूटी उम्मीद
इस पूरे घटनाक्रम की शुरुआत 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए भीषण हवाई हमलों के बाद हुई थी। इसके बाद 23 मार्च को राष्ट्रपति के विशेष विमान 'एयर फोर्स वन' में सवार ट्रंप ने पत्रकारों से कहा था, "दोनों देशों के बीच समझौते के मुख्य बिंदुओं (Major Points of Agreement) पर सहमति बन चुकी है।" हालांकि, ईरान ने तुरंत अमेरिका के इस दावे को खारिज करते हुए किसी भी तरह की अंतिम वार्ता से साफ इनकार कर दिया था।
इसके बाद ट्रंप के बयानों का एक तय पैटर्न देखने को मिला:
7 अप्रैल: ट्रंप ने अचानक सीजफायर (युद्ध विराम) की घोषणा करते हुए कहा कि दोनों पक्ष बेहद आगे बढ़ चुके हैं और महज दो हफ्तों में एग्रीमेंट फाइनल हो जाएगा। लेकिन कुछ नहीं हुआ।
15-17 अप्रैल: उन्होंने फिर दावा किया कि ईरान अमेरिका की सब शर्तें मान चुका है और डील बहुत शानदार दिख रही है।
7 मई: ट्रंप ने वैश्विक मंच पर कहा कि समझौता किसी भी दिन हो सकता है, ईरान डील के लिए पूरी तरह बेताब है।
चेतावनी का खेल: जब भी बातचीत अटकती, ट्रंप आक्रामक हो जाते और ईरान को धमकी देते कि अगर डील नहीं हुई तो उसके पावर प्लांट्स को नेस्तनाबूद कर दिया जाएगा।
हाल ही में 11 जून को उन्होंने एक बार फिर प्लान्ड सैन्य स्ट्राइक्स को रोकने और एक 'ग्रेट सेटलमेंट' की बात कही। उन्होंने दावा किया कि इस वीकेंड पर यूरोप में समझौते पर हस्ताक्षर होंगे और अमेरिका की तरफ से उपराष्ट्रपति जेडी वेंस इसमें शामिल होंगे। लेकिन हर बार की तरह ईरान के विदेश मंत्रालय ने इस बार भी अमेरिकी दावों को 'झूठा' बताते हुए कहा कि अमेरिका की अत्यधिक मांगों और नई शर्तों के कारण अभी कुछ भी फाइनल नहीं हुआ है।
एक तीर से दो निशाने: क्यों अलग-अलग ऑडियंस को गुमराह कर रहे हैं ट्रंप?
ग्लोबल डिप्लोमेसी और रणनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार, ट्रंप का यह रवैया कोई भूल या जल्दबाजी नहीं, बल्कि एक सोची-समझी 'साइकोलॉजिकल वॉरफेयर' (मनोवैज्ञानिक युद्ध) रणनीति का हिस्सा है। ट्रंप एक साथ दो अलग-अलग मोर्चों को साध रहे हैं:
1. पेट्रोलियम मार्केट को शांत रखना: जैसे ही खाड़ी क्षेत्र (Gulf Region) में युद्ध की आहट तेज होती है, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें आसमान छूने लगती हैं। ट्रंप लगातार 'डील होने वाली है' का बयान देकर वैश्विक तेल बाजार और शेयर मार्केट को क्रैश होने से बचा रहे हैं।
2. ईरान पर लगातार दबाव बनाए रखना: बार-बार समझौते की बात करके ट्रंप वैश्विक समुदाय के सामने खुद को शांतिदूत और ईरान को एक अड़ियल देश के रूप में पेश कर रहे हैं। इससे ईरान पर कूटनीतिक और आर्थिक दबाव लगातार बना हुआ है।
शहबाज शरीफ की मध्यस्थता और 'इंसाइडर ट्रेडिंग' का बड़ा संदेह
इस हाई-प्रोफाइल कूटनीति के बीच पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ लगातार मध्यस्थता की कोशिशों में जुटे हैं। पीएम शरीफ ने सोशल मीडिया पर 'फाइनल एग्रीड टेक्स्ट' (अंतिम सहमत मसौदे) पर पहुंचने का दावा भी किया था, लेकिन हकीकत यह है कि शुक्रवार बीत जाने के बाद भी दोनों देशों के प्रतिनिधियों ने पेन को कागज पर नहीं छुआ है। ट्रंप की इस 38वीं या 39वीं असफल भविष्यवाणी ने अब एक नए विवाद को जन्म दे दिया है।
अंतरराष्ट्रीय वित्तीय बाजार के विश्लेषकों ने इस पूरे मामले में 'इंसाइडर ट्रेडिंग' (गोपनीय जानकारी के दम पर बाजार में मुनाफाखोरी) का बड़ा संदेह जताया है। रिपोर्टों के अनुसार, जब भी राष्ट्रपति ट्रंप सोशल मीडिया या मीडिया के सामने 'डील होने' या 'स्ट्राइक रोकने' का बड़ा एलान करने वाले होते हैं, उससे ठीक पहले ऑयल मार्केट्स और स्टॉक फ्यूचर्स में बड़े पैमाने पर 'शॉर्ट बेट्स' (बाजार गिरने या संभलने पर लगाए जाने वाले दांव) देखे गए। इस रहस्यमयी पैटर्न की वजह से कुछ चुनिंदा बड़े ट्रेडर्स को रातों-रात करोड़ों डॉलर का मुनाफा हुआ है, जिसने ट्रंप के इन बयानों के पीछे के असली मकसद पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।