ट्रंप के बर्थडे पर व्हाइट हाउस को दहलाने की साजिश नाकाम: बारूद से लदे ड्रोन और स्नाइपर्स के साथ हमला करने वाले थे 5 आतंकी
अमेरिकी खुफिया एजेंसी एफबीआई (FBI) ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की हत्या और पूरे व्हाइट हाउस को बारूद से उड़ाने की एक बेहद सनसनीखेज और खौफनाक साजिश का पर्दाफाश किया है। डोनाल्ड ट्रंप के 80वें जन्मदिन के ऐतिहासिक मौके पर जब व्हाइट हाउस में हाई-प्रोफाइल UFC केज-फाइटिंग शो का आयोजन हो रहा था, ठीक उसी वक्त इस बड़े आतंकी हमले को अंजाम देने का प्लान था। हालांकि, समय रहते एफबीआई ने मुस्तैदी दिखाते हुए इस पूरी साजिश को नाकाम कर दिया और देश के अलग-अलग राज्यों से 5 मुख्य संदिग्धों को गिरफ्तार कर लिया है।
पहले ड्रोन ब्लास्ट, फिर भागती भीड़ पर स्नाइपर्स से अंधाधुंध फायरिंग का था प्लान
अमेरिकी अदालत में पेश किए गए खुफिया दस्तावेजों के मुताबिक, हमलावरों ने बेहद शातिर और खूनी ब्लूप्रिंट तैयार किया था:
ड्रोन हमला: सबसे पहले व्हाइट हाउस के उत्तरी हिस्से (North Lawn) पर बारूद और घातक विस्फोटकों से लैस कई ड्रोनों से हमला करना था, ताकि वहां मौजूद वीआईपी (VIPs) और मेहमानों में भगदड़ मच जाए।
स्नाइपर्स अटैक: जैसे ही धमाकों के बाद लोग और राजनेता जान बचाकर बाहर की तरफ भागते, पहले से ही रणनीतिक ठिकानों पर घात लगाकर बैठे स्नाइपर्स उन पर अंधाधुंध गोलियां बरसाना शुरू कर देते।
व्हाइट हाउस पर धावा: इस चौतरफा तबाही और अफरा-तफरी के बीच हमलावरों का आखिरी प्लान व्हाइट हाउस के मुख्य द्वारों को तोड़कर भीतर घुसने का था।
टेस्ला के एलन मस्क और नेतन्याहू भी थे हिटलिस्ट में शामिल
जांच अधिकारियों ने गिरफ्तार संदिग्धों के पास से अत्याधुनिक असॉल्ट राइफलें, भारी मात्रा में गोला-बारूद और विस्फोटक बरामद किए हैं। इसके अलावा लगभग 20 आतंकियों के बीच हुई एन्क्रिप्टेड चैट (Encrypted Chats) को भी डीकोड किया गया है, जिसमें व्हाइट हाउस के नक्शे, सेफ हाउस के गुप्त ठिकाने और भागने के रास्तों का पूरा ब्योरा था।
हैरान करने वाली बात यह है कि इस आतंकी गुट के निशाने पर सिर्फ राष्ट्रपति ट्रंप ही नहीं थे। उनकी सीक्रेट हिटलिस्ट में निम्नलिखित बड़े नाम भी शामिल थे:
जेडी वेंस (अमेरिकी उपराष्ट्रपति)
बेंजामिन नेतन्याहू (इजरायली प्रधानमंत्री)
एलन मस्क (टेस्ला और 'एक्स' के सीईओ)
इजरायल का खुलकर समर्थन करने वाले कई दिग्गज अमेरिकी सांसद।
जेफ्री एपस्टीन केस की फाइलों को लेकर था भारी गुस्सा
शुरुआती पूछताछ में यह बात सामने आई है कि यह आतंकी ग्रुप अमेरिकी सरकार में कथित भ्रष्टाचार, विशाल डेटा सेंटर्स की सुरक्षा और कुख्यात सेक्स क्रिमिनल जेफ्री एपस्टीन (Jeffrey Epstein) से जुड़ी फाइलों को दबाए जाने को लेकर बेहद गुस्से में था। इन कट्टरपंथियों का मानना था कि एपस्टीन के काले कारनामों से जुड़े लोगों को देश की सत्ता में रहने का कोई अधिकार नहीं है और वे पूरी व्यवस्था को खत्म करना चाहते थे।
एक मां के फोन कॉल से हुआ इस सदी की सबसे बड़ी साजिश का पर्दाफाश
इस खौफनाक साजिश के फैलने की पहली भनक 10 जून को लगी, और इसका पूरा श्रेय एक जागरूक मां को जाता है। एक महिला ने स्थानीय पुलिस को फोन कर शिकायत दर्ज कराई कि उसका 19 वर्षीय बेटा टाइसेन प्रॉपर अचानक घर में भारी मात्रा में खतरनाक हथियार और गोला-बारूद जमा कर रहा है, साथ ही इंटरनेट पर उसकी गतिविधियां बेहद संदिग्ध हैं। पुलिस ने बिना देरी किए जब टाइसेन को हिरासत में लेकर कड़ाई से पूछताछ की, तो उसने इस पूरी अंतरराष्ट्रीय साजिश का सच उगल दिया, जिसके बाद एफबीआई ने छापेमारी कर बाकी 4 साथियों को भी दबोच लिया।