यूपी के ग्रामीण इलाकों के लिए बड़ी राहत: अब PHC और CHC पर ही होगा दिल के मरीजों का आपातकालीन इलाज
उत्तर प्रदेश के ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले करोड़ों लोगों के लिए स्वास्थ्य क्षेत्र से एक बहुत बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। अक्सर देखा जाता है कि गांवों या छोटे कस्बों में अचानक दिल का दौरा (हार्ट अटैक) पड़ने पर मरीजों को बड़े शहरों के सुपर स्पेशियलिटी अस्पतालों तक ले जाने में घंटों लग जाते हैं। रास्ते में होने वाली इसी देरी के कारण कई मरीज अस्पताल पहुंचने से पहले ही दम तोड़ देते हैं। इस गंभीर समस्या को दूर करने के लिए योगी आदित्यनाथ सरकार और उत्तर प्रदेश स्वास्थ्य विभाग ने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHC) और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHC) के स्तर पर ही दिल के मरीजों के त्वरित और प्राथमिक इलाज की व्यवस्था लागू कर दी है।
अब यदि ग्रामीण इलाके में किसी व्यक्ति को सीने में तेज दर्द या हार्ट अटैक के लक्षण महसूस होते हैं, तो उसे तुरंत निकटतम पीएचसी या सीएचसी ले जाया जा सकता है, जहां उसका न केवल तुरंत ईसीजी (ECG) किया जाएगा, बल्कि दिल की बंद धमनियों के थक्के को घोलने वाला अत्यंत महंगा इंजेक्शन भी बिल्कुल मुफ्त लगाया जाएगा। इस व्यवस्था से प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में हृदय रोगों से होने वाली मौतों के आंकड़ों में भारी कमी आने की उम्मीद जताई जा रही है।
हार्ट अटैक के 'गोल्डन आवर' में मिलेगा जीवनदान: जानिए कैसे काम करेगा हब-एंड-स्पोक मॉडल
चिकित्सा विज्ञान में हार्ट अटैक आने के बाद के शुरुआती 60 से 90 मिनट को 'गोल्डन आवर' (Golden Hour) कहा जाता है। यदि इस अवधि के भीतर मरीज को सही प्राथमिक इलाज और रक्त का थक्का घोलने वाली दवा मिल जाए, तो हृदय की मांसपेशियों को स्थायी नुकसान होने से बचाया जा सकता है और मरीज की जान बचने की संभावना 90 प्रतिशत तक बढ़ जाती है। इसी सिद्धांत को ध्यान में रखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने 'स्टेमी केयर प्रोग्राम' (STEMI Care Project) को राज्य स्तर पर लागू किया है।
यह पूरा नेटवर्क 'हब एंड स्पोक मॉडल' (Hub-and-Spoke Model) पर आधारित है। इसमें राजधानी लखनऊ के संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (SGPGI), केजीएमयू (KGMU), डॉ. राम मनोहर लोहिया संस्थान, बीएचयू वाराणसी, सैफई आयुर्विज्ञान संस्थान और एएमयू अलीगढ़ जैसे बड़े सुपर-स्पेशियलिटी चिकित्सा संस्थानों को 'हब' (Hub) बनाया गया है। वहीं, जिलों के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHC) और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHC) को 'स्पोक' (Spoke) के रूप में जोड़ा गया है।
जब कोई मरीज ग्रामीण सीएचसी या पीएचसी पहुंचता है, तो वहां मौजूद प्रशिक्षित डॉक्टर या पैरामेडिकल स्टाफ तत्काल डिजिटल मशीन से मरीज का ईसीजी करते हैं। इस ईसीजी रिपोर्ट को 'टेली-ईसीजी' तकनीक के माध्यम से तुरंत हब अस्पताल (जैसे एसजीपीजीआई या केजीएमयू) के कार्डियोलॉजी विभाग के विशेषज्ञ डॉक्टरों के पास डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भेजा जाता है। हब अस्पताल के वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ कुछ ही मिनटों में रिपोर्ट का विश्लेषण करके यह पुष्टि करते हैं कि मरीज को गंभीर हार्ट अटैक (STEMI) आया है या नहीं।
पुष्टि होते ही विशेषज्ञ डॉक्टर सीएचसी/पीएचसी के मेडिकल ऑफिसर को फोन या मैसेज पर तुरंत क्लॉट-बस्टर इंजेक्शन देने का निर्देश देते हैं। इस पूरी प्रक्रिया में महज 10 से 15 मिनट का समय लगता है, जिससे मरीज को अपने ही गांव के पास के केंद्र पर विशेषज्ञ स्तर की सलाह और जीवन रक्षक दवा मिल जाती है।
40 हजार रुपये का इंजेक्शन सरकारी केंद्रों पर बिल्कुल फ्री
हार्ट अटैक के दौरान खून का थक्का जमने से रोकने और बंद नसों को तुरंत खोलने के लिए 'टेनेक्टेप्लाज' (Tenecteplase) या 'स्ट्रेप्टोकाइनेज' (Streptokinase) जैसे थ्रोम्बोलाइटिक इंजेक्शनों का उपयोग किया जाता है। बाजार में इन इंजेक्शनों की कीमत 25,000 रुपये से लेकर 40,000 रुपये तक होती है, जिसे खरीद पाना किसी भी गरीब या मध्यमवर्गीय ग्रामीण परिवार के लिए अत्यंत कठिन होता है।
उत्तर प्रदेश के उप-मुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक के निर्देशों के अनुसार, राज्य सरकार ने इन महंगे और जीवनरक्षक इंजेक्शनों की उपलब्धता प्रदेश की सभी सक्षम सीएचसी और जिला अस्पतालों के इमरजेंसी वार्डों में सुनिश्चित करा दी है। ग्रामीण मरीजों को यह लाइफ-सेविंग इंजेक्शन बिना एक भी रुपया खर्च किए पूरी तरह निशुल्क लगाया जाएगा। प्राथमिक केंद्र पर यह इंजेक्शन लगने के बाद जब मरीज की स्थिति स्थिर हो जाती है, तो उसे 108 एम्बुलेंस या एडवांस लाइफ सपोर्ट (ALS) एम्बुलेंस के जरिए आगे की एंजियोप्लास्टी या विस्तृत जांच के लिए बड़े हब अस्पताल में सुरक्षित रेफर कर दिया जाता है।
ग्रामीण डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ को विशेष प्रशिक्षण
इस योजना को धरातल पर पारदर्शी और प्रभावी तरीके से संचालित करने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने राज्य भर के सीएचसी और पीएचसी में तैनात चिकित्सा अधिकारियों (MOs), कैजुअल्टी डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ को विशेष प्रशिक्षण दिया है। डॉक्टरों को बेसिक लाइफ सपोर्ट (BLS), एडवांस कार्डिएक लाइफ सपोर्ट (ACLS) और स्टेमी प्रोटोकॉल के तहत ईसीजी पढ़ने व समय पर सही डोज का इंजेक्शन देने का व्यावहारिक अभ्यास कराया गया है।
इसके साथ ही, सभी जिलों के मुख्य चिकित्सा अधिकारियों (CMO) को कड़े निर्देश जारी किए गए हैं कि वे अपने-अपने क्षेत्र के स्वास्थ्य केंद्रों पर ईसीजी मशीनों, इंटरनेट कनेक्टिविटी और कोल्ड-चेन में रखे जाने वाले टेनेक्टेप्लाज इंजेक्शन के स्टॉक की निरंतर निगरानी करें।
उत्तर प्रदेश सरकार की इस दूरदर्शी पहल से राज्य के दूरदराज के गांवों में रहने वाले आम नागरिकों को अब हृदय रोगों के आपातकालीन इलाज के लिए भटकना नहीं पड़ेगा। 'समय पर जांच और त्वरित मुफ्त इलाज' का यह मॉडल आने वाले समय में हजारों-लाखों बेकसूर जिंदगियों को अकाल मृत्यु से बचाने में गेम-चेंजर साबित होगा।