अमेरिका का सनसनीखेज खुलासा: ईरान पर 2000 मिसाइलें दागने के लिए पेंटागन ने किया एलन मस्क के Grok AI का इस्तेमाल
वैश्विक युद्ध नीति और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के तालमेल को लेकर एक बेहद चौंकाने वाली खबर सामने आई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने पहली बार आधिकारिक तौर पर यह स्वीकार किया है कि अमेरिकी सेना ने ईरान के खिलाफ जारी सैन्य अभियानों में एलन मस्क के एआई चैटबॉट 'ग्रोक' (Grok AI) का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया है। 'द इंडिपेंडेंट' की एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, पेंटागन ने कोर्ट में यह माना है कि ईरान पर हजारों मिसाइलें दागने और सैन्य ठिकानों को टारगेट करने में ग्रॉक एआई की मदद ली गई थी।
अदालत में पेंटागन ने खुद खोला 'टॉप सीक्रेट' राज
इस बेहद गुप्त और संवेदनशील मिशन की जानकारी किसी प्रेस कॉन्फ्रेंस में नहीं, बल्कि अमेरिकी अदालत में चल रहे एक मुकदमे के दौरान सामने आई। दरअसल, एलन मस्क की एआई कंपनी (xAI) पर डेटा सेंटर्स से प्रदूषण फैलाने के आरोपों को लेकर एक कानूनी केस चल रहा है। मस्क की कंपनी का अदालती कार्रवाई से बचाव करने के लिए पेंटागन के शीर्ष डिजिटल और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस प्रमुख कैमरन स्टेनली ने खुद एक शपथ पत्र (Affidavit) दाखिल किया, जिसमें उन्होंने ग्रॉक को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अपरिहार्य बताया।
96 घंटों में 2,000 ठिकानों को एआई ने किया टारगेट
पेंटागन के अधिकारी कैमरन स्टेनली ने कोर्ट फाइलिंग में बताया कि xAI का जेनेरेटिव चैटबॉट 'ग्रोक' उन चार चुनिंदा एआई मॉडल्स में शामिल है, जिन्हें अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियों की विशिष्ट और गोपनीय आवश्यकताओं के लिए डिजाइन किया गया है।
"इस चैटबॉट का बिना किसी रुकावट के लगातार काम करते रहना सीधे तौर पर अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा मामला है। हाल ही में युद्ध के दौरान महज 96 घंटों के भीतर 2,000 अलग-अलग ईरानी ठिकानों पर सटीक मिसाइलें दागने और लाइव टारगेटिंग के लिए इसी चैटबॉट का इस्तेमाल किया गया था।" — कैमरन स्टेनली, पेंटागन अधिकारी
ईरानी स्कूल पर हमले और 150 बच्चों की मौत से जुड़े तार
ग्रॉक एआई के इस्तेमाल का यह सनसनीखेज खुलासा ऐसे समय में हुआ है जब ईरान के मीनाब शहर में एक लड़कियों के स्कूल पर अमेरिकी बमबारी को लेकर दुनिया भर में थू-थू हो रही है। इस भयानक हमले में कम से कम 150 मासूम बच्चों की मौत हो गई थी। रक्षा और सैन्य विश्लेषकों का मानना है कि मीनाब स्कूल पर हुई इस घातक बमबारी के पीछे पेंटागन के इसी 'एआई-संचालित टारगेटिंग सिस्टम' (AI-powered targeting) की एक बड़ी तकनीकी चूक या गलत डेटा एनालिसिस जिम्मेदार था। इस घटना के बाद से ही युद्ध में एआई के अंधाधुंध इस्तेमाल पर वैश्विक स्तर पर सवाल उठ रहे हैं।
ग्लोबल वॉरफेयर में तेजी से पैर पसार रहा है AI
आधुनिक सैन्य विज्ञान में अब सैनिकों से ज्यादा कंप्यूटर एल्गोरिदम और एआई का बोलबाला बढ़ता जा रहा है। अमेरिका इस तकनीक का इस्तेमाल करने वाला अकेला देश नहीं है। इससे पहले इजरायली रक्षा बलों (IDF) ने भी गाजा पट्टी में हमास के लड़ाकों की पहचान करने, खुफिया ठिकाने खोजने और बंधकों की लाइव लोकेशन का पता लगाने के लिए बड़े पैमाने पर स्वदेशी एआई टूल्स का उपयोग किया था। हालांकि, एआई की एक छोटी सी कोडिंग गलती या गलत डेटा इनपुट किस तरह सैकड़ों मासूमों की कब्र खोद सकता है, होर्मुज और मीनाब के हालिया हालात इसके सबसे बड़े गवाह हैं।