US-Iran Deal: अमेरिका-ईरान ऐतिहासिक समझौते का 'फुल टेक्स्ट' जारी, जानें वो 14 अहम पॉइंट्स जिन्होंने बदल दी दुनिया की कूटनीति
वाशिंगटन/नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच पिछले कई दिनों से चले आ रहे भारी सस्पेंस, कूटनीतिक तनाव और अनिश्चय का आखिरकार अंत हो गया है। अमेरिकी सरकार ने ईरान के साथ तय हुए ऐतिहासिक 14 सूत्रीय समझौते का पूरा मसौदा (फुल टेक्स्ट) आधिकारिक तौर पर सार्वजनिक कर दिया है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा बीते रविवार को इस समझौते की घोषणा की गई थी, जिसके बाद वैश्विक स्तर पर दस्तावेज देखने का दबाव बढ़ रहा था। अमेरिकी अधिकारियों ने एक विशेष कॉन्फ्रेंस कॉल के जरिए इस समझौता ज्ञापन को पढ़कर सुनाया। इस ऐतिहासिक दस्तावेज का औपचारिक शीर्षक ‘संयुक्त राज्य अमेरिका और इस्लामी गणराज्य ईरान के बीच इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन’ रखा गया है।
इस मसौदे पर आगामी शुक्रवार को दोनों देशों के बीच औपचारिक हस्ताक्षर होने की पूरी संभावना है। हस्ताक्षर के तुरंत बाद दोनों देशों को व्यापक और अंतिम समझौते की शर्तों को तय करने के लिए 60 दिनों का समय मिलेगा। हालांकि, ईरान की तरफ से इस दस्तावेज पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
अमेरिका-ईरान समझौते (इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन) के वो 14 अहम पॉइंट्स:
अमेरिकी प्रशासन द्वारा जारी किए गए आधिकारिक मसौदे के अनुसार, इस ऐतिहासिक समझौते के 14 मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:
1. तत्काल युद्धविराम और सैन्य अभियानों की समाप्ति
अमेरिका, ईरान और इस वर्तमान संघर्ष में शामिल उनके सभी क्षेत्रीय सहयोगी इस समझौते पर हस्ताक्षर कर रहे हैं। इसके तहत लेबनान सहित सभी मोर्चों पर सैन्य अभियानों की तत्काल और स्थायी समाप्ति (सीजफायर) लागू होगी। कोई भी पक्ष एक-दूसरे के खिलाफ बल प्रयोग, सैन्य कार्रवाई या युद्ध की धमकी नहीं देगा। लेबनान की क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता की पूरी रक्षा की जाएगी।
2. संप्रभुता का सम्मान और गैर-हस्तक्षेप
दोनों देश (अमेरिका और ईरान) अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक नियमों के तहत एक-दूसरे की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का पूर्ण सम्मान करेंगे। कोई भी देश एक-दूसरे के आंतरिक मामलों में किसी भी प्रकार का राजनीतिक या सैन्य हस्तक्षेप नहीं करेगा।
3. अंतिम समझौते के लिए 60 दिनों की समय-सीमा
समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर होने के बाद दोनों पक्ष अधिकतम 60 दिनों के भीतर अंतिम और व्यापक समझौते पर बातचीत पूरी करने के लिए बाध्य होंगे। यदि आवश्यकता पड़ी, तो इस अवधि को दोनों देशों की आपसी सहमति से आगे बढ़ाया जा सकता है।
4. नौसैनिक नाकाबंदी का तत्काल हटाया जाना
जैसे ही इस समझौता ज्ञापन पर औपचारिक हस्ताक्षर होंगे, अमेरिका तुरंत ईरान के खिलाफ अपनी नौसैनिक नाकाबंदी (Naval Blockade) और सभी तरह के अवरोधों को हटाना शुरू कर देगा। 30 दिनों के भीतर इसे पूरी तरह समाप्त कर दिया जाएगा। जहाजों का आवागमन युद्ध-पूर्व स्तर पर बहाल किया जाएगा और अंतिम समझौते के 30 दिनों के भीतर अमेरिका ईरान के नजदीकी क्षेत्रों से अपनी अतिरिक्त सैन्य तैनाती भी हटा लेगा।
5. फारस की खाड़ी और होर्मुज जलडमरूमध्य में सुरक्षित आवागमन
ईरान फारस की खाड़ी (Persian Gulf) से ओमान सागर के बीच वाणिज्यिक और व्यापारिक जहाजों के सुरक्षित और मुफ्त आवागमन के लिए 60 दिनों तक हर संभव प्रयास करेगा। ईरान 30 दिनों के भीतर समुद्र में बिछाई गई सभी बारूदी सुरंगों और तकनीकी-सैन्य बाधाओं को हटाएगा। इसके अलावा, होर्मुज के भविष्य के प्रशासन के लिए ईरान ओमान सल्तनत और अन्य खाड़ी तटीय देशों के साथ अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत चर्चा करेगा।
6. ईरान के लिए $300 अरब का आर्थिक पुनर्निर्माण पैकेज
अमेरिका अपने क्षेत्रीय सहयोगी देशों के साथ मिलकर युद्ध से प्रभावित ईरान के पुनर्निर्माण और आर्थिक विकास के लिए कम से कम 300 अरब अमेरिकी डॉलर ($300 Billion) की एक विशाल और पारस्परिक सहमति वाली योजना तैयार करेगा। अंतिम समझौते के तहत 60 दिनों के भीतर इसे अंतिम रूप दिया जाएगा। इसके लिए आवश्यक सभी लाइसेंस और वित्तीय अनुमतियां अमेरिका द्वारा तुरंत दी जाएंगी।
7. ईरान पर लगे सभी प्रतिबंधों का हटाया जाना
अमेरिका संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) और आईएईए (IAEA) बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के प्रस्तावों के तहत ईरान पर लगाए गए सभी प्रकार के एकतरफा प्रतिबंधों (प्राथमिक और द्वितीयक दोनों) को पूरी तरह समाप्त करने का वचन देता है। दोनों पक्ष प्रतिबंधों को हटाने की समय-सारणी पर बातचीत के दौरान तुरंत समाधान निकालेंगे।
8. परमाणु कार्यक्रम और गैर-परमाणु हथियार की पुष्टि
ईरान ने इस दस्तावेज में स्पष्ट रूप से पुष्टि की है कि वह परमाणु हथियार न तो कभी प्राप्त करेगा और न ही उनका विकास करेगा। दोनों पक्ष वर्तमान में भंडारित संवर्धित सामग्री (Enriched Material) के निपटान के लिए आईएईए की देखरेख में एक पारदर्शी तंत्र बनाने पर सहमत हुए हैं। संवर्धन के स्तर और शांतिपूर्ण परमाणु आवश्यकताओं पर अंतिम बातचीत में विस्तृत चर्चा होगी।
9. यथास्थिति (Status Quo) बनाए रखना
जब तक दोनों देश अंतिम समझौते पर नहीं पहुंच जाते, तब तक दोनों पक्ष मौजूदा स्थिति बनाए रखेंगे। यानी, ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को वर्तमान स्तर से आगे नहीं बढ़ाएगा और बदले में अमेरिका क्षेत्र में न तो कोई नया प्रतिबंध लगाएगा और न ही अतिरिक्त सेना की तैनाती करेगा।
10. कच्चे तेल के निर्यात पर पूर्ण छूट
यह समझौता ज्ञापन लागू होते ही अमेरिकी वित्त विभाग (US Treasury) ईरानी कच्चे तेल, पेट्रोलियम उत्पादों, उससे जुड़े व्युत्पन्न पदार्थों के निर्यात और संबंधित बैंकिंग, बीमा व परिवहन सेवाओं के लिए पूर्ण छूट (Waivers) जारी कर देगा, जिससे ईरान दोबारा वैश्विक तेल बाजार में व्यापार कर सकेगा।
11. फ्रीज हुई संपत्ति और परिसंपत्तियों की रिहाई
अमेरिका द्वारा दुनिया भर में फ्रीज (प्रतिबंधित) की गई ईरान की सभी संपत्तियों और धन को पूरी तरह से मुक्त कर दिया जाएगा। ये निधियां ईरान के केंद्रीय बैंक (Central Bank of Iran) द्वारा नामित किसी भी लाभार्थी को भुगतान के लिए इस्तेमाल की जा सकेंगी और अमेरिका इसके लिए तुरंत आवश्यक लाइसेंस जारी करेगा।
12. संयुक्त निगरानी और कार्यकारी तंत्र
इस पूरे समझौता ज्ञापन के सफल कार्यान्वयन, नियमों की कड़ाई से पालना और अनुपालन की बारीकी से निगरानी करने के लिए दोनों देशों की भागीदारी वाला एक 'संयुक्त कार्यकारी तंत्र' (Joint Executive Mechanism) स्थापित किया जाएगा।
13. चरणबद्ध कार्यान्वयन (Phase-wise Implementation)
समझौते के कुछ मुख्य अनुच्छेदों (जैसे अनुच्छेद 1, 4, 5, 10 और 11) का कार्यान्वयन जैसे ही जमीन पर शुरू होगा, वैसे ही बाकी बचे हुए अनुच्छेदों पर अंतिम व्यापक समझौते की बातचीत समानांतर रूप से शुरू कर दी जाएगी।
14. संयुक्त राष्ट्र (UN) द्वारा औपचारिक अनुमोदन
दोनों देशों के बीच होने वाले इस अंतिम और व्यापक समझौते को अंतरराष्ट्रीय वैधता देने के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के एक बाध्यकारी प्रस्ताव द्वारा औपचारिक रूप से मंजूरी और सुरक्षा प्रदान की जाएगी।