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August 12 2026 11:26 am

तृणमूल कांग्रेस के महासचिव अभिषेक बनर्जी को कलकत्ता हाई कोर्ट से बड़ी राहत: 16 मामलों में गिरफ्तारी पर रोक बरकरार

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पश्चिम बंगाल की राजनीति और तृणमूल कांग्रेस (TMC) के राष्ट्रीय महासचिव व डायमंड हार्बर से सांसद अभिषेक बनर्जी के लिए न्यायपालिका के गलियारों से एक बड़ी और राहतभरी खबर सामने आई है। कलकत्ता हाई कोर्ट ने अभिषेक बनर्जी के खिलाफ राज्य के विभिन्न थानों में दर्ज कुल 16 मामलों में उनकी गिरफ्तारी और किसी भी तरह की दंडात्मक कार्रवाई पर अंतरिम रोक (Interim Protection) को फिलहाल बरकरार रखा है। न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य की एकल पीठ ने सुनवाई के दौरान यह आदेश जारी किया।

मामले की सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यद्यपि इस चरण में प्राथमिकियों (FIRs) को पूरी तरह से निरस्त (Quash) नहीं किया जा रहा है, लेकिन अगली सुनवाई तक पुलिस याचिकाकर्ता के खिलाफ कोई कड़ा कदम नहीं उठाएगी। अदालत ने पुलिस प्रशासन को कानून के मुताबिक निष्पक्षता से जांच जारी रखने की अनुमति दी है और साथ ही अभिषेक बनर्जी को भी जांच प्रक्रिया में पूर्ण सहयोग करने का निर्देश दिया है। पीठ ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि जब पहले से ही मामलों में अंतरिम संरक्षण दिया जा चुका है, तो इस मोड़ पर उसे वापस लेने का कोई तार्किक औचित्य नहीं बनता।

यह पूरा विवाद विधानसभा चुनाव के बाद दर्ज हुई शिकायतों से जुड़ा है। सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य ने राज्य सरकार से सवाल किया कि क्या 4 मई से पहले अभिषेक बनर्जी के खिलाफ कोई भी एफआईआर दर्ज थी? इस पर राज्य के अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (ASG) ने स्वीकार किया कि 4 मई से पहले उनके नाम पर कोई मामला दर्ज नहीं था। वहीं, शिकायतकर्ता भाजपा नेता अभिजीत दास (बॉबी) के वकील ने दलील दी थी कि अभिषेक बनर्जी अत्यधिक प्रभावशाली (Super-Influential) हैं और यदि उन्हें संरक्षण मिला तो गवाहों को प्रभावित किया जा सकता है।

शिकायतकर्ता के दावों पर हाई कोर्ट की टिप्पणी और सुप्रीम कोर्ट से विदेश यात्रा की अनुमति का पूरा घटनाक्रम

शिकायतकर्ता की इस दलील पर सवाल उठाते हुए न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य ने टिप्पणी की कि आखिर ये एफआईआर दर्ज कराने वाले शख्स कौन हैं? उन्होंने पूछा कि क्या वह वही शख्स हैं जो डायमंड हार्बर सीट से चुनाव में दो बार पराजित हो चुके हैं? इसके अलावा, वकील के 'प्रभावशाली' होने के दावे पर पीठ ने आमताला (Amtala) में अभिषेक बनर्जी के सांसद कार्यालय को ढाए जाने की घटना का जिक्र करते हुए कहा कि यदि वे इतने ही प्रभावशाली होते, तो क्या ऐसी कार्रवाई संभव हो पाती? अदालत ने कहा कि राजनीतिक परिस्थितियों के बदलने के बाद राज्य की स्थितियां भी बदली हैं।

अभिषेक बनर्जी के कानूनी सलाहकारों और वरिष्ठ अधिवक्ताओं (गोपाल शंकरनारायणन व अयान भट्टाचार्य) ने अदालत के समक्ष तर्क दिया कि सांसद जांच में पूरा सहयोग कर रहे हैं और आगे भी करते रहेंगे। पीठ ने दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद आदेश दिया कि 25 अगस्त को इस मामले पर अंतिम आदेश पारित किए जाने की संभावना है और तब तक अंतरिम संरक्षण जारी रहेगा।

उल्लेखनीय है कि कलकत्ता हाई कोर्ट के इस आदेश से ठीक एक दिन पहले सुप्रीम कोर्ट से भी अभिषेक बनर्जी को बड़ी राहत मिली थी। देश के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जोयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने अभिषेक बनर्जी को अपनी आंख के इलाज के लिए तीन सप्ताह के लिए विदेश जाने की अनुमति दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार की इस आशंका को खारिज कर दिया था कि वे विदेश जाकर वापस नहीं लौटेंगे। शीर्ष अदालत ने कहा था कि इलाज चुनना और विदेश यात्रा करना नागरिक के अधिकार का हिस्सा है।

अब हाई कोर्ट से सभी 16 मामलों में राहत मिलने और सुप्रीम कोर्ट से मेडिकल आधार पर विदेश यात्रा की मंजूरी मिलने के बाद तृणमूल कांग्रेस और खुद अभिषेक बनर्जी के लिए राजनीतिक व कानूनी मोर्चे पर बहुत बड़ा तनाव दूर हो गया है।