Zepto IPO: घाटे का 'पहाड़' और ED की जांच का साया! आईपीओ से पहले जेप्टो के खुलासों ने उड़ाए होश, क्या दांव लगाना होगा सही

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नई दिल्ली (बिजनेस डेस्क): क्विक-कॉमर्स की दुनिया में अपनी रफ़्तार से पहचान बनाने वाली कंपनी जेप्टो (Zepto) जल्द ही दलाल स्ट्रीट पर अपनी किस्मत आजमाने जा रही है। लेकिन, अपने बहुप्रतीक्षित आईपीओ (IPO) से पहले कंपनी ने जो दस्तावेज (DRHP) साझा किए हैं, उन्होंने निवेशकों के बीच हलचल तेज कर दी है। एक तरफ जहाँ कंपनी का रेवेन्यू रॉकेट की रफ़्तार से बढ़ रहा है, वहीं दूसरी तरफ ₹5,905 करोड़ का भारी-भरकम घाटा और प्रवर्तन निदेशालय (ED) की सक्रियता ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

अगर आप भी जेप्टो के आईपीओ में पैसा लगाने की सोच रहे हैं, तो कंपनी द्वारा बताए गए इन 'रेड फ्लैग्स' को समझना आपके लिए बेहद जरूरी है।

मुनाफा कोसों दूर: ₹5,905 करोड़ तक पहुंचा घाटा

जेप्टो ने अपने अपडेटेड दस्तावेजों में साफ स्वीकार किया है कि जुलाई 2021 में अपनी शुरुआत से ही वह लगातार घाटे में चल रही है। वित्त वर्ष 2026 (FY26) में कंपनी का शुद्ध घाटा बढ़कर ₹5,905 करोड़ हो गया है, जो पिछले वित्त वर्ष (FY25) के ₹4,699 करोड़ के मुकाबले काफी अधिक है। कंपनी का कहना है कि वह डार्क स्टोर्स के विस्तार, प्राइवेट लेबल्स और नई टेक्नोलॉजी पर भारी खर्च कर रही है, जिसकी वजह से भविष्य में भी 'निगेटिव कैश फ्लो' बना रह सकता है।

ED की रडार पर फाउंडर्स और डार्क पैटर्न का जुर्माना

निवेशकों के लिए सबसे बड़ी चिंता का विषय कानूनी पचड़े हैं। जेप्टो ने खुलासा किया है कि 8 अप्रैल 2026 को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कंपनी के को-फाउंडर्स आदित पलिचा और कैवल्य वोहरा को समन जारी किया था। ED की यह जांच विदेशी निवेश और कंपनी के बिजनेस मॉडल से जुड़ी जानकारियों को लेकर है।

इतना ही नहीं, केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) ने ग्राहकों को भ्रमित करने वाले 'डार्क पैटर्न' (जैसे बास्केट स्नीकिंग और भ्रामक विज्ञापन) के इस्तेमाल के लिए कंपनी पर ₹7 लाख का जुर्माना भी लगाया है। हालांकि, कंपनी ने इस पर कानूनी चुनौती दी है, लेकिन ये विवाद ब्रांड इमेज पर असर डाल सकते हैं।

बढ़ता रेवेन्यू और डार्क स्टोर्स का जाल: सिक्के का दूसरा पहलू

भले ही घाटा बढ़ा हो, लेकिन जेप्टो की ग्रोथ स्टोरी दमदार नजर आती है। FY26 में कंपनी का ऑपरेशनल रेवेन्यू दोगुने से भी ज्यादा बढ़कर ₹22,623 करोड़ पहुंच गया है। मार्च 2026 की तिमाही के नतीजे भी उम्मीद जगाते हैं, जहाँ राजस्व में 75% की उछाल दिखी है। कंपनी का पूरा भविष्य उसके 1,139 डार्क स्टोर्स के नेटवर्क पर टिका है। अगर जेप्टो लागत को नियंत्रित करते हुए इस नेटवर्क को और फैला पाती है, तभी वह लंबी रेस का घोड़ा साबित होगी।

निवेशकों के लिए क्या है विशेषज्ञों की राय?

जेप्टो का आईपीओ उन निवेशकों के लिए है जो 'हाई रिस्क-हाई रिवॉर्ड' की क्षमता रखते हैं। कंपनी का रेवेन्यू मॉडल मजबूत है, लेकिन नियामक (Regulatory) जोखिम और मुनाफे की अनिश्चितता इसे एक चुनौतीपूर्ण निवेश बनाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि आईपीओ के प्राइस बैंड और भविष्य के 'प्रॉफिटेबिलिटी रोडमैप' को देखने के बाद ही कोई बड़ा फैसला लेना सही होगा।