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August 15 2026 09:03 pm

On This Day: जब शुरू हुआ था शतकों के शतक का ऐतिहासिक सफर, सचिन तेंदुलकर ने मैनचेस्टर में भरी थी हुंकार

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क्रिकेट के इतिहास में 'शतकों का शतक' यानी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सौ शतकों का ऐतिहासिक मुकाम हासिल करने वाला यदि दुनिया में कोई इकलौता बल्लेबाज है, तो वह हैं 'मास्टर ब्लास्टर' सचिन रमेश तेंदुलकर। आज भी क्रिकेट जगत में इस महान रिकॉर्ड के आसपास कोई दूसरा खिलाड़ी नहीं पहुंच सका है। क्रिकेट के इस भगवान के अनूठे और जादुई सफर की शुरुआत ठीक आज ही के दिन यानी 14 अगस्त 1990 को इंग्लैंड के मैनचेस्टर स्थित ऐतिहासिक ओल्ड ट्रेफर्ड मैदान से हुई थी। आइए जानते हैं कि कैसे उस ऐतिहासिक मुकाबले में महज 17 साल के सचिन तेंदुलकर ने अपने पहले टेस्ट शतक से भारतीय टीम को हार के मुंह से बाहर निकाला था।

मैनचेस्टर टेस्ट की मुश्किल परिस्थितियां और भारत की चुनौती

इंग्लैंड के खिलाफ खेले जा रहे इस रोमांचक टेस्ट मैच में मेजबान टीम ने पहले बल्लेबाजी करते हुए माइक एथरटन (131 रन), रोबिन स्मिथ (121 रन) और कप्तान ग्राहम गूच (116 रन) के शानदार शतकों की बदौलत अपनी पहली पारी में विशालकाय 519 रन बनाए थे। इसके जवाब में भारतीय टीम ने भी जबरदस्त जज्बा दिखाया और कप्तान मोहम्मद अजहरुद्दीन के बेहतरीन 179 रनों की ताबड़तोड़ पारी के दम पर 432 रन बनाए। हालांकि, इसके बावजूद भारतीय टीम पहली पारी के आधार पर 87 रनों से पीछे रह गई थी। इसके बाद इंग्लैंड ने अपनी दूसरी पारी 4 विकेट पर 320 रन बनाकर घोषित कर दी, जिससे भारत के सामने जीत के लिए 408 रनों का बेहद कठिन लक्ष्य रखा गया।

जब 183 रन पर गिर चुके थे 6 विकेट, फिर आए सचिन

मैच के आखिरी दिन जब भारतीय टीम ने अपनी दूसरी पारी की शुरुआत की, तो अंग्रेजी गेंदबाजों के सामने टिकना बेहद मुश्किल साबित हुआ। देखते ही देखते भारत के 6 विकेट महज़ 183 रनों पर ही ढेर हो गए थे और टीम पर हार का आसन्न संकट मंडराने लगा था। ऐसे बेहद दबाव और तनावपूर्ण माहौल में छठे नंबर पर बल्लेबाजी करने उतरे युवा सचिन तेंदुलकर ने अपनी परिपक्वता का परिचय दिया। एक छोर पर विकेट लगातार गिर रहे थे, लेकिन सचिन ने क्रीज पर चट्टान की तरह डटे रहकर संघर्ष किया और मनोज प्रभाकर के साथ मिलकर स्कोर को संभाला।

मैनचेस्टर में खेली गई वह ऐतिहासिक नाबाद शतकीय पारी

सचिन तेंदुलकर ने उस मुश्किल समय में अपनी तकनीकी महारत और गजब के आत्मविश्वास का प्रदर्शन करते हुए 189 गेंदों का सामना किया और अपनी इस पारी में 17 शानदार चौकों की मदद से नाबाद 119 रन बनाए। दूसरी ओर, उनका साथ निभा रहे मनोज प्रभाकर ने भी 128 गेंदों पर 8 चौकों की मदद से नाबाद 67 रनों की बहुमूल्य पारी खेली। सचिन और मनोज प्रभाकर के बीच सातवें विकेट के लिए अटूट 156 रनों की ऐतिहासिक साझेदारी हुई। मैच के आखिरी दिन जब खेल खत्म हुआ, तब भारत का स्कोर 6 विकेट के नुकसान पर 343 रन था और इस तरह सचिन की जुझारू पारी ने भारत को हार से बचाते हुए मैच को रोमांचक तरीके से ड्रॉ करा लिया। यहीं से शुरू हुआ वह सिलसिला जो आगे चलकर दुनिया के 100 शतकों के महारिकॉर्ड में तब्दील हो गया।