क्या आप जीवन में अपार सफलता और अटूट धन कमाएंगे? कुंडली के ये 4 घर खोलते हैं शनि देव के सबसे बड़े राज
ज्योतिष शास्त्र में शनि देव को कर्मफल दाता और न्याय का देवता माना गया है। कई लोग शनि का नाम सुनते ही डर जाते हैं, लेकिन सच यह है कि शनि देव व्यक्ति को उसके कर्मों के अनुसार राजा से रंक और रंक से राजा बनाने की ताकत रखते हैं। किसी भी जातक की कुंडली में शनि और गुरु की स्थिति यह तय करने में सबसे बड़ी भूमिका निभाती है कि वह इंसान अपने जीवन में कितना कामयाब होगा और कितना धन कमाएगा।
हर व्यक्ति की कुंडली के अनुसार परिस्थितियां भिन्न हो सकती हैं, लेकिन आज हम ज्योतिषीय गणना के आधार पर एक सामान्य (मोटा-मोटा) आकलन करने जा रहे हैं। अगर आपकी कुंडली के इन 4 विशेष घरों (3, 6, 10, और 11वें भाव) में शनि देव विराजमान हैं, तो आपके करियर, सफलता और धन-दौलत को लेकर शनि देव क्या संकेत दे रहे हैं, आइए विस्तार से जानते हैं।
तीसरा भाव (3rd House): 36 साल की उम्र के बाद चमकता है भाग्य, नौकरी से मिलता है छप्परफाड़ पैसा
कुंडली का तीसरा भाव पराक्रम और भाई-बहनों का माना जाता है। यदि किसी जातक की कुंडली के तीसरे घर में शनि देव बैठे हों, तो उनका जीवन एक अलग ढर्रे पर चलता है।
करियर और धन: ऐसे जातक आमतौर पर बिजनेस (व्यापार) में सफल नहीं हो पाते हैं। इन्हें व्यापार की जगह नौकरी (Job) से बहुत अधिक धन और सफलता मिलती है।
रिश्ते और चुनौतियां: शुरुआत में इनका अपने भाई-बहनों के साथ तालमेल बहुत अच्छा नहीं रहता और भाग्य भी बार-बार परीक्षाओं के कारण रुकावटें पैदा करता है। इनका पारिवारिक माहौल काफी अनुशासित होता है।
सफलता की उम्र: ऐसे लोगों का असली भाग्योदय 36 वर्ष की आयु के बाद होता है। इस उम्र के बाद इन्हें जबरदस्त आर्थिक लाभ मिलता है और मध्य आयु पार करने के बाद भाई-बहनों के साथ रिश्ते भी सुधर जाते हैं।
छठा भाव (6th House): आधी लड़ाई तो आपने यूं ही जीत ली, दुश्मनों पर पाते हैं विजय
कुंडली का छठा भाव रोग, ऋण और शत्रुओं का घर होता है। यदि आपके छठे भाव में शनि देव विराजमान हैं, तो समझ लीजिए कि आपने जीवन की आधी जंग पहले ही जीत ली है।
शत्रु परास्त: छठे भाव में बैठे शनि देव जातकों को उनके दुश्मनों, अदालती मामलों, बीमारियों और जीवन की तमाम परेशानियों पर शानदार जीत दिलाते हैं। आपके सामने आपके विरोधी टिक नहीं पाते।
अखंड संपत्ति का योग: ऐसे जातक समाज में अपनी कीर्ति चारों दिशाओं में फैलाते हैं। इन्हें जीवन में अनेक संपत्तियों (Properties) का सुख मिलता है।
खानदान में अलग मुकाम: शनि की इस शुभ स्थिति के कारण जातक अपने जीवन में मेहनत और संघर्ष की बदौलत ऐसा बड़ा मुकाम हासिल करता है, जो उसके पूरे परिवार या खानदान में आज तक किसी ने हासिल न किया हो।
दसवां भाव (10th House): खुद के पराक्रम से बनते हैं राजा, प्रशासन और न्याय के क्षेत्र में मिलता है बड़ा पद
दसवां भाव करियर, कर्म और पिता का स्थान माना जाता है। इस भाव में शनि देव जातक को बेहद स्वाभिमानी और कर्मठ बनाते हैं।
पारिवारिक सुख की कमी: दसवें घर में शनि होने पर जातक को मातृ-पितृ सुख (माता-पिता का पूरा साथ या सुख) मिलने में थोड़ी कमी रह जाती है।
खुद की मेहनत से कामयाबी: ऐसा इंसान परिस्थितियों के आगे कभी घुटने नहीं टेकता और कभी हार नहीं मानता। वह अपने खुद के पराक्रम और बाहुबल से जीवन के सारे ऐश-ओ-आराम और वैभव को अर्जित करता है।
उच्च पद का योग: ऐसे जातक सरकारी प्रशासन में बहुत ऊंचे पदों पर बैठते हैं। ज्योतिष के अनुसार, ये लोग सफल जज (न्यायाधीश), वकील या किसी बड़े संस्थान के खजांची (Financier/Treasurer) बनते हैं।
ग्यारहवां घर (11th House): शनि का सबसे प्रिय और उत्तम घर, हर अधूरी इच्छा होगी पूरी
कुंडली का एकादश या 11वां भाव आय (Income) और लाभ का घर होता है। ज्योतिष शास्त्र में इस घर में शनि देव का होना सबसे उत्तम और सर्वश्रेष्ठ माना गया है।
दीर्घायु और धैर्यवान: ग्यारहवें भाव के शनि जातक को बेहद धैर्य रखने वाला, शांत और दीर्घायु (लंबी उम्र वाला) बनाते हैं।
इच्छाओं की पूर्ति: ऐसा व्यक्ति अपनी हर अधूरी इच्छा और सपनों को पूरा करने के लिए जी-जान लगा देता है और अंत में सफलता पाकर ही दम लेता है।
धन-दौलत और ऐश्वर्य: चूंकि यह भाव सीधे तौर पर लाभ, आय, संपत्ति, ऐश्वर्य, रत्न, वाहन और मांगलिक कार्यों से जुड़ा है, इसलिए यहां बैठे शनि देव जातक को जीवन में कभी भी पैसों की कमी नहीं होने देते। इन्हें हर तरफ से केवल लाभ ही लाभ मिलता है।