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August 24 2026 06:45 pm

क्या यशस्वी जायसवाल पर लगेगा बैन? असिता फर्नांडो संग तीखी बहस के बाद जानिए क्या कहता है ICC का कड़ा नियम और डिमैरिट पॉइंट्स का पूरा गणित

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भारत और श्रीलंका के बीच खेले जा रहे मुकाबले में युवा भारतीय सलामी बल्लेबाज यशस्वी जायसवाल और श्रीलंकाई तेज गेंदबाज असिता फर्नांडो के बीच हुई तीखी नोकझोंक ने क्रिकेट जगत में नया विवाद खड़ा कर दिया है। मैदान पर दोनों खिलाड़ियों के बीच हुई जुबानी जंग और अंपायरों के बीच-बचाव के बाद यह सवाल हर क्रिकेट प्रशंसक के जेहन में उठ रहा है कि क्या इस घटना के चलते यशस्वी जायसवाल पर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) का कोई मैच बैन (प्रतिबंध) लग सकता है? क्या केवल मैदान पर कहासुनी होने से खिलाड़ी को अगले मुकाबलों से बाहर बैठना पड़ सकता है, या फिर यह मामला केवल जुर्माने तक ही सीमित रहेगा? आईसीसी की आधिकारिक आचार संहिता (Code of Conduct), इसके अनुशासनात्मक स्तरों और डिमैरिट पॉइंट्स की पेचीदा नियमावली के आधार पर आइए विस्तार से समझते हैं कि यशस्वी जायसवाल पर बैन लगने की कितनी संभावना है और नियम इस बारे में क्या कहते हैं।

क्या यशस्वी जायसवाल पर सचमुच बैन लग सकता है? जानिए जमीनी सच्चाई

किसी भी खिलाड़ी पर मैच प्रतिबंध (सस्पेंशन) लगाने के लिए आईसीसी के तय और बेहद सख्त कानूनी मानक हैं। सीधे और तकनीकी शब्दों में कहें तो मैदान पर केवल तीखी नोकझोंक या स्लेजिंग का जवाब देने भर से किसी खिलाड़ी पर तुरंत 1 या 2 मैचों का प्रतिबंध नहीं लगाया जाता। यशस्वी जायसवाल और असिता फर्नांडो के बीच हुई घटना में न तो कोई शारीरिक धक्का-मुक्की हुई है और न ही किसी खिलाड़ी द्वारा अंपायर के फैसले का हिंसक अनादर किया गया है।

यह विवाद मुख्य रूप से 'मौखिक आदान-प्रदान' और आक्रामक शारीरिक हावभाव (Aggressive Posturing) का मामला प्रतीत होता है। यदि आईसीसी मैच रेफरी इसे सामान्य मैदान स्तरीय गरमा-गरमी मानते हैं, तो यह अधिकतम लेवल 1 (Level 1) या बहुत गंभीर होने पर लेवल 2 (Level 2) के दायरे में आएगा। लेवल 1 के अपराध में सीधे बैन का कोई प्रावधान नहीं होता, इसलिए जब तक यशस्वी के खाते में पिछले 24 महीनों के पुराने डिमैरिट अंक जमा न हों, तब तक उन पर आगामी टेस्ट या सीरीज के मैचों में बैन लगने का कोई प्रत्यक्ष खतरा नहीं है।

आईसीसी आचार संहिता (Code of Conduct) के 4 स्तर और उनकी सजा

आईसीसी ने खिलाड़ियों के अनुशासन और खेल भावना को बनाए रखने के लिए अपनी रूलबुक (Article 2 of ICC Code of Conduct) को चार अलग-अलग श्रेणियों में विभाजित किया है:

लेवल 1 अपराध (Level 1 Breach): इसमें अत्यधिक अपील करना, आउट होने पर निराशा में बल्ला पटकना, अनुचित शारीरिक इशारे करना, अंपायर के प्रति हल्की असहमति जताना या विरोधी खिलाड़ी को उकसाने के लिए सामान्य अपशब्द कहना शामिल है। इसके तहत दोषी खिलाड़ी को केवल एक आधिकारिक चेतावनी (Official Reprimand) दी जा सकती है या उसकी मैच फीस में 50 प्रतिशत तक की कटौती की जा सकती है। साथ ही खिलाड़ी के खाते में 1 या 2 डिमैरिट अंक जोड़े जाते हैं। इसमें कोई मैच बैन नहीं होता।

लेवल 2 अपराध (Level 2 Breach): इसमें विरोधी खिलाड़ी के बिल्कुल करीब जाकर व्यक्तिगत अपमान करना, जानबूझकर रास्ता रोकना, अंपायर के आदेश की अनदेखी करना या आक्रामक रूप से विरोधी खिलाड़ी की ओर बढ़ना शामिल है। इस स्तर पर खिलाड़ी पर 50 से 100 प्रतिशत मैच फीस का जुर्माना लगाया जाता है और 3 या 4 डिमैरिट अंक दिए जाते हैं। यदि किसी खिलाड़ी को 4 डिमैरिट अंक मिलते हैं, तो वह 2 सस्पेंशन पॉइंट्स में बदल जाते हैं, जिससे खिलाड़ी पर 1 टेस्ट मैच या 2 सीमित ओवर मैचों का प्रतिबंध लग जाता है।

लेवल 3 अपराध (Level 3 Breach): इसमें विरोधी खिलाड़ी, अंपायर या मैच अधिकारी को शारीरिक रूप से डराना, धमकी देना या गंभीर रूप से भड़काऊ आचरण करना शामिल है। इसमें 4 से 12 सस्पेंशन पॉइंट्स (यानी कम से कम 2 से 4 टेस्ट मैचों का सीधा निलंबन) और 5 से 6 डिमैरिट अंक दिए जाते हैं।

लेवल 4 अपराध (Level 4 Breach): यह आईसीसी नियमावली का सबसे गंभीर अपराध है, जिसमें मैदान पर किसी खिलाड़ी या अंपायर पर हाथ उठाना (शारीरिक हिंसा) या नस्लीय/धार्मिक टिप्पणी करना शामिल है। इसमें दोषी खिलाड़ी पर न्यूनतम 8 सस्पेंशन पॉइंट्स और आजीवन प्रतिबंध तक का प्रावधान है।

डिमैरिट पॉइंट्स का गणित: कब और कैसे लगता है एक या दो मैचों का प्रतिबंध?

आईसीसी का डिमैरिट पॉइंट्स सिस्टम एक 'रोलिंग विंडो' (Rolling 24-month Window) पर काम करता है। इसका मतलब यह है कि किसी भी खिलाड़ी द्वारा अर्जित किए गए डिमैरिट अंक उसके अनुशासनात्मक रिकॉर्ड में पूरे 24 महीने (2 साल) तक सक्रिय रहते हैं। 24 महीने पूरे होने के बाद वे अंक स्वतः निष्प्रभावी हो जाते हैं।

यदि कोई खिलाड़ी 24 महीने की अवधि के भीतर कुल 4 डिमैरिट अंक जुटा लेता है, तो वे अंक अपने आप 2 'सस्पेंशन पॉइंट्स' (Suspension Points) में परिवर्तित हो जाते हैं। 2 सस्पेंशन पॉइंट्स का अर्थ होता है कि खिलाड़ी 1 टेस्ट मैच या फिर 2 वनडे/टी20 अंतरराष्ट्रीय मैचों (जो भी पहले आए) के लिए निलंबित हो जाएगा। यदि कोई खिलाड़ी 8 डिमैरिट अंक तक पहुंच जाता है, तो उस पर 2 टेस्ट मैच या 4 सीमित ओवर मैचों का बैन लगता है।

यशस्वी जायसवाल का अंतरराष्ट्रीय अनुशासनात्मक रिकॉर्ड अब तक बेहद साफ-सुथरा रहा है और उनके खाते में पहले से कोई गंभीर डिमैरिट अंक सक्रिय नहीं हैं। ऐसे में यदि इस घटना के लिए उन पर 1 या 2 डिमैरिट अंक लगाए भी जाते हैं, तो भी वे कुल 4 अंकों की प्रतिबंधित सीमा से काफी दूर रहेंगे, जिससे उनके खेलने पर कोई रोक नहीं लगेगी।

स्टंप माइक और अंपायर रिपोर्ट: मैच रेफरी कैसे तय करेंगे अंतिम फैसला?

दिन का खेल समाप्त होने के बाद मैदानी अंपायर, तीसरे अंपायर और चौथे अंपायर मिलकर एक संयुक्त रिपोर्ट तैयार करते हैं, जिसे आईसीसी मैच रेफरी को सौंपा जाता है। मैच रेफरी इस रिपोर्ट के आधार पर पूरे घटनाक्रम की वीडियो फुटेज, ब्रॉडकास्ट कैमरों के क्लोज-अप और स्टंप माइक्रोफोन (Stump Mic) के ऑडियो की बारीकी से जांच करते हैं।

मैच रेफरी मुख्य रूप से तीन बातों की पड़ताल करते हैं:

बातचीत की शुरुआत किस खिलाड़ी ने की थी और क्या किसी खिलाड़ी को उकसाया गया था?

क्या किसी खिलाड़ी ने आईसीसी द्वारा प्रतिबंधित किसी अश्लील, अपमानजनक या नस्लीय शब्द का प्रयोग किया?

क्या दोनों खिलाड़ियों के बीच कोई शारीरिक संपर्क (Physical Contact) या डराने-धमकाने का प्रयास हुआ?

यदि मैच रेफरी यह पाते हैं कि आचार संहिता का उल्लंघन हुआ है, तो संबंधित खिलाड़ी और टीम मैनेजर को औपचारिक नोटिस दिया जाता है। यदि खिलाड़ी अपना दोष स्वीकार कर लेता है, तो रेफरी द्वारा दी गई सजा (जैसे मैच फीस की कटौती) तुरंत लागू हो जाती है। यदि खिलाड़ी खुद को निर्दोष बताते हुए आरोपों को चुनौती देता है, तो मैच रेफरी एक औपचारिक अनुशासनात्मक सुनवाई (Disciplinary Hearing) आयोजित करते हैं, जहां दोनों पक्षों के साक्ष्य सुनने के बाद अंतिम फैसला सुनाया जाता है।

अतीत के उदाहरण: जब स्लेजिंग पर आईसीसी ने लगाया था जुर्माना और बैन

क्रिकेट इतिहास में मैदान पर तीखी बहस के कई चर्चित मामले सामने आ चुके हैं जहां आईसीसी ने कड़े कदम उठाए हैं:

कगिसो रबाडा (दक्षिण अफ्रीका): साल 2018 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ स्टीव स्मिथ के विकेट का जश्न मनाते समय उनके कंधे से कंधा टकराने के आरोप में रबाडा को 3 डिमैरिट अंक दिए गए थे। चूंकि उनके खाते में पहले से डिमैरिट अंक मौजूद थे, इसलिए उनके कुल अंक 8 हो गए थे और उन पर दो टेस्ट मैचों का बैन लगा दिया गया था (हालांकि बाद में अपील के जरिए यह सजा कम हुई थी)।

विराट कोहली (भारत): 2019 में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ मैच के दौरान तेज गेंदबाज ब्यूरन हेंड्रिक्स के रास्ते में आकर कंधा टकराने के मामले में विराट कोहली को लेवल 1 का दोषी मानते हुए 1 डिमैरिट अंक और आधिकारिक चेतावनी दी गई थी।

शाकिब अल हसन (बांग्लादेश): अंपायर के फैसले पर असंतोष जताते हुए स्टंप्स पर लात मारने के कारण घरेलू टी20 लीग में शाकिब पर भारी जुर्माना और कई मैचों का बैन लगाया गया था।

इन ऐतिहासिक मिसालों से स्पष्ट है कि जब तक कोई शारीरिक टकराव या गंभीर हिंसक हरकत न हो, तब तक केवल मौखिक नोकझोंक के मामलों में आईसीसी आम तौर पर मैच फीस का 25 से 50 प्रतिशत जुर्माना लगाकर मामले को शांत कर देती है।

टीम इंडिया के लिए क्या हैं मायने? आने वाले मुकाबलों पर क्या होगा असर?

भारतीय क्रिकेट टीम के दृष्टिकोण से यशस्वी जायसवाल का प्लेइंग 11 में बने रहना बेहद महत्वपूर्ण है। यशस्वी वर्तमान में भारतीय शीर्ष क्रम की रीढ़ बन चुके हैं और टेस्ट क्रिकेट में उनका आक्रामक स्ट्राइक रेट टीम को तेज शुरुआत दिलाने में सबसे बड़ी भूमिका निभाता है।

मैनेजमेंट ने भी यशस्वी को अपना स्वाभाविक और बेखौफ खेल जारी रखने का पूरा समर्थन दिया है, लेकिन साथ ही युवा खिलाड़ियों को यह नसीहत भी दी गई है कि वे विरोधी टीम के स्लेजिंग जाल में फंसकर अपना आपा न खोएं। मैच रेफरी की अंतिम समीक्षा में यशस्वी जायसवाल पर किसी भी प्रकार के मैच बैन की संभावना न के बराबर है। अधिकतम संभावना यही है कि दोनों खिलाड़ियों—यशस्वी जायसवाल और असिता फर्नांडो—को भविष्य के लिए चेतावनी देकर या हल्की मैच फीस कटौती के साथ मामले का निपटारा कर दिया जाएगा।