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August 03 2026 06:22 pm

राजभर ने अखिलेश को कव्वाली सीखने के लिए क्यों दी सलाह? पप्पू यादव को लेकर भी सपा का स्टैंड पूछा

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उत्तर प्रदेश की राजनीति में बयानों के तीर लगातार तीखे होते जा रहे हैं, और इस बार सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के प्रमुख और कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव पर बेहद तीखा और तंज कसने वाला हमला बोला है। राजभर ने मीडिया से बातचीत के दौरान अखिलेश यादव को सीधे तौर पर 'कव्वाली सीखने' की अजीबोगरीब सलाह दे डाली है। इसके साथ ही उन्होंने पूर्णिया के सांसद पप्पू यादव के हालिया राजनीतिक बयानों और गतिविधियों का जिक्र करते हुए समाजवादी पार्टी से यह भी स्पष्ट करने को कहा है कि पार्टी का पप्पू यादव को लेकर असल स्टैंड क्या है।

अखिलेश यादव को कव्वाली सीखने की नसीहत क्यों?

ओम प्रकाश राजभर अपने बेबाक और अक्सर विवादित बयानों के लिए जाने जाते हैं। इस बार उन्होंने अखिलेश यादव की राजनीतिक कार्यशैली और भाषणों पर कटाक्ष करते हुए कहा कि उन्हें अब नेताओं वाली शैली छोड़कर कव्वाली सीखने पर ध्यान देना चाहिए। राजभर का यह तंज तब सामने आया जब सपा प्रमुख लगातार सरकार को घेरने के लिए शायराना अंदाज या तीखे जुमलों का इस्तेमाल कर रहे हैं। राजभर ने तंज कसते हुए कहा कि जिस तरह की भाषा और बयानबाजी विपक्ष की तरफ से की जा रही है, उससे लगता है कि उन्हें मुद्दों की राजनीति छोड़कर अब कला और संगीत की तरफ रुख कर लेना चाहिए।

पप्पू यादव को लेकर सपा से मांगा गया स्पष्ट स्टैंड

सब्जी और क्षेत्रीय समीकरणों के बहाने पर बोलते हुए राजभर ने विपक्षी गठबंधन (I.N.D.I.A. ब्लॉक) के भीतर चल रही वैचारिक खींचतान को भी हवा दी है। उन्होंने अखिलेश यादव से सीधा सवाल किया कि वे देश के मुखर नेता माने जाने वाले पप्पू यादव के मामलों पर चुप्पी क्यों साधे हुए हैं? राजभर ने सपा से पूछा कि पार्टी को यह स्पष्ट करना चाहिए कि वह पप्पू यादव के बयानों और उनकी कार्यशैली के साथ खड़ी है या उससे किनारा कर रही है। उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब राष्ट्रीय स्तर पर विपक्षी दलों के बीच सीटों के तालमेल और बयानों को लेकर अक्सर असमंजस की स्थिति बनी रहती है।

राजनीतिक गलियारों में गरमाया पारा

राजभर के इन तीखे तेवरों और तंजों के बाद राज्य की राजनीति का पारा एक बार फिर चढ़ गया है। जहाँ एक तरफ सुभासपा प्रमुख लगातार सत्ता पक्ष के सुर में सुर मिलाकर विपक्ष पर दबाव बना रहे हैं, वहीं समाजवादी पार्टी की तरफ से अभी तक इस पर कोई आधिकारिक और कड़ा पलटवार नहीं आया है। आने वाले दिनों में यह बयान उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक नया विवाद खड़ा कर सकता है, क्योंकि दोनों दलों के बीच जुबानी जंग थमने का नाम नहीं ले रही है।