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August 20 2026 04:39 pm

उच्च शिक्षण संस्थानों में जातिगत भेदभाव नियमों पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई, UGC ने मांगा समय

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उच्च शिक्षण संस्थानों में जातिगत भेदभाव को रोकने के लिए बनाए गए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नए नियमों का मामला अब देश की सर्वोच्च अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट में पहुंच चुका है। इस मामले में हुई ताजा सुनवाई के दौरान UGC ने अदालत को सूचित किया है कि वह इन नियमों पर फिर से विचार कर रहा है और इसके लिए उसे कुछ और समय की आवश्यकता है।

यूजीसी (UGC) ने मांगा पुनर्विचार का समय

मामلे की सुनवाई के दौरान UGC का पक्ष रखते हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को जानकारी दी कि आयोग इन नए नियमों पर पुनर्विचार कर रहा है। इसे ध्यान में रखते हुए उन्होंने अदालत से थोड़ा और समय दिए जाने का अनुरोध किया, जिस पर अदालत ने विचार किया है।

सुप्रीम कोर्ट का निर्देश और चार हफ्ते का समय

चीफ जस्टिस सूर्यकांत की पीठ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए UGC को चार हफ्ते के भीतर इस संबंध में एक विस्तृत हलफनामा (Affidavit) दाखिल करने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही, कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि इस हलफनामे की कॉपी अन्य संबंधित पक्षों को भी उपलब्ध कराई जाए। गौरतलब है कि इससे पहले हुई सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने इन नियमों पर अंतरिम रोक लगाते हुए केंद्र सरकार और UGC को नोटिस जारी किया था।

क्या है इस पूरे विवाद की मुख्य वजह?

UGC ने 13 जनवरी 2026 को देश के उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से नए नियमों को अधिसूचित किया था। इन नए प्रावधानों के सामने आने के बाद, विशेष तौर पर नियम 3(C) को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई थी। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि नियम 3(C) मनमाना और भेदभावपूर्ण है, जिससे कुछ वर्गों के छात्रों को उच्च शिक्षा से वंचित होना पड़ सकता है। इसके अलावा, याचिका में यह भी दलील दी गई थी कि यह प्रावधान भारतीय संविधान द्वारा प्रदत्त समानता के अधिकार, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का उल्लंघन करता है।