'आरएसएस पर प्रतिबंध लगाया जाए', USCIRF ने मोहन भागवत के न्यूयॉर्क दौरे और हाई-लेवल मीटिंग्स का किया कड़ा विरोध
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत के आगामी अमेरिका, कनाडा और यूनाइटेड किंगडम दौरे से ठीक पहले अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक नया राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। अमेरिका की एक स्वतंत्र संस्था ने उनके इस दौरे और प्रस्तावित बैठकों को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी है।
यूएससीआईआरएफ ने की आरएसएस पर प्रतिबंध की मांग
यूनाइटेड स्टेट्स कमीशन ऑन इंटरनेशनल रिलीजियस फ्रीडम (USCIRF) ने अमेरिकी सरकार से यह आग्रह किया है कि वह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सदस्यों को किसी भी हाई-लेवल मीटिंग्स में शामिल करने के बजाय उन पर टारगेटेड प्रतिबंध (Targeted Sanctions) लगाए।
आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत की यह तीन देशों (अमेरिका, कनाडा और यूके) की प्रस्तावित यात्रा 25 अगस्त से शुरू होने वाली है। इस यात्रा के सिलसिले में यूएससीआईआरएफ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के जरिए अपनी बात रखी, जिसमें कमीशन के चेयरमैन और पाकिस्तानी-अमेरिकी डॉक्टर आसिफ महमूद तथा कमिश्नर जीन मिल्स के बयान साझा किए गए।
आरएसएस नेताओं को राजनयिक शिष्टाचार न दिए जाने की वकालत
बयानों में आरोप लगाया गया है कि आरएसएस से जुड़े समूहों ने धार्मिक अल्पसंख्यकों को प्रभावित किया है। कमीशन के प्रतिनिधियों का यह तर्क है कि आरएसएस नेताओं को, भले ही वे भारत सरकार से किसी भी रूप में जुड़े हों, किसी भी तरह की हाई-लेवल बैठकों या कूटनीतिक (Diplomatic) शिष्टाचार का लाभ नहीं मिलना चाहिए। इसके विपरीत, उन्होंने अमेरिकी प्रशासन से यह अपील की है कि धार्मिक स्वतंत्रता के कथित उल्लंघनों के लिए जिम्मेदार माने जाने वाले आरएसएस सदस्यों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएं।
यह तीखी टिप्पणियां मार्च में जारी की गई यूएससीआईआरएफ की सालाना रिपोर्ट के बाद सामने आई हैं। उस रिपोर्ट में भी कमीशन ने धार्मिक आजादी के मुद्दों को लेकर भारत की आलोचना की थी और आरएसएस तथा भारत की बाहरी खुफिया एजेंसी (RAW) समेत कुछ संस्थाओं के खिलाफ प्रतिबंधों का समर्थन किया था।
भारत का कड़ा रुख और यात्रा का उद्देश्य
भारत सरकार पहले ही ऐसी अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों और बयानों को पूरी तरह खारिज कर चुकी है। नई दिल्ली का यह स्पष्ट रुख रहा है कि इस तरह की रिपोर्ट्स संदिग्ध स्रोतों और राजनीतिक रूप से प्रेरित वैचारिक नैरेटिव पर आधारित होती हैं, जो देश की वास्तविक और निष्पक्ष तस्वीर पेश नहीं करती हैं।
दूसरी ओर, आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत की यह विदेश यात्रा भारतीय मूल के लोगों (डाइएस्पोरा) से जुड़े विभिन्न स्थानीय संघों और संगठनों के विशेष आमंत्रण पर हो रही है। यह दौरा ऐसे समय में बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है जब संघ अपना शताब्दी वर्ष मना रहा है। अपनी इस यात्रा के दौरान उनके प्रवासी भारतीयों और स्थानीय संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ कई बैठकों में शामिल होने की संभावना है।