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August 22 2026 03:44 am

भारत में सिम कार्ड नियमों पर बड़ी सख्ती: 9 से ज्यादा सिम होने पर लगेगा प्रतिबंध, तुरंत ब्लॉक होंगे अवैध कनेक्शन

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भारत में मोबाइल यूजर्स और टेलीकॉम सेक्टर से जुड़ी एक बहुत बड़ी खबर सामने आ रही है। देश में साइबर फ्रॉड, फर्जीवाड़े और सिम कार्ड के अवैध इस्तेमाल पर लगाम कसने के लिए केंद्र सरकार ने नियमों को और अधिक कड़ा कर दिया है। दूरसंचार विभाग (DoT) ने अब डिजिटल इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म (DIP) का उपयोग करते हुए उन ग्राहकों की पहचान करने का निर्देश दिया है, जिनके पास कानून द्वारा निर्धारित सीमा से अधिक सिम कार्ड मौजूद हैं।

क्या है भारत में सिम कार्ड की तय सीमा?

सामान्य तौर पर देश के अधिकांश हिस्सों में एक व्यक्ति अपने नाम पर अधिकतम नौ (9) मोबाइल कनेक्शन रख सकता है। हालांकि, संवेदनशील क्षेत्रों जैसे जम्मू-कश्मीर, असम और अन्य उत्तर-पूर्वी राज्यों के नागरिकों के लिए यह सीमा अधिकतम छह (6) सिम कार्ड तय की गई है।

यदि कोई व्यक्ति निर्धारित सीमा से अधिक यानी 10वां सिम कार्ड लेने की कोशिश करता है, तो नए नियमों के तहत टेलीकॉम ऑपरेटरों का सिस्टम तुरंत चेतावनी दे देगा और काउंटर पर ही नया कनेक्शन देने से रोक दिया जाएगा। यह पूरी व्यवस्था डिजिटल इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म के जरिए संचालित होगी, जहां सिम सीमा पूरी होने की जानकारी ऑपरेटरों को तुरंत मिल जाएगी।

अगर आपके पास पहले से हैं अतिरिक्त सिम, तो क्या होगा?

नए नियमों के दायरे में वे लोग भी आएंगे जिनके पास पहले से ही तय सीमा से अधिक सिम कार्ड मौजूद हैं। दूरसंचार विभाग की आधुनिक तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित टूल्स (जैसे ASTR टूल) फर्जी दस्तावेजों या अवैध तरीकों से लिए गए ऐसे अतिरिक्त सिम कार्डों की पहचान कर रहे हैं। यदि कोई व्यक्ति तय सीमा से ज्यादा सिम इस्तेमाल करता पाया जाता है, तो उन अतिरिक्त और संदिग्ध कनेक्शनों को तुरंत डिस्कनेक्ट कर दिया जा सकता है।

ट्रांसपोर्ट और टेलीकॉम कंपनियों के लिए अंतिम तिथि

दूरसंचार विभाग ने सभी टेलीकॉम ऑपरेटरों को अपने सिस्टम को डिजिटल इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म के साथ पूरी तरह से एकीकृत (Integrate) करने और रियल-टाइम सिम चेकिंग शुरू करने के लिए 30 नवंबर, 2026 तक की समय-सीमा तय की है। सरकार का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी जालसाज फर्जी आईडी या मृत/दूसरे व्यक्ति के दस्तावेजों के आधार पर सिम कार्ड हासिल करके वित्तीय धोखाधड़ी या अन्य साइबर अपराधों को अंजाम न दे सके।

इसके अलावा, कॉलिंग को और अधिक सुरक्षित बनाने के लिए 'कॉलिंग नेम प्रेजेंटेशन' (CNAP) जैसी प्रणालियां भी लाई जा रही हैं, जिससे इनकमिंग कॉल आने पर स्क्रीन पर कॉलर का असली नाम दिखाई देगा। सरकार के इन सख्त कदमों से साइबर अपराधियों के लिए फर्जी कनेक्शनों के पीछे छिपना बेहद मुश्किल हो जाएगा।