12 अगस्त को लगने जा रहा है सदी का सबसे दुर्लभ पूर्ण सूर्य ग्रहण, दिन में ही छा जाएगा गहरा अंधेरा; 64 साल बाद बन रहा ऐसा खगोलीय संयोग
अंतरिक्ष विज्ञान और खगोलशास्त्र में रुचि रखने वालों के साथ-साथ आम जनता के लिए 12 अगस्त की तारीख बेहद ऐतिहासिक होने जा रही है। इस दिन आसमान में एक ऐसा अद्भुत और अलौकिक नजारा देखने को मिलेगा जो दशकों में एक बार ही संभव होता है। 12 अगस्त को लगने वाला यह सूर्य ग्रहण एक 'पूर्ण सूर्य ग्रहण' (Total Solar Eclipse) होगा, जिसमें चंद्रमा, पृथ्वी और सूर्य के बीच इस प्रकार सटीक रेखा में आ जाएगा कि वह सूर्य के प्रकाश को पूरी तरह से ढक लेगा। इसके परिणामस्वरूप, दोपहर के समय जब सूर्य अपने पूर्ण प्रभाव में होता है, तब अचानक पृथ्वी के एक बड़े भू-भाग पर गहरा अंधेरा छा जाएगा और कुछ मिनटों के लिए दिन में ही 'रात' जैसा अहसास होने लगेगा। वैज्ञानिक और खगोलशास्त्री इस दुर्लभ घटना को लेकर अत्यंत उत्साहित हैं, क्योंकि ऐसा संयोग लगभग 64 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद बन रहा है।
64 साल बाद क्यों बन रहा है ऐसा दुर्लभ खगोलीय संयोग?
खगोलीय गणनाओं के अनुसार, वैसे तो सूर्य ग्रहण की घटना हर वर्ष एक या दो बार घटित होती है, परंतु 'पूर्ण सूर्य ग्रहण' का किसी विशेष भौगोलिक क्षेत्र से गुजरना अत्यंत दुर्लभ होता है। 12 अगस्त को होने वाले इस ग्रहण में चंद्रमा की छाया (Umbra) पृथ्वी के विशाल सतह को ढकेगी। शोधकर्ताओं के अनुसार, इस ग्रहण के दौरान सूर्य का बाहरी वायुमंडल यानी 'कोरोना' (Solar Corona) नग्न आंखों से (सुरक्षित चश्मे के माध्यम से) स्पष्ट रूप से दिखाई देगा। वैज्ञानिक दृष्टि से जब सूर्य का 98 से 100 प्रतिशत हिस्सा ढक जाता है, तो तापमान में अचानक गिरावट आती है और ठंडी हवाएं चलने लगती हैं। लगभग 64 साल बाद बन रहे इस दुर्लभ मार्ग और समय चक्र के कारण इसे इस सदी के सबसे महत्वपूर्ण सूर्य ग्रहणों में गिना जा रहा है। अंतरिक्ष एजेंसियां जैसे नासा (NASA) और यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ESA) इस घटना का अध्ययन करने के लिए विशेष सैटेलाइट्स और टेलीस्कोप तैनात कर रही हैं।
कहाँ-कहाँ दिखेगा यह सूर्य ग्रहण और क्या भारत में पड़ेगा असर?
इस महा-सूर्य ग्रहण का 'पाथ ऑफ टोटैलिटी' (पूर्णता का मार्ग) मुख्य रूप से उत्तरी गोलार्ध के कई प्रमुख हिस्सों से होकर गुजरेगा। यह ग्रहण ग्रीनलैंड, आइसलैंड, अटलांटिक महासागर और यूरोप के देश स्पेन में पूर्ण रूप से दिखाई देगा। स्पेन और आइसलैंड के कई शहरों में दोपहर के समय पूर्ण अंधकार छा जाएगा और आसमान में तारे टिमटिमाते हुए नजर आएंगे।
भारत में दृश्यता और सूतक काल की स्थिति: भारतीय खगोलशास्त्रियों और ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, यह पूर्ण सूर्य ग्रहण मुख्य रूप से यूरोप और अटलांटिक महासागरीय क्षेत्रों में केंद्रित रहेगा। भारत में इस समय रात्रि या संध्या का समय होने के कारण यह ग्रहण भारतीय भू-भाग पर प्रत्यक्ष रूप से दिखाई नहीं देगा। धार्मिक और शास्त्रीय मान्यताओं के अनुसार, जो सूर्य या चंद्र ग्रहण जिस देश में नग्न आंखों से दिखाई नहीं देता, वहां उसका धार्मिक सूतक काल (Sutak Kaal) मान्य नहीं होता है। इसलिए भारत में रहने वाले श्रद्धालुओं को दैनिक पूजा-पाठ, मंदिर के कपाट बंद करने या भोजन त्याग करने जैसे कड़े नियमों का पालन करने की अनिवार्यता नहीं होगी।
खगोलीय घटना का प्रकृति, जीव-जंतुओं और मानव जीवन पर असर
पूर्ण सूर्य ग्रहण केवल एक दृश्य खगोलीय घटना नहीं है, बल्कि इसका प्रभाव पृथ्वी के पर्यावरण और जीव-जंतुओं पर भी बहुत गहरा पड़ता है। जब दिन के उजाले में अचानक अंधेरा छा जाता है, तो प्रकृति में एक अजीब सा सन्नाटा पसर जाता है।
पशु-पक्षियों का व्यवहार: पक्षी इसे सूर्यास्त समझकर अपने घोंसलों की ओर लौटने लगते हैं और चहचहाना बंद कर देते हैं। रात में जगने वाले जीव (जैसे उल्लू और चमगादड़) सक्रिय होने लगते हैं।
तापमान में गिरावट: ग्रहण के चरम दौर में अचानक स्थानीय तापमान में 3 से 5 डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट आ सकती है।
ज्योतिषीय प्रभाव: यद्यपि यह भारत में अदृश्य है, परंतु ज्योतिषीय दृष्टि से सूर्य का सिंह या कर्क राशि में गोचर और ग्रहण योग का प्रभाव सभी 12 राशियों के जातकों के जीवन, शेयर बाजार और वैश्विक राजनीति पर देखा जा सकता है।
सूर्य ग्रहण देखने की सावधानियां और वैज्ञानिक दिशानिर्देश
खगोल विज्ञानियों ने चेतावनी दी है कि पूर्ण सूर्य ग्रहण कितना भी सुंदर क्यों न हो, इसे कभी भी सीधे नग्न आंखों से नहीं देखना चाहिए। सूर्य से निकलने वाली तीव्र पराबैंगनी (UV) और इन्फ्रारेड किरणें आंख की रेटिना को स्थायी रूप से नुकसान पहुंचा सकती हैं, जिसे 'सोलर रेटिनोपैथी' कहा जाता है।
विशेष चश्मों का प्रयोग: सूर्य ग्रहण देखने के लिए केवल ISO 12312-2 प्रमाणित 'सोलर फ़िल्टर' या सुरक्षित ग्रहण चश्मों (Eclipse Glasses) का ही उपयोग करें।
साधारण धूप के चश्मे न पहनें: सामान्य सनग्लासेस, एक्स-रे फिल्म या पानी में सूर्य की परछाई देखना आंखों के लिए बेहद खतरनाक हो सकता है।
कैमरा और टेलीस्कोप: यदि आप कैमरे, बिनोकुलर या टेलीस्कोप से ग्रहण की तस्वीर ले रहे हैं, तो लेंस के आगे सोलर फ़िल्टर लगाना अनिवार्य है।
12 अगस्त का यह दुर्लभ सूर्य ग्रहण विज्ञान और प्रकृति का एक अद्भुत चमत्कार है। जो लोग इसके पूर्ण मार्ग वाले देशों में मौजूद होंगे, वे जीवन के इस सबसे अविस्मरणीय खगोलीय अनुभव के साक्षी बनेंगे।