सावन अमावस्या पर करें पीपल के पेड़ का यह 1 महाउपाय, शनि साढ़ेसाती और ढैय्या का खौफ होगा खत्म, मिलेगी बड़ी राहत
सनातन धर्म में श्रावण मास (सावन) की अमावस्या का विशेष धार्मिक, आध्यात्मिक और ज्योतिषाचार्यीय महत्व है। सावन का पूरा महीना देवाधिदेव महादेव को समर्पित होता है और अमावस्या की तिथि पितरों के तर्पण व दान-पुण्य के लिए सर्वोत्तम मानी जाती है। वहीं, ज्योतिष शास्त्र में शनिदेव को कर्मफलदाता और भगवान शिव का परम भक्त माना गया है। शास्त्रों के अनुसार, जो व्यक्ति सावन मास में भगवान शिव की शरण में जाता है या शनिदेव से जुड़े विशेष उपाय करता है, उस पर शनिदेव की वक्र दृष्टि का प्रभाव निष्फल हो जाता है।
वर्तमान समय में यदि आपकी राशि पर शनि की साढ़ेसाती या ढैय्या का प्रभाव चल रहा है, तो सावन अमावस्या आपके लिए किसी महा-वरदान से कम नहीं है। साढ़ेसाती के दौरान व्यक्ति को शारीरिक कष्ट, मानसिक तनाव, करियर में अनिश्चितता और भारी आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ता है। लेकिन सावन अमावस्या के दिन यदि आप निष्ठापूर्वक एक विशेष उपाय कर लेते हैं, तो शनि के कठोर प्रकोप से आपको तुरंत राहत मिल सकती है और जीवन की रुकावटें दूर हो सकती हैं।
शनि साढ़ेसाती से मुक्ति का 1 सबसे अचूक उपाय: पीपल वृक्ष की पूजा और दीपक
सावन अमावस्या के दिन यदि आपके पास बहुत सारे धार्मिक अनुष्ठान करने का समय नहीं है, तो भी घबराने की आवश्यकता नहीं है। शास्त्रों में वर्णित यह '1 महाउपाय' शनि की साढ़ेसाती, ढैय्या और शनि दोष का शमन करने के लिए अत्यंत प्रभावशाली माना गया है।
उपाय की सामग्री:
तांबे का लोटे में साफ जल, थोड़ा सा कच्चा दूध, काले तिल, थोड़ी सी चीनी/गुड़, सरसों का तेल और चौमुखी चौड़ा दीया।
उपाय करने की सही विधि:
प्रातःकाल जल अर्पित करें और परिक्रमा करें:
सावन अमावस्या के दिन सुबह स्नान करने के पश्चात तांबे या पीतल के लोटे में शुद्ध जल लें। उसमें थोड़ा सा कच्चा दूध, काले तिल और चीनी मिला लें। अब किसी पुराने व पवित्र पीपल के वृक्ष के पास जाएं। दक्षिण या पूर्व दिशा की ओर मुंह करके पीपल की जड़ में यह जल धीरे-धीरे अर्पित करें। जल चढ़ाते समय मन ही मन 'ॐ शं शनैश्चराय नमः' या भगवान शिव के पंचाक्षर मंत्र 'ॐ नमः शिवाय' का जाप करते रहें। जल अर्पित करने के बाद पीपल के पेड़ की 7 या 11 बार परिक्रमा करें और अपनी गलतियों की क्षमा मांगें।
संध्या समय जलाएं सरसों के तेल का दीपक (छाया दान के साथ):
सावन अमावस्या की शाम (सूर्यास्त के ठीक बाद) एक मिट्टी के चौमुखी दीये में सरसों का तेल भरें। उसमें थोड़े से काले तिल और एक लोहे की कील डाल दें। दीये को जलाने से पहले सरसों के तेल में अपना चेहरा देखें (इसे छाया दान कहा जाता है, जो शनि के कष्टों को सोख लेता है)। इसके बाद इस दीपक को पीपल के पेड़ के नीचे ले जाकर प्रज्वलित कर दें।
दीपक जलाने के बाद हाथ जोड़कर शनिदेव और भगवान शिव से प्रार्थना करें: "हे कर्मफलदाता शनिदेव, जाने-अनजाने में हुए मेरे बुरे कर्मों को क्षमा करें और सावन के इस पवित्र दिन मुझे अपनी साढ़ेसाती व ढैय्या के कष्टों से मुक्ति प्रदान करें।" ध्यान रहे कि दीपक जलाने के बाद पीछे मुड़कर न देखें और सीधे घर वापस आ जाएं।
क्यों काम करता है पीपल का यह उपाय? जानिए इसके पीछे का पौराणिक रहस्य
पद्म पुराण और श्रीमद्भागवत के अनुसार, पीपल के वृक्ष के मूल में भगवान ब्रह्मा, मध्य में भगवान विष्णु और अग्र भाग में देवाधिदेव महादेव का वास होता है। इसके साथ ही, पीपल पर पितृ देवों का भी निवास माना गया है।
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, शनिदेव ने स्वयं भगवान शिव और हनुमान जी को यह वचन दिया था कि जो भी व्यक्ति सावन के महीने में या अमावस्या के दिन पीपल के पेड़ की सेवा करेगा और जल व सरसों का तेल अर्पित करेगा, उसे शनि की साढ़ेसाती या ढैय्या के दौरान कोई गंभीर कष्ट नहीं होगा। सावन अमावस्या पर पीपल की पूजा करने से एक साथ त्रिदेव (ब्रह्मा, विष्णु, महेश), पितृ देव और शनिदेव तीनों की अनकंडीशनल कृपा प्राप्त होती है, जिससे कड़े से कड़ा ग्रह दोष भी शांत हो जाता है।
उपाय के साथ इन 3 बातों का रखें विशेष ध्यान
सावन अमावस्या पर जब आप शनि साढ़ेसाती से राहत पाने के लिए यह उपाय कर रहे हों, तो उस दिन इन तीन बातों का अनिवार्य रूप से पालन करें ताकि उपाय का पूरा फल मिल सके:
किसी कमजोर, वृद्ध या मजदूर का अपमान न करें: शनिदेव न्याय के देवता हैं और समाज के निचले, मेहनतकश तबके का प्रतिनिधित्व करते हैं। अमावस्या के दिन किसी सफाई कर्मचारी, बुजुर्ग या गरीब व्यक्ति को अपनी क्षमता अनुसार भोजन, उड़द की दाल या काले तिल का दान जरूर करें और किसी का दिल न दुखाएं।
तामसिक आहार से पूरी तरह दूर रहें: इस दिन मांस, मदिरा, लहसुन-प्याज जैसी तामसिक चीजों का सेवन भूलकर भी न करें। मन में पवित्रता और सात्विकता बनाए रखें।
हनुमान चालीसा का पाठ करें: पीपल के नीचे दीपक जलाने के बाद यदि संभव हो तो वहीं बैठकर या घर के मंदिर में बैठकर 3 बार 'हनुमान चालीसा' का पाठ करें। हनुमान जी की भक्ति करने वाले साधकों को शनि कभी प्रताड़ित नहीं करते।
यदि आप लंबे समय से शनि की साढ़ेसाती, नौकरी में रुकावट, बीमारी या कर्ज के बोझ से दब रहे हैं, तो सावन अमावस्या के इस पावन अवसर को हाथ से न जाने दें। पूरी श्रद्धा और विश्वास के साथ पीपल के पेड़ का यह 1 आसान उपाय करें, शनिदेव की कृपा से आपके जीवन के सारे संकट और मानसिक अशांति बहुत जल्द दूर हो जाएगी।