लखनऊ के कसमंडीकला में मंदिर बनाम मकबरा विवाद: पुरातत्व विभाग ने की वीडियोग्राफी, बकरीद पर रही शांति

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India News Live,Digital Desk : लखनऊ के मलिहाबाद क्षेत्र में स्थित 'कसमंडीकला' विवादित स्थल पर चल रही जांच ने अब गति पकड़ ली है। शासन के सख्त निर्देशों के बाद, पुरातत्व विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर न केवल वैज्ञानिक तरीके से सैंपल लिए, बल्कि स्थल की गहन वीडियोग्राफी और फोटोग्राफी भी की। हाल ही में बकरीद के मौके पर किसी भी तरह के अप्रिय घटना को रोकने के लिए प्रशासन ने पहले से ही व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए थे। भारी पुलिस बल और पीएसी की तैनाती के चलते न तो मुस्लिम पक्ष नमाज के लिए पहुंचा और न ही हिंदू संगठन विरोध प्रदर्शन के लिए वहां एकत्रित हुए, जिससे प्रशासन ने राहत की सांस ली।

क्या है मंदिर और मकबरे का विवाद?

यह विवाद दो समुदायों के अलग-अलग ऐतिहासिक दावों को लेकर है। हिंदू पक्ष का दावा है कि यह स्थल राजा कंसा पासी का किला और वहां बना एक प्राचीन शिव मंदिर है। उनका आरोप है कि मौलाना जमील अहमद ने पिछले कुछ वर्षों में दीवारों पर बने हिंदू धार्मिक प्रतीकों (जैसे कलश, नाग और फूल-पत्तियां) को खुरच कर मिटा दिया और इसे मस्जिद का रूप देने की कोशिश की। इसके अलावा, एक दूसरी इमारत पर शव दफनाकर उसे मकबरे का रूप देने का आरोप भी लगाया गया है। वहीं, मुस्लिम पक्ष का दावा है कि यह एक 200 साल पुरानी मस्जिद है और वे लंबे समय से यहां इबादत करते आए हैं।

लाखन आर्मी का गंभीर आरोप और पुलिस की कार्रवाई

बढ़ते तनाव के बीच, लाखन आर्मी के राष्ट्रीय अध्यक्ष सूरज पासी ने मलिहाबाद थाने में एक औपचारिक ज्ञापन सौंपा है। उन्होंने मौलाना जमील अहमद पर मदरसे की आड़ में बच्चों के 'ब्रेनवाश' और धर्मांतरण कराने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। तहरीर में मौलाना की तत्काल गिरफ्तारी की मांग की गई है। इंस्पेक्टर सुरेंद्र सिंह भाटी ने बताया कि दोनों पक्षों से 20-20 लोगों को पहले ही पाबंद कर शांति व्यवस्था बनाए रखने के आदेश दिए गए हैं। फिलहाल स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और पुरातत्व विभाग की रिपोर्ट के आधार पर मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।