स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने काशी में फूंका 'चतुरंगिणी सेना' का शंखनाद: शास्त्र और शस्त्र के संगम से होगी 'सनातन' की रक्षा
India News Live,Digital Desk : धर्म नगरी काशी के श्रीविद्यामठ (केदारघाट) से सोमवार को एक बड़ी घोषणा हुई है। ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने 'चतुरंगिणी सेना' के गठन का एलान किया है। स्वामी जी ने स्पष्ट किया कि वर्तमान संक्रमण काल में जब गौ-माता, विद्वान ब्राह्मणों और निर्बल सनातनियों पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं, तो केवल शास्त्रों की चर्चा पर्याप्त नहीं है। भगवान परशुराम के संकल्प को दोहराते हुए उन्होंने कहा कि अब अन्याय का प्रतिकार करने के लिए समाज को 'शास्त्र और शस्त्र' दोनों से सुसज्जित होना होगा।
भयमुक्त समाज का संकल्प: हर सनातनी का 'अभिभावक' बनेगी यह सेना
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने इस सेना का उद्देश्य हिंदू समाज के भीतर से डर को समूल नष्ट करना बताया है। उन्होंने कहा कि यह 'चतुरंगिणी' हर सनातनी के लिए एक 'गार्जियन' (अभिभावक) की तरह काम करेगी। जब समाज को यह विश्वास होगा कि उसके पीछे एक सुगठित और सक्षम सैन्य बल खड़ा है, तब वह निर्भय होकर धर्म के पथ पर चल सकेगा और सत्य बोलने में संकोच नहीं करेगा। यह सेना पूरी तरह से धर्म-प्रतीकों की रक्षा और समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति की सहायता के लिए समर्पित होगी।
9-स्तरीय सैन्य ढांचा: पत्तिपाल से लेकर महासेनापति तक के पद
इस सेना का संचालन प्राचीन भारतीय सैन्य विज्ञान के आधार पर किया जाएगा। इसमें नौ स्तरों का पदानुक्रम (Hierarchy) निर्धारित किया गया है, जो संख्या बल के आधार पर होगा:
पदनाम: पत्तिपाल, सेनामुखपति, गुल्मपति, गणपाल, वाहिनीपति, पृतनापति, चमुपति, अनीकिनीपति और सर्वोच्च महासेनापति।
प्रोटोकॉल: हर अधिकारी के विशिष्ट उत्तरदायित्व और सैन्य प्रोटोकॉल होंगे। संगठन के शिखर पर 'परमाध्यक्ष' होंगे, जिनके अधीन पुरुष, महिला और तृतीय लिंग के प्रतिनिधियों को भी स्थान दिया जाएगा ताकि सामाजिक संतुलन बना रहे।
चार अंग और 20 विभाग: तन, मन, धन और जन का अद्भुत संगम
सेना की शक्ति को चार प्रमुख अंगाध्यक्षों के माध्यम से नियंत्रित किया जाएगा। हर अंग के भीतर पांच-पांच विशिष्ट विभाग होंगे:
| अंग | मुख्य कार्य एवं विभाग |
|---|---|
| मनबल | बौद्धिक मोर्चा: इसमें संत, विद्वान, पुरोहित, वकील (कानूनी सहायता) और मीडिया विभाग शामिल हैं। |
| तनबल | प्रत्यक्ष रक्षा: मल्ल (कुश्ती), लाठी, परशु, खड्ग और गन (शस्त्र संचालन) विभाग भौतिक सुरक्षा सुनिश्चित करेंगे। |
| जनबल | स्वयंसेवक सेवा: इसमें सार्वकालिक, वार्षिक, मासिक, साप्ताहिक और दैनिक श्रेणी के सेवादार तैनात रहेंगे। |
| धनबल | पोषक आधार: प्रकट-अप्रकट दाता, भूमि, भवन और वस्तुदाता इसके स्तंभ होंगे जो संसाधन उपलब्ध कराएंगे। |
पत्तिपाल होंगे जमीनी ताकत, 10 योद्धाओं की होगी एक टुकड़ी
संगठन की सबसे बुनियादी और कार्यकारी इकाई 'पत्ति' होगी। एक 'पत्तिपाल' के नेतृत्व में 10 योद्धाओं की टुकड़ी काम करेगी, जिसमें मनबल, तनबल और जनबल का मिश्रण होगा। स्वामी जी ने साफ किया कि 'धनबल' के सदस्य प्रत्यक्ष युद्ध या सैन्य टुकड़ी का हिस्सा नहीं होंगे, बल्कि वे सेना के संचालन के लिए आवश्यक आधार प्रदान करेंगे। यह संगठन सनातन धर्म के आत्मसम्मान की रक्षा के लिए एक अभेद्य दुर्ग की तरह तैयार किया जा रहा है।