शास्त्रीनगर सेंट्रल मार्केट में अवैध निर्माण हटाने का सुप्रीम कोर्ट का आदेश, व्यापारियों में बढ़ी मायूसी
India News Live,Digital Desk : शास्त्रीनगर के भूखंड संख्या 661/06 पर स्थित कांप्लेक्स के ध्वस्तीकरण के बाद 22 व्यापारियों का रोजगार छिन गया था। अब सुप्रीम कोर्ट ने पूरे इलाके में 1478 अवैध निर्माण हटाने का आदेश दिया है। इस आदेश से न केवल सेंट्रल मार्केट बल्कि पूरे शास्त्रीनगर में व्यापारियों में चिंता और मायूसी का माहौल है।
व्यापारी संघ का कहना है कि जनप्रतिनिधियों द्वारा आंदोलन समाप्त करने के दौरान किए गए वादे पूरे नहीं हुए। सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान व्यापारियों को पीड़ा और समाधान की जानकारी नहीं दी गई। इससे व्यापारियों में खासा रोष है।
व्यापारियों की चिंता – रोज़ी-रोटी का संकट
अधिकांश व्यापारियों के पास दुकान के अलावा कोई अन्य साधन नहीं है। भूखंड संख्या 656 में संचालित लाभ संस के मालिक वैभव विरमानी ने बताया कि उनके पिता और भाई भी इसी दुकान का संचालन करते हैं। सुप्रीम कोर्ट के आदेश से उनका परिवार विशेष रूप से चिंतित है। वैभव ने कहा, “यदि हमारी दुकान टूटती है तो रोज़ी-रोटी का संकट हमारे परिवार के सामने खड़ा हो जाएगा। हम कानूनी रास्ता तलाशने की कोशिश कर रहे हैं।”
बाजार में ग्राहकों की संख्या कम हुई
प्रेम पूजा केंद्र के हर्ष, उनके भाई सौरभ और मां कामिनी भी उदास दिखे। हर्ष ने बताया कि उनका परिवार पिछले बीस साल से इसी बाजार में है। दो महीने पहले उनके पिता का निधन हुआ था और अब ध्वस्तीकरण के आदेश से ग्राहक संख्या और भी घट गई है। हर्ष ने कहा, “अगर इतनी बड़ी संख्या में निर्माण तोड़ा गया तो पूरा बाजार ही खत्म हो जाएगा। हमारी दुकान जाती है तो परिवार क्या करेगा?”
टैक्स वसूलने के बावजूद कानूनी विरोधाभास
टाम एंड जेरी शोरूम के मालिक रजत गोयल ने बताया कि उनका कांप्लेक्स टूटने के बाद वे पास ही दूसरी जगह दुकान ले चुके हैं। अब उसी कांप्लेक्स के लिए सुप्रीम कोर्ट ने भी ध्वस्तीकरण का आदेश दे दिया। रजत ने कहा, “व्यापार जमाने में वर्षों लग जाते हैं। अब ग्राहक कम हैं और खर्चा बढ़ गया है। फिर से शिफ्ट करना पड़ेगा। नगर निगम टैक्स वसूल रहा है, लेकिन आवास विकास विभाग इसे अवैध बताता है, यह अन्याय है।”
व्यापारी नेता चाहते हैं कि कोर्ट में रखा जाए पक्ष
सरदार जी गिफ्ट सेंटर के मालिक राजप्रीत सिंह ने कहा कि उनके पिता ने लगभग 15 साल पहले मेहनत कर के दुकान शुरू की थी। पूरी जमा पूंजी इसी पर लगाई थी। राजप्रीत ने बताया, “हमारे पास कोई दूसरा रोजगार नहीं है। यदि दुकान जाती है तो पूरा परिवार बेरोजगार हो जाएगा। सभी अवैध निर्माण हटाए गए तो सारा बाजार ही खत्म हो जाएगा।”
व्यापारी मांग कर रहे हैं कि सुप्रीम कोर्ट में उनका पक्ष रखा जाए और उन्हें न्यायपूर्ण समाधान मिल सके ताकि उनके रोज़गार और परिवार की आजीविका सुरक्षित रह सके।