सुप्रीम कोर्ट ने आधार कार्ड पर 8 सितंबर के आदेश में बदलाव से किया इनकार
India News Live,Digital Desk : सुप्रीम कोर्ट ने आधार कार्ड को लेकर अपने हालिया आदेश में कोई बदलाव करने से इनकार कर दिया है। अदालत ने चुनाव आयोग को पहले ही निर्देश दिया था कि वह नोटिस जारी करे, जिसमें साफ हो कि विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान मतदाता सूची में नाम जोड़ने के लिए आधार को मान्य माना जाएगा।
जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने कहा कि यह आदेश केवल अंतरिम है और अभी आधार की वैधता पर अंतिम फैसला आना बाकी है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि जैसे राशन कार्ड या ड्राइविंग लाइसेंस फर्जी हो सकते हैं, वैसे ही आधार कार्ड को भी इससे बाहर नहीं रखा जा सकता।
यह बहस तब और तेज हुई जब बीजेपी नेता और वकील अश्विनी कुमार उपाध्याय ने 8 सितंबर के आदेश में संशोधन की मांग रखी। उनका कहना था कि आधार नागरिकता का प्रमाण नहीं है और इसे मतदाता पहचान से जुड़ी सूची में अन्य दस्तावेजों के बराबर नहीं रखा जा सकता। इस पर बेंच ने जवाब दिया, “ड्राइविंग लाइसेंस, राशन कार्ड या अन्य दस्तावेज भी फर्जी हो सकते हैं। आधार का उपयोग भी कानून के दायरे में रहकर ही होगा।”
उपाध्याय का तर्क था कि आधार विदेशियों को भी जारी किया जाता है, ऐसे में इसे चुनाव से जोड़ना खतरनाक साबित हो सकता है। लेकिन कोर्ट ने साफ कहा कि इस पर निर्णय लेना चुनाव आयोग का काम होगा।
बिहार के एसआईआर मामले पर सुनवाई जारी
सुप्रीम कोर्ट फिलहाल बिहार की विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा है। इससे पहले अदालत को बताया गया था कि 1 अगस्त को प्रकाशित मसौदा मतदाता सूची से करीब 65 लाख नाम हटा दिए गए थे।
14 अगस्त को कोर्ट ने चुनाव आयोग को निर्देश दिया था कि हटाए गए इन नामों की पूरी सूची वेबसाइट पर डाली जाए। इसके बाद 22 अगस्त को अदालत ने कहा कि जिन लोगों के नाम हटे हैं, वे अपने आधार कार्ड के आधार पर फिर से मतदाता सूची में शामिल हो सकते हैं।
पहले चुनाव आयोग का कहना था कि वह इसके लिए केवल 11 अन्य पहचान पत्रों को ही मान्य करेगा, लेकिन कोर्ट के निर्देश के बाद आधार को भी शामिल करना पड़ा।