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August 22 2026 05:00 pm

एकादशी के दिन बेलपत्र तोड़ना चाहिए या नहीं? जानिए क्या कहते हैं शास्त्र और नियम

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सावन मास की एकादशी तिथि को लेकर इस बार भक्तों के बीच तारीख को लेकर थोड़ा असमंजस बना हुआ है। कुछ पंचांग 23 अगस्त तो कुछ 24 अगस्त को व्रत होने की बात कह रहे हैं। एकादशी तिथि 23 अगस्त की रात से शुरू होकर 24 अगस्त की सुबह तक रहेगी, जिसके चलते अलग-अलग परंपराओं में अंतर देखा जा रहा है। इस बीच कई श्रद्धालुओं के मन में यह सवाल जरूर आ रहा है कि क्या एकादशी के पावन दिन बेलपत्र तोड़ा जा सकता है या नहीं।

क्या एकादशी के दिन बेलपत्र तोड़ना वर्जित है?

शास्त्रों और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, एकादशी के दिन बेलपत्र तोड़ना पूरी तरह से वर्जित या मना नहीं माना गया है। सनातन धर्म में मुख्य रूप से तुलसी के पत्ते एकादशी के दिन तोड़ने पर पाबंदी बताई गई है। बेलपत्र भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है और उनकी पूजा इसके बिना अधूरी मानी जाती है। एकादशी के दिन बेलपत्र तोड़कर शिवलिंग पर अर्पित करने में किसी प्रकार का कोई दोष नहीं लगता है, इसलिए भक्त पूरी श्रद्धा के साथ इस दिन बेलपत्र तोड़कर महादेव को चढ़ा सकते हैं।

किन दिनों में बेलपत्र तोड़ना माना गया है वर्जित?

भले ही एकादशी के दिन बेलपत्र तोड़ने पर रोक न हो, लेकिन कुछ खास तिथियों और दिनों में बेलपत्र तोड़ना सख्त वर्जित माना गया है:

प्रमुख तिथियां: चतुर्थी, अष्टमी, नवमी, द्वादशी, अमावस्या और पूर्णिमा के दिन बेलपत्र नहीं तोड़ना चाहिए।

विशेष समय: संक्रांति के दिन, रात के समय तथा प्रत्येक सोमवार को बेलपत्र तोड़ना उचित नहीं माना गया है।

नियम: यदि निषिद्ध दिनों में बेलपत्र की आवश्यकता हो, तो एक दिन पहले ही तोड़कर रख लें या पेड़ के नीचे पहले से गिरी हुई पत्तियों का उपयोग कर सकते हैं।

सोमवार को बेलपत्र क्यों नहीं तोड़ना चाहिए?

सोमवार का दिन देवों के देव महादेव को समर्पित होता है और इस दिन का विशेष महत्व होता है। हालांकि इस दिन बेलपत्र चढ़ाना बहुत शुभ होता है, लेकिन शास्त्रों के अनुसार सोमवार के दिन पेड़ से नया बेलपत्र तोड़ना वर्जित है। जो भक्त सोमवार का व्रत रखते हैं या नियमित पूजा करते हैं, उन्हें हमेशा रविवार के दिन ही बेलपत्र तोड़कर रख लेना चाहिए। खास बात यह है कि बेलपत्र कभी बासी नहीं माना जाता, इसलिए इसे एक दिन पहले तोड़कर रखना पूरी तरह से शास्त्र सम्मत है।